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Monday, May 26, 2025

बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों की ओर उत्तर प्रदेश

 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया 3300 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ

लखनऊ, 26 मई 2025 — उत्तर प्रदेश में बच्चों को बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन सभागार में एक विशाल कार्यक्रम के माध्यम से 3300 करोड़ रुपये की शिक्षा परियोजनाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा राष्ट्र निर्माण की नींव है और इसे मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है।

शिक्षा में बड़ा निवेश: नए स्कूल भवन और डिजिटल साधनों की शुरुआत

मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम के दौरान 139 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के उच्चीकृत भवनों और अतिरिक्त डॉरमेट्री का लोकार्पण किया। इसके अलावा 43 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों और 66 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालयों की आधारशिला रखी गई। इस पहल का मकसद ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

हर विद्यार्थी को मिले समान अवसर: डीबीटी के ज़रिए ₹1200 ट्रांसफर

सीएम योगी ने यूनिफॉर्म, बैग, जूते, मोजे और स्टेशनरी के लिए प्रत्येक छात्र को ₹1200 की धनराशि अभिभावकों के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए भेजी। यह राशि प्रदेश के 1.5 करोड़ से अधिक बच्चों को दी गई है। मुख्यमंत्री ने सभी अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि इस पैसे का उपयोग बच्चों की ज़रूरतों पर ही हो।

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा: स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और टैबलेट्स वितरण

शिक्षा को तकनीक से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 7,409 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 5,258 विद्यालयों में आईसीटी लैब, और 51,667 शिक्षकों को टैबलेट्स वितरित किए। साथ ही 503 पीएम श्री विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन किया गया।

‘निपुण प्लस एप’ से होगा स्मार्ट असेसमेंट, स्टूडियो से शिक्षा का प्रसारण

मुख्यमंत्री ने राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में एजुकेशनल ब्रॉडकास्ट स्टूडियो की शुरुआत की, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिक्षण सामग्री प्रसारित की जा सकेगी। साथ ही कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों के लिए ‘निपुण प्लस एप’ की शुरुआत की गई, जिससे उनका स्मार्ट असेसमेंट किया जाएगा।

शिक्षकों की अहम भूमिका: अनुपात सुनिश्चित और प्रशिक्षु शिक्षकों को नया अनुभव

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों की संख्या पर्याप्त रखी जाएगी और शिक्षक-छात्र अनुपात हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। बीएड और एमएड के छात्रों को निपुण आकलन कार्यक्रम में शामिल करने की बात कही गई ताकि उन्हें फील्ड का अनुभव मिल सके और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो।

ऑपरेशन कायाकल्प ने बदली स्कूलों की तस्वीर

सीएम योगी ने बताया कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की हालत जर्जर थी, वहां साफ-सफाई, शौचालय, पीने का पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं। लेकिन ऑपरेशन कायाकल्प के तहत यह सब कुछ बदला है। अब इन स्कूलों में खेल मैदान, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, और शौचालय जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे बच्चों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

हर विधानसभा क्षेत्र में खुलेगा मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय

सीएम योगी ने घोषणा की कि हर विधानसभा क्षेत्र में एक मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय खोला जाएगा, जो प्री-प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी तक की शिक्षा एक ही परिसर में देगा। इन स्कूलों में साइंस लैब, कंप्यूटर लैब, स्टेडियम, और मल्टीपर्पज हॉल जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।

समर कैंप में बच्चों के समग्र विकास की तैयारी

मुख्यमंत्री ने समर कैंप में बच्चों के सर्वांगीण विकास की बात करते हुए कहा कि इनमें खेल, संगीत, नृत्य, नाटक, और योग जैसी गतिविधियों को शामिल किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए अभी से तैयारी की जाए और आयुष मंत्रालय के योग प्रोटोकॉल को लागू किया जाए।

‘स्कूल चलो अभियान’ को मिले नई गति, कोई बच्चा न छूटे

सीएम योगी ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को तेज़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांवों में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए, इसके लिए शिक्षक और प्रधानाचार्य घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल में जोड़ें। नए बच्चों का स्वागत ढोल-नगाड़े के साथ हो और स्वच्छता को विद्यालयों से जोड़ा जाए।

