हीट वेव से बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूलों में एडवाइजरी, ओआरएस, पानी और पंखे की व्यवस्था के निर्देश
कानपुर देहात ज़िले में इन दिनों गर्मी अपना रौद्र रूप दिखा रही है। अप्रैल महीने में ही तापमान इतना बढ़ गया है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसी भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। विभाग ने हीट वेव यानी लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में स्कूलों के प्रधानाचार्यों और अध्यापकों को कई ज़रूरी निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चे इस खतरनाक गर्मी में सुरक्षित रह सकें। स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों का स्वास्थ्य भी ज़रूरी है। इसलिए गर्मी में बच्चों को हीट वेव से बचाने के लिए आपदा प्रबंधन के तहत बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है।
गर्मी के मौसम में सबसे बड़ी परेशानी बिजली और पानी की होती है। अगर स्कूलों में बिजली चली जाए और पानी की सप्लाई न हो तो बच्चों को दिक्कत हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने निर्देश दिया है कि स्कूलों में बिजली की व्यवस्था दुरुस्त रहे और पानी की सप्लाई लगातार बनी रहे। इसके अलावा हर क्लासरूम में पंखे सही हालत में काम करते रहें, इसका भी ध्यान रखना ज़रूरी है। सभी स्कूलों को कहा गया है कि वे कमरों को ठंडा और आरामदायक बनाए रखें।
गर्मी में खुले में खेलना या किसी भी प्रकार की गतिविधि करना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। तेज़ धूप और हीट वेव में बच्चे बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए स्कूलों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि बच्चों से कोई भी शारीरिक गतिविधि, जैसे दौड़, खेलकूद या पीटी न कराई जाए। बच्चों को धूप में न भेजा जाए और न ही प्रार्थना सभा जैसी गतिविधियां खुले में कराई जाएं। सभी गतिविधियां कमरे के अंदर ही कराई जाएं।
सिर्फ यही नहीं, बच्चों और उनके अभिभावकों को भी गर्मी से बचाव के तरीके बताए जाएंगे। इसके लिए स्कूलों में आपदा प्रबंधन पर आधारित फिल्में दिखाई जाएंगी। इन फिल्मों के ज़रिए बच्चों और उनके परिवारों को बताया जाएगा कि गर्मी के मौसम में कैसे खुद को सुरक्षित रखें। कौन-कौन से उपाय करें ताकि हीट वेव से बचा जा सके। जैसे — घर से बाहर न निकलना, धूप में छाता या टोपी लगाना, हल्के और सूती कपड़े पहनना, ठंडा पानी पीना और ओआरएस घोल का सेवन करना।
ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन गर्मी में बहुत फायदेमंद होता है। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और लू लगने का खतरा कम होता है। स्कूलों को आदेश दिए गए हैं कि वे बच्चों के लिए ओआरएस और इलेक्ट्राल के पैकेट का इंतज़ाम करें। अगर किसी बच्चे को चक्कर आए या वह कमजोर महसूस करे तो उसे तुरंत ओआरएस का घोल दिया जाए।
बेसिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में व्यवस्थाएं दुरुस्त कराएं। पेयजल की व्यवस्था लगातार बनी रहे, बिजली की सप्लाई में कोई रुकावट न आए और पंखे पूरी तरह सही हालत में चलें। अगर गर्मी और बढ़ती है तो स्कूल समय में भी परिवर्तन किया जाएगा। मतलब यह कि स्कूल का समय घटाकर सुबह जल्दी या दिन में जल्दी छुट्टी कर दी जाएगी, ताकि बच्चे दोपहर की तेज़ धूप में घर न जाएं।
गर्मी में बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है। छोटे बच्चों की त्वचा और शरीर जल्दी गर्मी पकड़ लेते हैं। उन्हें जल्दी पसीना आता है और कमजोरी महसूस होती है। अगर सही देखभाल न की जाए तो बच्चे हीट स्ट्रोक का शिकार भी हो सकते हैं। इसलिए विद्यालयों को कहा गया है कि वे हर हाल में बच्चों के लिए बिजली, पानी और पंखे की व्यवस्था बनाए रखें। अगर कहीं कोई समस्या आती है तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।
