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Monday, April 21, 2025

कानपुर देहात में शिक्षकों का सम्मान और प्रेरणा भरा आयोजन

 

शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता — सम्मान समारोह में जीवन भर की उपलब्धियों को सलाम



दिनांक 19 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ, ब्लॉक इकाई मैंथा कानपुर देहात द्वारा एक बहुत ही सुंदर और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विकासखंड मैथा के उन शिक्षकों के सम्मान में किया गया, जिन्होंने लंबे समय तक शिक्षा सेवा दी और 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त हुए। यह समारोह टाउन एरिया गेस्ट हाउस शिवली, कानपुर देहात में बड़े ही अच्छे तरीके से और खुशी-खुशी मनाया गया। इस कार्यक्रम में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों का सम्मान किया गया।

सेवानिवृत्त शिक्षकों में श्री अशोक कुमार शुक्ला जो कि जिला मंत्री, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय औगी मैंथा के पद पर कार्यरत थे, श्रीमती रमा वर्मा, प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय कारानी, श्रीमती उषा कटियार, प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद, श्री ओम नारायण कटियार, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रंजीतपुर और श्रीमती रुखसाना बेगम, सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय जुगराजपुर शिवली शामिल रहे। सभी शिक्षकों को इस समारोह में बड़े सम्मान के साथ बुलाया गया और उनके कार्यकाल की प्रशंसा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन, अर्चन और माल्यार्पण से की गई। सबसे पहले मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र सिंह, जिन्हें सभी राजू भैया के नाम से जानते हैं और जो कंचौसी टाउन एरिया के प्रथम अध्यक्ष और जिला पंचायत अध्यक्ष के पति हैं, ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पंचायत शिवली के अध्यक्ष श्री अवधेश शुक्ला ने की।

कार्यक्रम में नगर पंचायत सिकंदरा की अध्यक्षा श्रीमती सीमा पाल और उनके प्रतिनिधि श्री पंकज पाल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी मैथा सुश्री सपना सिंह भी समारोह में पधारीं। सबसे पहले सभी अतिथियों का स्वागत उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जनपद और ब्लॉक पदाधिकारियों द्वारा माल्यार्पण और फूलों से किया गया।

इसके बाद मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र सिंह राजू भैया ने सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को मंच पर बुलाया और माल्यार्पण कर, प्रतीक चिन्ह भेंट कर और अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथियों ने भी सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया। पूरे माहौल में खुशियों और सम्मान की भावना दिख रही थी।

मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र सिंह ने अपने भाषण में कहा कि शिक्षक कभी भी पूरी तरह से सेवानिवृत्त नहीं होता। वह केवल एक पड़ाव पार करता है, लेकिन समाज और शिक्षा के लिए उसका मार्गदर्शन जीवनभर बना रहता है। उन्होंने सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि आप सभी का जीवन हमेशा खुशहाल और सुखद हो।

इसके बाद विशिष्ट अतिथि श्रीमती सीमा पाल ने कहा कि एक शिक्षक समाज का सबसे बड़ा निर्माता होता है। वह बच्चों को पढ़ाकर उनके भविष्य को संवारता है। उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और उनके जीवन में सुख-शांति की कामना की। खंड शिक्षा अधिकारी सुश्री सपना सिंह ने भी अपने शब्दों में कहा कि यह बहुत अच्छा और सुंदर कार्यक्रम है। शिक्षक संघ की ब्लॉक इकाई ने इसे बहुत ही अच्छे तरीके से आयोजित किया है। उन्होंने सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि आपका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

नगर पंचायत शिवली के अध्यक्ष श्री अवधेश शुक्ला ने अपने भाषण में रामायण की कहानियों का उदाहरण देकर बताया कि जीवन में सेवा और सम्मान का बहुत महत्व है। उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है जो जीवनभर शिक्षा देता है। उन्होंने सभी शिक्षकों की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से सभी को प्रेरणा मिलती है।

इस समारोह में शिक्षकों के साथ-साथ अनुदेशक, शिक्षामित्र, बेसिक शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारी और बहुत सारे स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। सभी ने पूरे कार्यक्रम का आनंद लिया और सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान करते हुए तालियां बजाईं।

कार्यक्रम के अंत में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष श्री एल.बी. सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष श्री मुकेश बाजपेई और ब्लॉक मंत्री श्री शशिकांत यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम सबका कर्तव्य है कि अपने शिक्षकों का सम्मान करें और उनके अनुभवों से सीखें। उन्होंने कहा कि संगठन का हमेशा यह प्रयास रहेगा कि शिक्षकों का मान-सम्मान इसी तरह बना रहे।

उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इतने अच्छे और व्यवस्थित कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई और शुभकामनाएं।

इस समारोह में शिक्षकों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने अपने जीवन के कई साल बच्चों को पढ़ाने और संस्कार देने में लगाए। कई शिक्षक अपनी बातें कहते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। वह हमेशा समाज और अपने आसपास के लोगों को कुछ न कुछ सिखाता रहता है।

सभी ने मिलकर यह ठाना कि आगे भी इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए ताकि शिक्षक समाज का सम्मान और गौरव हमेशा बना रहे। इस पूरे कार्यक्रम में कहीं भी अव्यवस्था नहीं थी। सब कुछ बहुत अच्छे ढंग से हुआ।

यह कार्यक्रम शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा देने वाला और समाज में शिक्षकों के सम्मान को दर्शाने वाला रहा। इस कार्यक्रम ने यह भी बताया कि समाज में शिक्षक का कितना बड़ा स्थान है। अगर शिक्षक न हों तो समाज का निर्माण ही अधूरा रह जाता है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सरस्वती वंदना ने भी सबका मन मोह लिया। पूरे समय वातावरण में खुशी और सम्मान का माहौल रहा। हर किसी के चेहरे पर मुस्कान और गर्व साफ दिख रहा था।

अंत में एक बार फिर से उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया गया और यह संकल्प लिया गया कि आगे भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे।

इस पूरे कार्यक्रम की सफलता ने यह साबित कर दिया कि शिक्षक हमारे समाज की सबसे मजबूत और सम्मानित कड़ी हैं। जो हर समय देश, समाज और बच्चों के भविष्य को संवारने में लगे रहते हैं।

यह दिन सभी के लिए यादगार और प्रेरणा देने वाला रहा। सभी ने मिलकर इसे एक यादगार समारोह बना दिया।





विद्यालयों में ए आर पी का काम और सहयोगात्मक पर्वेक्षण का महत्व

 

ए आर पी को औचक निरीक्षण और निरीक्षण पंजिका में अंकन का अधिकार नहीं: एक विस्तृत विश्लेषण



भारत में शिक्षा व्यवस्था को लगातार सुधारने के लिए समय-समय पर कई नई योजनाएँ और व्यवस्थाएँ बनाई जाती हैं। विद्यालयों में पढ़ाई की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियाँ तय की जाती हैं। इन्हीं में से एक व्यवस्था है ए आर पी यानी अकादमिक रिसोर्स पर्सन। ए आर पी का काम यह होता है कि वे विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को पढ़ाई-लिखाई में मदद करें, बच्चों की पढ़ाई की स्थिति को समझें और अगर कोई कमी हो, तो उसे सुधारने के लिए सुझाव दें।

ए आर पी का मुख्य उद्देश्य शिक्षा में गुणवत्ता सुधार करना है। वे विद्यालय में जाकर यह देखते हैं कि बच्चे क्या पढ़ रहे हैं, कैसे पढ़ रहे हैं और किस तरीके से शिक्षक पढ़ा रहे हैं। अगर कहीं कोई परेशानी आती है, तो ए आर पी शिक्षक को सलाह देता है कि पढ़ाई में सुधार कैसे किया जा सकता है। साथ ही ए आर पी नई शिक्षा नीति और शिक्षण पद्धति के बारे में भी जानकारी देता है ताकि विद्यालय में पढ़ाई और बेहतर हो सके।

कई बार लोगों में यह भ्रम होता है कि ए आर पी को भी विद्यालय का औचक निरीक्षण करने और निरीक्षण पंजिका में लिखने का अधिकार होता है। लेकिन यह सही नहीं है। औचक निरीक्षण का मतलब होता है बिना बताए अचानक विद्यालय पहुँचकर उसकी पूरी जांच करना। यह अधिकार केवल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को होता है। जैसे कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी या खंड शिक्षा अधिकारी।

ए आर पी केवल सहयोगात्मक पर्वेक्षण कर सकता है। सहयोगात्मक पर्वेक्षण का मतलब होता है विद्यालय में जाकर शिक्षकों और बच्चों की मदद करना, पढ़ाई की स्थिति को समझना और सुझाव देना। ए आर पी का काम सख्ती करना, दोष निकालना या कार्रवाई करना नहीं होता। वे शिक्षक और बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।

जब ए आर पी विद्यालय में जाता है, तो उसे पहले से सूचना देने की आवश्यकता नहीं होती। वह बिना बताए भी विद्यालय पहुँच सकता है। लेकिन उसका उद्देश्य केवल मदद करना और पढ़ाई में सुधार के लिए सहयोग देना होता है। उसे औचक निरीक्षण करने और निरीक्षण पंजिका में कुछ भी लिखने का अधिकार नहीं है।