शिक्षकों को किया गया सम्मानित, नई किताबों का विमोचन

निपुण आकलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 5 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। साथ ही एससीईआरटी द्वारा तैयार की गई दो नई पुस्तकें ‘सारथी’ और ‘अनुरूपण’ का विमोचन भी किया गया, जो शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देंगी।

बच्चों की प्रदर्शनी का मुख्यमंत्री ने किया अवलोकन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों द्वारा तैयार की गई शैक्षिक प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और बच्चों से उनकी परियोजनाओं की जानकारी ली। बच्चों ने अपनी कला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित परियोजनाएं प्रस्तुत कीं।

मुख्यमंत्री का संदेश: शिक्षक बनाएं देश का भविष्य

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का भविष्य गढ़ते हैं और उनका सम्मान तभी है जब वे बच्चों को उज्ज्वल भविष्य दे पाएं। समय का सदुपयोग करें और बच्चों की प्रतिभा को निखारें।

कार्यक्रम में शामिल हुए कई गणमान्य व्यक्ति

इस भव्य कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, और अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रस्तुत यह संपूर्ण कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल साधनों का उपयोग, बच्चों की समग्र प्रतिभा का विकास और शिक्षकों की भूमिका को सम्मान देने के उद्देश्य से यह पहल एक मजबूत बुनियाद तैयार कर रही है। यह कदम न केवल बच्चों के भविष्य को संवारने वाला है, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने वाला है।

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Saturday, May 17, 2025

ट्रांसफर में देरी पर यूपी सरकार ने 26 बीएसए को नोटिस।

 


कानपुर सहित यूपी के 26 जिलों के बीएसए पर सरकार की सख्ती – शिक्षकों के स्थानांतरण कार्यों में लापरवाही पर नोटिस

उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग ने 26 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन बीएसए पर आरोप है कि इन्होंने शिक्षकों के पारस्परिक स्थानांतरण (Mutual Transfer) से संबंधित कार्यों में लापरवाही बरती है। इन अधिकारियों पर शिक्षकों के आवेदन पत्रों का समय पर सत्यापन न करने और स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी करने का आरोप है। इस कारण राज्य भर में कई शिक्षक नाराज हैं, और स्थानांतरण कार्य बाधित हो रहे हैं।

मुख्य मुद्दा क्या है?

हर साल उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा दी जाती है। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षक आपसी सहमति से एक-दूसरे की जगह पर ट्रांसफर के लिए आवेदन करते हैं। इस आवेदन के सत्यापन की जिम्मेदारी बीएसए की होती है। सत्यापन के बाद ही इनका ट्रांसफर आगे बढ़ पाता है।

लेकिन इस साल राज्य के 26 जिलों के बीएसए अपने-अपने जिलों से आए शिक्षकों के ट्रांसफर आवेदन की सत्यापन प्रक्रिया में ढिलाई बरत रहे हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि बीएसए या तो सत्यापन करते ही नहीं हैं या समय पर कार्यवाही नहीं करते, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली बाधित हो रही है।

कौन-कौन से जिले हैं इस लापरवाही में शामिल?

जिन जिलों के बीएसए को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं:

गोंडा
रायबरेली
सुल्तानपुर
अंबेडकरनगर
बहराइच
वाराणसी
मिर्जापुर
महोबा
मैनपुरी
मथुरा
मुरादाबाद
औरैया
चंदौली
इटावा
संतकबीरनगर
शामली
उन्नाव
आगरा
बलरामपुर
फतेहपुर
हापुड़
जौनपुर
कानपुर नगर
महाराजगंज
सम्भल
गाज़ीपुर

शिक्षा निदेशक की नाराजगी

शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने साफ कहा है कि इन बीएसए अधिकारियों को अपने कार्यों में रुचि नहीं है। इनकी उदासीनता के कारण शिक्षकों को परेशानी हो रही है और स्थानांतरण की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो रहा है।

निदेशक ने स्पष्ट किया कि यह एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसमें किसी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित बीएसए को 16 मई तक जवाब देने का निर्देश दिया है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

आखिर सत्यापन क्यों है जरूरी?

पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया में सबसे अहम हिस्सा होता है – आवेदन पत्रों की पुष्टि और दस्तावेजों का सत्यापन। अगर किसी शिक्षक की जानकारी गलत होती है या वह तय मापदंडों पर खरा नहीं उतरता, तो उसके ट्रांसफर पर रोक लग जाती है। इसी वजह से सत्यापन में देरी होने पर सैकड़ों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।

शिक्षकों में बढ़ रहा आक्रोश

राज्य भर में शिक्षक संघों और संगठनों ने बीएसए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब शिक्षा विभाग ने पहले ही समय-सीमा तय कर दी है, तब बीएसए क्यों देरी कर रहे हैं? इससे न सिर्फ शिक्षकों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके पारिवारिक और मानसिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है।

कुछ जिलों में शाम तक भी नहीं हुआ सत्यापन

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई जिलों जैसे औरैया, उन्नाव और कानपुर नगर में शिक्षकों के आवेदन सत्यापन का कार्य शाम तक भी नहीं किया गया। इससे स्पष्ट है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं।

सरकार की नई सख्ती

अब शिक्षा विभाग ने तय किया है कि अगर बीएसए अधिकारियों ने समय पर जवाब नहीं दिया और प्रक्रिया में सुधार नहीं किया, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें वेतन रोकने, तबादला करने या निलंबन जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

अधिकारियों के काम में रुचि की कमी

शिक्षा विभाग ने कहा है कि इन बीएसए अधिकारियों की कार्यशैली यह दर्शाती है कि उन्हें अपने कार्यों में कोई रुचि नहीं है। जब कोई अधिकारी अपने दायित्व को गंभीरता से नहीं लेता, तो उसका सीधा प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। शिक्षकों के स्थानांतरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में रुचि न लेना प्रशासनिक लापरवाही की श्रेणी में आता है।

निदेशक की सख्त चेतावनी

शिक्षा निदेशक ने यह भी कहा है कि बीएसए अधिकारी विभागीय निर्देशों का पालन करें और हर हाल में सत्यापन का कार्य निर्धारित समय में पूरा करें। उन्होंने चेताया कि अब विभाग बार-बार समय सीमा नहीं बढ़ाएगा।

समाप्ति और निष्कर्ष

यह पूरी घटना उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करती है। अगर अधिकारी अपने कार्यों में रुचि नहीं लेंगे और समय पर दायित्व नहीं निभाएंगे, तो इसका सीधा असर शिक्षकों और अंततः विद्यार्थियों पर पड़ेगा।

शिक्षा विभाग की यह सख्ती स्वागत योग्य कदम है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ तकनीकी रूप से पारदर्शी प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिससे शिक्षकों के स्थानांतरण जैसे कार्य बिना किसी अड़चन के हो सकें।


नोट: यह मेटा विवरण एक समाचार चित्र पर आधारित है, जिसमें 17 मई 2025 की तारीख का उल्लेख है और यह रिपोर्ट "स्वराज इंडिया" समाचार पत्र में प्रकाशित हुई है।


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Sunday, May 11, 2025

सिविल डिफेंस में भर्ती शुरू, आम लोग बनें देश के रक्षक



 सिविल डिफेंस भर्ती शुरू – अब आम लोग भी बन सकेंगे आपदा में देश के रक्षक


भारत सरकार के निर्देश पर देश के विभिन्न राज्यों में नागरिकों को आपदा और युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में मदद के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसी क्रम में प्रयागराज में सिविल डिफेंस (नागर सुरक्षा) के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य है – आम नागरिकों को प्रशिक्षित कर उन्हें संकट की घड़ी में देश और समाज की सेवा के लिए तैयार करना।

क्या है सिविल डिफेंस?

सिविल डिफेंस एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत नागरिकों को किसी आपदा, युद्ध या आपातकालीन स्थिति में राहत, बचाव और सुरक्षा के कामों में शामिल किया जाता है। ये सदस्य पुलिस, प्रशासन और सेना के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में सेवाएं देते हैं। प्राकृतिक आपदा, आगजनी, बाढ़, दुर्घटना, युद्ध या किसी आतंकी घटना के समय ये लोग अग्रिम पंक्ति में खड़े होते हैं और लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रयागराज में भर्ती का अवसर

प्रयागराज जिले में सिविल डिफेंस संगठन के अंतर्गत अभी लगभग 700 सक्रिय सदस्य हैं, जो नियमित रूप से प्रशिक्षण लेते रहते हैं और समय-समय पर राहत कार्यों में प्रशासन का सहयोग करते हैं। लेकिन अब इस संख्या को और बढ़ाने की योजना बनाई गई है। 18 हजार रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और प्रथम चरण में 1000 फॉर्म वितरित किए गए हैं। यानी अब आम नागरिक भी आवेदन कर सिविल डिफेंस का हिस्सा बन सकते हैं।

भर्ती प्रक्रिया क्या है?

