Tuesday, April 8, 2025

एक प्याला पानी, एक नई जिंदगी — गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाएँ


गर्मी का मौसम हर साल आता है। सूरज बहुत तेज़ चमकता है, ज़मीन तपने लगती है और लू चलने लगती है। ऐसे में हम सबको बहुत प्यास लगती है, बार-बार ठंडा पानी पीने का मन करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे आसपास जो पक्षी रहते हैं, वो इस गर्मी में क्या करते होंगे?

जैसे हम इंसान गर्मी में परेशान हो जाते हैं, वैसे ही गौरैया, बुलबुल, मैना, कबूतर जैसे पक्षी भी बहुत परेशान होते हैं। उन्हें भी प्यास लगती है, लेकिन वो तो दुकानों से पानी की बोतल नहीं खरीद सकते। वो तो सिर्फ वही पानी पी सकते हैं जो उन्हें आस-पास कहीं मिल जाए — जैसे कोई तालाब, पेड़ के नीचे का गड्ढा या कोई साफ बर्तन।

आजकल शहरों में तालाब और झीलें बहुत कम हो गई हैं। पेड़ों की संख्या भी घट गई है। ऊपर से गर्मी में जो थोड़े बहुत जलस्रोत होते हैं, वो भी सूख जाते हैं। इसलिए पक्षियों को बहुत मुश्किल होती है।

क्या आपने गौर किया है कि अब आपके घर की बालकनी या आँगन में पहले जितने पक्षी आते थे, उतने अब नहीं आते? गौरैया, जो कभी हर घर की पहचान हुआ करती थी, अब बहुत कम दिखती है।

इसके कई कारण हैं। हमने अपने घरों में उनके लिए पानी और दाना रखना बंद कर दिया। पेड़ काट दिए, जहाँ वो बैठा करती थीं या घोंसला बनाती थीं। मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगों से भी उन्हें नुकसान पहुँचता है। और सबसे बड़ी बात — हमने उनके लिए समय और ध्यान देना छोड़ दिया।

गर्मी के दिनों में तापमान 40 डिग्री से भी ऊपर चला जाता है। ऐसे में पानी की कमी बहुत बढ़ जाती है। पक्षी इधर-उधर उड़ते हैं, लेकिन जब कहीं भी पानी नहीं मिलता तो कई बार वो प्यास से मर भी जाते हैं।

अब सोचिए, अगर हम सब अपने घर की बालकनी, खिड़की, आँगन या छत पर एक छोटा सा बर्तन रख दें, जिसमें साफ पानी हो — तो कितने पक्षियों की जान बच सकती है। ये एक बहुत छोटा काम है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा होता है।

पानी के साथ-साथ अगर हम कुछ दाना भी रख दें — जैसे चावल, बाजरा, ज्वार या टूटे हुए गेहूं — तो पक्षियों को पीने के बाद खाने को भी मिल जाएगा। गर्मी में दाना ढूंढना भी मुश्किल हो जाता है। ज़मीन सूख जाती है, खेतों में फसल नहीं होती। ऐसे में हमारी मदद उनके लिए एक पूरा भोजन बन जाती है।

इसके लिए बर्तन का चुनाव भी ध्यान से करना चाहिए। मिट्टी, स्टील या सिरेमिक के बर्तन सबसे अच्छे होते हैं क्योंकि ये पानी को ठंडा रखते हैं। प्लास्टिक के बर्तन बहुत गरम हो जाते हैं, इसलिए उन्हें न रखें।

हर दो-तीन दिन में बर्तन को अच्छे से धोना चाहिए और उसमें ताज़ा पानी भरना चाहिए, ताकि पानी दूषित न हो और पक्षियों को कोई बीमारी न हो।

बर्तन को ऐसी जगह रखें जहाँ धूप सीधी न पड़े और पक्षी आराम से बैठ सकें — जैसे छत का कोना, बालकनी, खिड़की की मुंडेर या आँगन का कोई कोना।