डॉ. रहबर सुल्तान द्वारा पूछी गई एक जनसूचना में इस विषय पर जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ए आर पी का काम केवल सहयोग करना है। वे औचक निरीक्षण नहीं कर सकते और निरीक्षण पंजिका में कोई टिप्पणी भी दर्ज नहीं कर सकते। वे केवल भ्रमण पंजिका या सहयोगात्मक पंजिका में ही अपना भ्रमण, सुझाव और शिक्षकों के साथ हुई बातचीत का विवरण दर्ज कर सकते हैं।

निरीक्षण पंजिका वह पंजिका होती है, जिसमें निरीक्षण के समय अधिकारियों द्वारा की गई टिप्पणियाँ, निर्देश और सुझाव दर्ज किए जाते हैं। इसमें यह भी लिखा जाता है कि विद्यालय में क्या-क्या देखा गया, क्या कमियाँ पाई गईं और क्या सुधार करने को कहा गया। यह अधिकार केवल अधिकृत अधिकारी को होता है।

ए आर पी का काम है कि वह विद्यालय में जाकर देखे कि शिक्षक पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ा रहे हैं या नहीं, बच्चे पढ़ाई को समझ रहे हैं या नहीं, पढ़ाई में कोई परेशानी आ रही है या नहीं। अगर कोई कमी दिखाई दे तो शिक्षक को सहयोगात्मक रूप से सुझाव दें कि इसे कैसे सुधारा जा सकता है। वे शिक्षकों को नई पद्धतियों की जानकारी देते हैं और शिक्षण में मदद करते हैं।

विद्यालयों में औचक निरीक्षण का अधिकार केवल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को होता है। वे ही विद्यालय की सफाई, बच्चों की उपस्थिति, मिड डे मील, कक्षाओं की स्थिति और दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। वे ही निरीक्षण पंजिका में अपनी टिप्पणियाँ लिख सकते हैं।

ए आर पी भ्रमण पंजिका या सहयोगात्मक पंजिका में अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसमें वे लिखते हैं कि किस दिन, कितने बजे विद्यालय आए, किस शिक्षक से मिले, किस कक्षा में गए और बच्चों की पढ़ाई की स्थिति क्या पाई। साथ ही वे अपने सुझाव भी लिख सकते हैं।

अगर ए आर पी अपने कार्य को सही तरीके से करें तो इससे विद्यालय को कई फायदे हो सकते हैं। शिक्षकों को पढ़ाई के नए तरीके सीखने को मिलेंगे। बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा। शिक्षकों और बच्चों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। बच्चों को अपने सवाल पूछने और समझने में आसानी होगी। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बेहतर बनेगा।

विद्यालयों में सहयोगात्मक पर्वेक्षण इसलिए जरूरी है ताकि शिक्षकों को पढ़ाई में मदद मिले और बच्चों की पढ़ाई में गुणवत्ता बनी रहे। ए आर पी और शिक्षक मिलकर अगर ईमानदारी से काम करें तो पढ़ाई का स्तर निश्चित रूप से बेहतर होगा।

सहयोगात्मक पर्वेक्षण का मतलब यह नहीं है कि कमियाँ ढूँढकर सख्ती की जाए। इसका मतलब है मिल-जुलकर पढ़ाई को सुधारना और एक अच्छा शैक्षिक वातावरण बनाना। ए आर पी को भी यह समझना चाहिए कि उनका काम केवल सहयोग करना है, न कि औचक निरीक्षण करना।

विद्यालयों में भ्रमण के दौरान ए आर पी को कोई सख्ती नहीं करनी चाहिए। उन्हें सिर्फ बच्चों और शिक्षकों से बात कर के पढ़ाई की स्थिति को समझना चाहिए और जहाँ जरूरत हो, वहाँ सुझाव देना चाहिए। अगर ए आर पी सच्चे मन से यह काम करें, तो बच्चों की पढ़ाई में बहुत सुधार आ सकता है।

विद्यालयों के शिक्षकों को भी चाहिए कि वे ए आर पी का सहयोग करें। उनसे नई-नई शिक्षण विधियाँ सीखें और अपने पढ़ाने के तरीके में सुधार करें। बच्चों को अच्छे से पढ़ाएँ और उनकी समस्याएँ समझें।

जब शिक्षक और ए आर पी मिलकर काम करेंगे तो विद्यालय का माहौल अच्छा बनेगा। बच्चे भी पढ़ाई में रुचि लेने लगेंगे और अच्छे अंक लाएँगे।