विद्यालयों में जलपान के समय भी ध्यान रखने की ज़रूरत है। बच्चों को ठंडा और साफ पानी मिलना चाहिए। ज्यादा मीठे, भारी और तले-भुने खाद्य पदार्थ न दिए जाएं। बच्चों को हल्का भोजन और फलों का सेवन करने के लिए प्रेरित किया जाए। अगर कोई बच्चा बीमार लगे तो उसकी सूचना उसके अभिभावकों को तुरंत दें। गर्मी के मौसम में वायरल बुखार, डायरिया और हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं।
इसी वजह से यह भी तय किया गया है कि विद्यालय परिसर में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। पानी के टैंकों को साफ कराकर ही पानी भरवाया जाए। बच्चों को साफ-सुथरे गिलास और बर्तनों में पानी पिलाया जाए। कहीं भी गंदा पानी या कीचड़ जमा न होने दिया जाए। इससे मच्छर और कीड़े-मकोड़े भी पनपते हैं जो और बीमारियां फैला सकते हैं।
हीट वेव के दौरान बच्चों के पहनावे का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्हें सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए। गहरे रंग के कपड़े जल्दी गर्मी पकड़ते हैं। बच्चों को टोपी या रूमाल से सिर ढकने के लिए कहा जाए। अगर स्कूल वर्दी में बदलाव करना संभव हो तो गर्मी के मौसम में हल्की और आरामदायक वर्दी की अनुमति दी जाए।
स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा भी अब कमरों के अंदर ही कराई जाए या पूरी तरह से स्थगित कर दी जाए। बच्चों को लंबी कतार में खड़ा न कराया जाए। अगर बहुत ज़रूरी हो तो छायादार जगह पर, बहुत कम समय के लिए ही प्रार्थना कराई जाए।
अभिभावकों को भी जागरूक करने की ज़रूरत है। स्कूलों की तरफ से पत्र भेजकर या अभिभावक बैठक के ज़रिए उन्हें बताया जाए कि वे गर्मी के मौसम में अपने बच्चों का कैसे ध्यान रखें। बच्चों को समय पर स्कूल भेजें और दोपहर की छुट्टी के बाद सीधे घर ले जाएं। बच्चों को घर में ज्यादा देर धूप में खेलने न दें।
हीट वेव के समय बच्चों के खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को ताजे फल, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा जैसी चीजें खिलाई जाएं। बासी खाना, तली-भुनी चीजें और कोल्ड ड्रिंक से बचें। अगर बच्चा बाहर से खेलकर आया हो तो उसे तुरंत ठंडा पानी या ओआरएस का घोल पिलाएं।
हीट वेव के दौरान लू से बचाव के उपाय बच्चों को बार-बार समझाने चाहिए। जैसे — तेज़ धूप में बाहर न जाएं, छाया में रहें, सिर पर टोपी या गीला कपड़ा रखें, पानी बार-बार पिएं और बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें।
बेसिक शिक्षा विभाग का यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत सराहनीय है। अगर सभी स्कूल इन निर्देशों का पालन करें और अभिभावक भी सतर्क रहें तो गर्मी के मौसम में बच्चों को लू और अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है। विद्यालय प्रधान, अध्यापक और कर्मचारी सभी मिलकर इस जिम्मेदारी को निभाएं तो हीट वेव का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अगर कहीं स्कूल में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो वहां के खंड शिक्षा अधिकारी को सूचित किया जाए। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। गर्मी का मौसम अभी और तेज़ होगा। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित रखना हम सभी की ज़िम्मेदारी है। विद्यालयों में समय-समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं या नहीं।
इस तरह की सावधानी और सजगता से ही हम अपने नौनिहालों को भीषण गर्मी में सुरक्षित रख सकते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की यह पहल समय की मांग है और इसका पालन हर विद्यालय को सख्ती से करना चाहिए। बच्चे ही हमारे भविष्य हैं और उनका स्वास्थ्य ही देश की असली संपत्ति है|
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