थोड़ा सा दाना रोज़ रखना चाहिए। इसे ज़मीन पर या किसी तश्तरी में फैलाकर रख सकते हैं ताकि पक्षी आराम से चुग सकें। अगर घर में पेड़ हैं, तो वहाँ पानी रख सकते हैं ताकि पक्षी शाखाओं पर बैठकर आराम से पानी पी सकें।

कुछ लोग सोचते हैं कि यह सेवा या दान है, लेकिन यह तो संवेदना है, यानी दिल से जुड़ा हुआ एक अच्छा काम। हम सब एक ही धरती पर रहते हैं — इंसान, जानवर, पक्षी और पेड़-पौधे। अगर हम अपने आस-पास के जीवों का ध्यान नहीं रखेंगे, तो यह धरती सूनी और बेरंग हो जाएगी।

बच्चे इस काम में बहुत आगे आ सकते हैं। स्कूलों में पोस्टर बनाकर या ड्रॉइंग बनाकर इस विषय को दिखाया जा सकता है। स्कूल में भी पक्षियों के लिए पानी रखने की जगह बनाई जा सकती है। बच्चे आपस में मिलकर एक बर्ड-फीडिंग टीम भी बना सकते हैं। इससे उनमें प्रकृति से जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना आएगी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ती गर्मी और कम होते जलस्रोतों की वजह से पक्षियों की संख्या घट रही है। उनकी प्रजनन दर यानी बच्चे पैदा करने की क्षमता भी कम हो गई है। गौरैया जैसे पक्षी अब शहरों में घोंसले नहीं बना पा रहे क्योंकि उन्हें न तो जगह मिलती है, न भोजन और न पानी।

अगर एक बच्चा भी एक प्याला पानी रखे, और फिर उसके दोस्त, परिवार वाले और पड़ोसी भी ऐसा करें — तो यह एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सोचिए अगर हर गली, हर स्कूल, हर कॉलोनी में परिंदों के लिए पानी हो — तो कितनी ज़िंदगियाँ बच सकती हैं। यह एक अभियान बन सकता है — "हर घर एक प्याला पानी"।

गर्मी हर साल आती है, और हर साल कुछ पक्षी प्यास से तड़प जाते हैं। लेकिन इस बार, हम कुछ अलग और अच्छा कर सकते हैं। हम एक प्याला पानी रखकर किसी परिंदे की जान बचा सकते हैं।

तो आइए, आज से ही यह काम शुरू करें। अपने घर में एक बर्तन रखें। रोज़ उसमें ताज़ा पानी भरें। थोड़ा दाना भी डालें। और सबसे ज़रूरी — दूसरों को भी प्रेरित करें।

पक्षियों की चहचहाहट फिर से लौटेगी — बस ज़रूरत है हमारी एक कोशिश की|

                                                               पक्षियों की प्यास

      गर्मी आई, सूरज तेज़,

      पक्षी बेचारे हो गए फेल।

      ना तालाब, ना पानी की धार,

      प्यासे उड़ते बार-बार।

                                                           गौरैया जो चहकती थी,

                                                           अब वो भी कम दिखती है।

                                                            मैना, कबूतर, बुलबुल प्यारे,

                                                            ढूंढें पानी सारे दिन हमारे।

      प्यास से जब गला सूखता है,

     पंख भी उड़ने से रुकता है।

     पर अगर हम थोड़ा ध्यान दें,

     तो इनका जीवन आसान बनें।

                                                   रखें एक प्याला साफ़ जल,

                                                  बालकनी या छत पर हर पल।

                                                   साथ में थोड़ा दाना भी हो,

                                                   परिंदों को खाना भी तो दो!


      मिट्टी या स्टील का हो बर्तन,

      हर दिन बदलें उसमें जल।

      पेड़ के नीचे, कोने में रखें,

      जहाँ परिंदे आराम से बैठें।


                                                  छोटी सी यह मदद हमारी,

                                                  बन जाए इनके लिए प्यारी।

                                                  हम सबका है ये संसार,

                                                  पक्षी भी हैं इसका अंग समान।

      तो आओ मिलकर काम करें,

      हर घर में एक प्याला धरें।

      गर्मी में न कोई प्यासा हो,

      हर पंख खुशहाल और हँसा हो।



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