इसलिए यह बहुत जरूरी है कि ए आर पी केवल सहयोगात्मक पर्वेक्षण करें। वे औचक निरीक्षण न करें और निरीक्षण पंजिका में कुछ भी न लिखें। उन्हें केवल भ्रमण पंजिका या सहयोगात्मक पंजिका में ही अपनी रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए।

यह बात जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा भी स्पष्ट कर दी गई है। उन्होंने कहा है कि ए आर पी का काम केवल सहयोग करना है। वे औचक निरीक्षण नहीं कर सकते और निरीक्षण पंजिका में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।

अगर हम सभी मिलकर इस व्यवस्था का सही तरीके से पालन करें तो निश्चित रूप से विद्यालयों की पढ़ाई का स्तर और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा। सहयोग, समझदारी और ईमानदारी से किया गया हर काम हमेशा अच्छे परिणाम देता है।

विद्यालयों में शिक्षा का माहौल तभी बेहतर होगा जब शिक्षक, ए आर पी और अधिकारी मिल-जुलकर काम करें। हर किसी को अपने अधिकार और कर्तव्य का ज्ञान होना चाहिए। इससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और देश का भविष्य भी बेहतर बनेगा।

अगर ए आर पी अपना काम ईमानदारी से करें, शिक्षक उनका सहयोग करें और अधिकारी समय-समय पर विद्यालय का उचित निरीक्षण करें तो पढ़ाई में निश्चित रूप से सुधार होगा। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी और वे देश का नाम रोशन करेंगे।

इसी सोच और भावना के साथ हमें सभी को मिलकर काम करना चाहिए। शिक्षकों को अपने पढ़ाने के तरीके को सुधारना चाहिए। ए आर पी को सहयोग करना चाहिए और अधिकारी को अपने अधिकार के अनुसार निरीक्षण करना चाहिए।

अगर हम सभी मिलकर ईमानदारी और नियम के अनुसार काम करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। शिक्षा का स्तर ऊँचा होगा और समाज में अच्छा माहौल बनेगा। यही देश की तरक्की का असली रास्ता है।






पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन | 1 मई 2025 जंतर-मंतर चलो अभियान

 


सरकारी कर्मचारियों के हक की लड़ाई! पुरानी पेंशन बहाली के लिए 1 मई 2025 को जंतर-मंतर, दिल्ली चलें। एकजुटता दिखाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं।



पेंशन एक ऐसी चीज़ है, जो हर सरकारी कर्मचारी के जीवन में बहुत ज़रूरी होती है। जब कोई इंसान अपने पूरे जीवन का सबसे अच्छा समय नौकरी में लगा देता है, दिन-रात मेहनत करता है, अपने परिवार से दूर रहकर, कई बार खतरों का सामना करके देश और समाज के लिए काम करता है, तो उसके बुढ़ापे का सहारा वही पेंशन होती है। पेंशन एक ऐसी लाठी है, जो बुढ़ापे में इंसान को सहारा देती है। जब शरीर जवाब देने लगता है, काम करने की ताकत नहीं रहती, तब यही पेंशन हर महीने एक उम्मीद लेकर आती है कि अब भी हमारा जीवन सम्मान से चल सकेगा।

आज देशभर में बहुत से कर्मचारी इस पेंशन के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। नई पेंशन योजना के आने के बाद से पुरानी पेंशन योजना बंद कर दी गई, और कर्मचारियों को एक ऐसे सिस्टम में डाल दिया गया, जिसमें बुढ़ापे में उन्हें ये भरोसा नहीं रहता कि उनका जीवन बिना किसी चिंता के चलेगा। अब कर्मचारियों को यह डर सताने लगा है कि जब हम बूढ़े हो जाएंगे, तब कौन हमारी मदद करेगा? हमारी पेंशन तो अब तय ही नहीं है, बाजार के उतार-चढ़ाव पर चलने वाली रकम पर हम कैसे अपना भविष्य सुरक्षित मानें? इसी बात ने हजारों कर्मचारियों को एकजुट किया है, और वे अब पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

कई राज्यों में इस मुद्दे पर धरने-प्रदर्शन हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश ने इस लड़ाई को बखूबी लड़ा और वहां की सरकार को पुरानी पेंशन योजना लागू करनी पड़ी। यह सब हुआ कर्मचारियों की एकजुटता और हिम्मत के कारण। उन्होंने अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर सड़कों पर आंदोलन किया, अपनी आवाज़ को बुलंद किया और आखिरकार अपना हक पाया। अब वही उम्मीद देश के दूसरे राज्यों के कर्मचारियों को भी है। सबको यह लगने लगा है कि अगर हम भी एकजुट होकर अपनी बात कहें, तो सरकार को हमारी बात माननी पड़ेगी।