सिविल डिफेंस में भर्ती के लिए नागरिकों को एक फॉर्म भरना होगा, जो सिविल डिफेंस कार्यालय (नागर सुरक्षा भवन) से प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों को निर्धारित समय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें आपदा प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा, अग्निशमन, रेस्क्यू तकनीक आदि की जानकारी दी जाएगी।

महत्वपूर्ण बिंदु:

फॉर्म नि:शुल्क मिल रहे हैं।

पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

18 वर्ष से अधिक आयु वाले नागरिक आवेदन कर सकते हैं।

महिला और पुरुष दोनों वर्गों के लिए अवसर खुला है।

वार्डन के माध्यम से सदस्यता संभव है।

क्यों जरूरी है सिविल डिफेंस?

प्राकृतिक आपदाएं और मानवीय संकट अचानक आ जाते हैं, जैसे – बाढ़, भूकंप, आग, इमारत गिरना, सड़क दुर्घटनाएं, रेल हादसे, या युद्ध जैसी परिस्थितियां। ऐसे समय में यदि स्थानीय नागरिक प्रशिक्षित हों, तो वे घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचकर जान-माल की हानि को रोक सकते हैं। यही कारण है कि भारत सरकार अब सिविल डिफेंस को मजबूत करना चाहती है।

सिविल डिफेंस सदस्य:

राहत और बचाव कार्य करते हैं।

घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करते हैं।

सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करते हैं।

ट्रैफिक कंट्रोल, आग बुझाना, लोगों को शेल्टर तक पहुंचाना, और बच्चों-बुजुर्गों की विशेष सहायता करते हैं।

पूर्व सैनिकों को मिलेगा विशेष स्थान

इस भर्ती में एक विशेष प्रावधान यह भी किया गया है कि पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि वे पहले से प्रशिक्षित होते हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर तरीके से कार्य कर सकते हैं। यह कदम न केवल उनकी सेवा भावना को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि देश को उनके अनुभव का लाभ भी मिलेगा।

समाज सेवा का सुनहरा अवसर

सिविल डिफेंस में शामिल होना सिर्फ सरकारी सेवा नहीं है, बल्कि एक समाज सेवा और देशभक्ति का अवसर है। जो युवा देश की सेवा करना चाहते हैं, सेना या पुलिस में नहीं जा सके, वे इस माध्यम से अपना योगदान दे सकते हैं। यह न केवल उन्हें गर्व की अनुभूति कराता है, बल्कि समाज में सम्मान भी दिलाता है।

फॉर्म कहाँ से और कैसे लें?

नागर सुरक्षा कार्यालय, प्रयागराज से इच्छुक व्यक्ति फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही संबंधित वार्डन के माध्यम से भी फॉर्म भरा जा सकता है। इच्छुक व्यक्तियों को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द फॉर्म भरें और इस महान सेवा में शामिल हों।

सिविल डिफेंस की भूमिका और भविष्य

जैसे-जैसे समाज और शहर विकसित हो रहे हैं, वैसे-वैसे दुर्घटनाओं और आपदाओं की संभावना भी बढ़ रही है। ऐसे में सिविल डिफेंस की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। एक मजबूत, प्रशिक्षित नागरिक बल न केवल प्रशासन का काम आसान करेगा, बल्कि आम जनता में भी आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ाएगा।

प्रयागराज में शुरू हुई सिविल डिफेंस भर्ती एक ऐसा अवसर है, जो न केवल नागरिकों को सेवा के क्षेत्र में आगे लाता है, बल्कि उन्हें प्रशिक्षित कर समाज का सजग प्रहरी भी बनाता है। यदि आप भी समाज की सेवा करना चाहते हैं, देश के लिए कुछ करना चाहते हैं और संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने का जज्बा रखते हैं – तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है।

 

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