इसी सिलसिले में 1 मई 2025 को जंतर-मंतर, दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक मिशन है। इसमें भाग लेना हर उस कर्मचारी का फर्ज़ है, जो अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा चाहता है। यह लड़ाई केवल आज की नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की भी है। अगर आज हम चुप रहेंगे, तो आने वाले समय में हमारे बच्चे और उनके बाद की पीढ़ी भी इसी समस्या से जूझती रहेगी।

कई लोग सोचते हैं कि मैं नहीं जाऊंगा तो क्या फर्क पड़ेगा। पर असली बात यही है कि जब हर कोई यही सोचेगा, तो कोई भी नहीं जाएगा। अगर आप नहीं जाएंगे, तो दूसरा क्यों जाएगा? जब हर कोई ये सोचने लगेगा कि मेरे पास समय नहीं है, मुझे काम है, पत्नी भी नौकरी करती है, बच्चों को देखना है, तो फिर इस लड़ाई को कौन लड़ेगा? ये सोच सही नहीं है। हम चुनाव ड्यूटी करने जाते हैं, स्कूल भी जाते हैं, ऑफिस का सारा काम भी करते हैं, तो फिर अपने हक के लिए क्यों नहीं? अगर आप दो पेंशन लेना चाहेंगे, तो आंदोलन में भी दो लोग जाने चाहिए, आप और आपकी पत्नी। क्योंकि पेंशन दोनों को चाहिए।

बहाने बहुत हो चुके। कोई कहता है कि मैं अगली बार जाऊंगा। पर अगली बार कभी नहीं आती। जो लड़ाई आज लड़नी है, वो आज ही लड़नी पड़ेगी। कोई भी दूसरा आपके लिए लड़ने नहीं आएगा। जब तक आप खुद अपने हक के लिए खड़े नहीं होंगे, तब तक कुछ भी नहीं बदलेगा। महिलाओं का भी ये सवाल है कि हम कैसे जाएं? लेकिन वही महिलाएं स्कूल भी जाती हैं, ऑफिस भी जाती हैं, चुनाव ड्यूटी भी करती हैं। तो फिर अपने हक के लिए जाना क्यों मुश्किल है? पेंशन आपको भी चाहिए, तो उसके लिए लड़ाई भी आपको ही लड़नी होगी। अपने बच्चों के भविष्य के लिए हमें एक बार फिर से हिमाचल की मातृशक्ति की तरह आगे आना होगा।

कई बार लोग कहते हैं कि हमारे पास समय नहीं है, या हमें गैरसैण नहीं जाना, जिला मुख्यालय नहीं जाना, देहरादून नहीं जाना। तो कब जाओगे? ये बहाने कब तक चलते रहेंगे? क्या जब सबकुछ खत्म हो जाएगा, तब? तब तो कोई फायदा नहीं। पेंशन वो चीज है, जो हर महीने मिलती है। लड़ाई भी उसी तरह लगातार लड़ी जानी चाहिए। जब तक पेंशन नहीं मिलेगी, तब तक धरने भी लगेंगे, प्रदर्शन भी होंगे। जब तक पेंशन बहाल नहीं होगी, हमें चैन से बैठना नहीं है।

जो साथी इस आंदोलन को लड़ रहे हैं, उन्हें भी वही एक पेंशन मिलेगी। वो भी आपके ही जैसे कर्मचारी हैं। उन्होंने अपने विभागीय संगठनों में जिम्मेदारी ली है और अब ये उनका परम कर्तव्य बनता है कि वे इस मिशन में बढ़-चढ़कर भाग लें। अगर वे आपके भविष्य के लिए सड़क पर खड़े हो सकते हैं, तो क्या आप उनके साथ नहीं खड़े हो सकते? ये केवल उनकी लड़ाई नहीं है, ये हम सबकी लड़ाई है।

इस बार सवाल-जवाब और बहानेबाजी बहुत हो गई। अब एक ही जवाब है — 1 मई 2025 को जंतर-मंतर पर चलना है। पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन को मजबूत करना है। हमें अपने हक की इस लड़ाई को और तेज़ करना है। अगर हिमाचल के साथियों ने अपने बच्चों को गोद में लेकर आंदोलन किया और जीत हासिल की, तो हम क्यों नहीं कर सकते? हमें भी आलस छोड़कर, बहानेबाजी छोड़कर, निष्क्रियता और नकारात्मकता से बाहर निकलकर, अपने भविष्य के लिए डटकर खड़ा होना होगा।

यह लड़ाई सिर्फ पैसों की नहीं है, यह सम्मान की भी है। जब कोई रिटायर होता है, तो वह चाहता है कि उसे सम्मान के साथ, बिना किसी चिंता के जीवन जीने का हक़ मिले। अगर आज हम खामोश रहेंगे, तो कल कोई हमारी आवाज़ नहीं सुनेगा। कल कोई हमारा हाल भी पूछने नहीं आएगा। इसी लिए आज उठ खड़े होना जरूरी है।

हिमाचल ने दिखा दिया कि जब कर्मचारी एकजुट हो जाएं, तो कोई भी सरकार उनकी मांगें मानने को मजबूर हो जाती है। हमें भी वही करना है। 1 मई 2025 को हमें दिल्ली के जंतर-मंतर पर इकट्ठा होकर इतिहास रचना है। हर कर्मचारी को वहां पहुंचना है। सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने से कुछ नहीं होगा। हमें सड़कों पर उतरना होगा। अपने नेताओं को आगे लाना होगा। जनजागरूकता फैलानी होगी। हर किसी को बताना होगा कि पेंशन हमारा अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे।

एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जब हम सब एकजुट होंगे, तो हमारी आवाज़ दूर तक जाएगी। सरकार भी तब सुनेगी, जब उसे लगेगा कि अब कर्मचारी शांत बैठने वाले नहीं हैं। इसलिए समय आ गया है, जब हमें अपना हक खुद लेना है। 1 मई 2025 को दिल्ली चल पड़ना है।

हमारे पास अब ज्यादा समय नहीं है। हमें अपने परिवार, अपने बच्चों और अपने बुढ़ापे की चिंता खुद करनी होगी। ये सोचिए कि अगर पुरानी पेंशन नहीं मिली, तो बुढ़ापे में जब तनख्वाह नहीं मिलेगी और इलाज, घर के खर्च, बच्चों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी, तब क्या होगा? यही सोचिए और इसी सोच के साथ अपनी पूरी इच्छाशक्ति जुटाकर इस आंदोलन में भाग लीजिए।

1 मई को जंतर-मंतर पर एक ऐसी ज्वाला जलानी है, जो हर कर्मचारी के दिल में पेंशन की लड़ाई की आग को और तेज़ कर दे। यह लड़ाई केवल आज के लिए नहीं है, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। इस लड़ाई को जीतना ही होगा।

हर कर्मचारी को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। कोई पीछे नहीं रहे। नेता भी आगे आएं। सोशल मीडिया का सही तरीके से इस्तेमाल करें। वीडियो बनाएं, मैसेज भेजें, पोस्टर बनाएं। हर गली, हर मोहल्ले में इस आंदोलन की बात होनी चाहिए। सबको बताइए कि पेंशन हमारा हक है और हम इसे लेकर रहेंगे।

याद रखिए — एकजुटता ही हमारी ताकत है। पेंशन हमारा अधिकार है। हमें मिलकर, एकजुट होकर, बिना डरे, बिना रुके, लगातार लड़ाई लड़नी है। जब तक जीत नहीं मिलती, तब तक लड़ते रहना है। 1 मई 2025 को चलो दिल्ली — जंतर-मंतर पर इतिहास रचने।


 पेंशन है बुढ़ापे का सहारा,
हर महीने मिलने वाला हमारा।
अपने हक के लिए अब लड़ना है,
जंतर-मंतर जाकर कहना है।
सब मिलकर आवाज़ उठाएँगे,
अपना अधिकार वापस लाए 
1 मई को सब चल पड़ेंगे,
पुरानी पेंशन फिर से लेंगे।

 

 



 


Thursday, April 17, 2025

भीषण गर्मी में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक्शन प्लान लागू

 

हीट वेव से बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूलों में एडवाइजरी, ओआरएस, पानी और पंखे की व्यवस्था के निर्देश

कानपुर देहात ज़िले में इन दिनों गर्मी अपना रौद्र रूप दिखा रही है। अप्रैल महीने में ही तापमान इतना बढ़ गया है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसी भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। विभाग ने हीट वेव यानी लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में स्कूलों के प्रधानाचार्यों और अध्यापकों को कई ज़रूरी निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चे इस खतरनाक गर्मी में सुरक्षित रह सकें। स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों का स्वास्थ्य भी ज़रूरी है। इसलिए गर्मी में बच्चों को हीट वेव से बचाने के लिए आपदा प्रबंधन के तहत बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है।

गर्मी के मौसम में सबसे बड़ी परेशानी बिजली और पानी की होती है। अगर स्कूलों में बिजली चली जाए और पानी की सप्लाई न हो तो बच्चों को दिक्कत हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने निर्देश दिया है कि स्कूलों में बिजली की व्यवस्था दुरुस्त रहे और पानी की सप्लाई लगातार बनी रहे। इसके अलावा हर क्लासरूम में पंखे सही हालत में काम करते रहें, इसका भी ध्यान रखना ज़रूरी है। सभी स्कूलों को कहा गया है कि वे कमरों को ठंडा और आरामदायक बनाए रखें।

गर्मी में खुले में खेलना या किसी भी प्रकार की गतिविधि करना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। तेज़ धूप और हीट वेव में बच्चे बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए स्कूलों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि बच्चों से कोई भी शारीरिक गतिविधि, जैसे दौड़, खेलकूद या पीटी न कराई जाए। बच्चों को धूप में न भेजा जाए और न ही प्रार्थना सभा जैसी गतिविधियां खुले में कराई जाएं। सभी गतिविधियां कमरे के अंदर ही कराई जाएं।

सिर्फ यही नहीं, बच्चों और उनके अभिभावकों को भी गर्मी से बचाव के तरीके बताए जाएंगे। इसके लिए स्कूलों में आपदा प्रबंधन पर आधारित फिल्में दिखाई जाएंगी। इन फिल्मों के ज़रिए बच्चों और उनके परिवारों को बताया जाएगा कि गर्मी के मौसम में कैसे खुद को सुरक्षित रखें। कौन-कौन से उपाय करें ताकि हीट वेव से बचा जा सके। जैसे — घर से बाहर न निकलना, धूप में छाता या टोपी लगाना, हल्के और सूती कपड़े पहनना, ठंडा पानी पीना और ओआरएस घोल का सेवन करना।

ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन गर्मी में बहुत फायदेमंद होता है। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और लू लगने का खतरा कम होता है। स्कूलों को आदेश दिए गए हैं कि वे बच्चों के लिए ओआरएस और इलेक्ट्राल के पैकेट का इंतज़ाम करें। अगर किसी बच्चे को चक्कर आए या वह कमजोर महसूस करे तो उसे तुरंत ओआरएस का घोल दिया जाए।

बेसिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में व्यवस्थाएं दुरुस्त कराएं। पेयजल की व्यवस्था लगातार बनी रहे, बिजली की सप्लाई में कोई रुकावट न आए और पंखे पूरी तरह सही हालत में चलें। अगर गर्मी और बढ़ती है तो स्कूल समय में भी परिवर्तन किया जाएगा। मतलब यह कि स्कूल का समय घटाकर सुबह जल्दी या दिन में जल्दी छुट्टी कर दी जाएगी, ताकि बच्चे दोपहर की तेज़ धूप में घर न जाएं।

गर्मी में बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है। छोटे बच्चों की त्वचा और शरीर जल्दी गर्मी पकड़ लेते हैं। उन्हें जल्दी पसीना आता है और कमजोरी महसूस होती है। अगर सही देखभाल न की जाए तो बच्चे हीट स्ट्रोक का शिकार भी हो सकते हैं। इसलिए विद्यालयों को कहा गया है कि वे हर हाल में बच्चों के लिए बिजली, पानी और पंखे की व्यवस्था बनाए रखें। अगर कहीं कोई समस्या आती है तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।

विद्यालयों में जलपान के समय भी ध्यान रखने की ज़रूरत है। बच्चों को ठंडा और साफ पानी मिलना चाहिए। ज्यादा मीठे, भारी और तले-भुने खाद्य पदार्थ न दिए जाएं। बच्चों को हल्का भोजन और फलों का सेवन करने के लिए प्रेरित किया जाए। अगर कोई बच्चा बीमार लगे तो उसकी सूचना उसके अभिभावकों को तुरंत दें। गर्मी के मौसम में वायरल बुखार, डायरिया और हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं।

इसी वजह से यह भी तय किया गया है कि विद्यालय परिसर में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। पानी के टैंकों को साफ कराकर ही पानी भरवाया जाए। बच्चों को साफ-सुथरे गिलास और बर्तनों में पानी पिलाया जाए। कहीं भी गंदा पानी या कीचड़ जमा न होने दिया जाए। इससे मच्छर और कीड़े-मकोड़े भी पनपते हैं जो और बीमारियां फैला सकते हैं।

हीट वेव के दौरान बच्चों के पहनावे का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्हें सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए। गहरे रंग के कपड़े जल्दी गर्मी पकड़ते हैं। बच्चों को टोपी या रूमाल से सिर ढकने के लिए कहा जाए। अगर स्कूल वर्दी में बदलाव करना संभव हो तो गर्मी के मौसम में हल्की और आरामदायक वर्दी की अनुमति दी जाए।

स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा भी अब कमरों के अंदर ही कराई जाए या पूरी तरह से स्थगित कर दी जाए। बच्चों को लंबी कतार में खड़ा न कराया जाए। अगर बहुत ज़रूरी हो तो छायादार जगह पर, बहुत कम समय के लिए ही प्रार्थना कराई जाए।

अभिभावकों को भी जागरूक करने की ज़रूरत है। स्कूलों की तरफ से पत्र भेजकर या अभिभावक बैठक के ज़रिए उन्हें बताया जाए कि वे गर्मी के मौसम में अपने बच्चों का कैसे ध्यान रखें। बच्चों को समय पर स्कूल भेजें और दोपहर की छुट्टी के बाद सीधे घर ले जाएं। बच्चों को घर में ज्यादा देर धूप में खेलने न दें।

हीट वेव के समय बच्चों के खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को ताजे फल, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा जैसी चीजें खिलाई जाएं। बासी खाना, तली-भुनी चीजें और कोल्ड ड्रिंक से बचें। अगर बच्चा बाहर से खेलकर आया हो तो उसे तुरंत ठंडा पानी या ओआरएस का घोल पिलाएं।

हीट वेव के दौरान लू से बचाव के उपाय बच्चों को बार-बार समझाने चाहिए। जैसे — तेज़ धूप में बाहर न जाएं, छाया में रहें, सिर पर टोपी या गीला कपड़ा रखें, पानी बार-बार पिएं और बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें।

बेसिक शिक्षा विभाग का यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत सराहनीय है। अगर सभी स्कूल इन निर्देशों का पालन करें और अभिभावक भी सतर्क रहें तो गर्मी के मौसम में बच्चों को लू और अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है। विद्यालय प्रधान, अध्यापक और कर्मचारी सभी मिलकर इस जिम्मेदारी को निभाएं तो हीट वेव का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अगर कहीं स्कूल में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो वहां के खंड शिक्षा अधिकारी को सूचित किया जाए। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। गर्मी का मौसम अभी और तेज़ होगा। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित रखना हम सभी की ज़िम्मेदारी है। विद्यालयों में समय-समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं या नहीं।

इस तरह की सावधानी और सजगता से ही हम अपने नौनिहालों को भीषण गर्मी में सुरक्षित रख सकते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की यह पहल समय की मांग है और इसका पालन हर विद्यालय को सख्ती से करना चाहिए। बच्चे ही हमारे भविष्य हैं और उनका स्वास्थ्य ही देश की असली संपत्ति है|

 





Wednesday, April 16, 2025

अमेठी जिले ने निपुण अस्सेस्मेंट 2024-25 में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया

 



👉हीट-वेव से बचाव हेतु बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा निर्गत एडवाइजरी व आवश्यक कार्यवाही कराये जाने के संबंध में

           https://www.updatemarts.com/2025/04/blog-post_279.html


अमेठी जिले ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। निपुण अस्सेस्मेंट टेस्ट 2024-25 में अमेठी ने प्रदेश भर में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि जिले के शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों की मेहनत का परिणाम है। पिछले सत्र 2022-23 में अमेठी जिले ने 59वां स्थान प्राप्त किया था, लेकिन इस बार जिले ने ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए पहला स्थान हासिल किया।

इस सत्र में अमेठी जिले के कुल 1600 स्कूलों के 133410 बच्चों ने निपुण अस्सेस्मेंट टेस्ट में भाग लिया। इस बार जिले का प्रदर्शन पिछले वर्ष से काफी बेहतर रहा। पिछले सत्र में अमेठी का प्रतिशत 68.01 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 96.4 प्रतिशत हो गया है। यह एक बड़ा सुधार है और इसका श्रेय शिक्षकों की निरंतर मेहनत और बच्चों की लगन को जाता है।

ग्रेड ए में आने वाले बच्चों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। पिछले सत्र में 23.01 प्रतिशत बच्चे ग्रेड ए में थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 53.04 प्रतिशत तक पहुँच गया है। यह दिखाता है कि बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन किया है और उनकी मेहनत का फल उन्हें मिल रहा है।

इस बार प्रदेश स्तर पर हमीरपुर ने दूसरा स्थान प्राप्त किया और हापुड़ ने तीसरा स्थान हासिल किया। पिछली बार अमेठी ने 42वां स्थान प्राप्त किया था, जबकि इस बार उसने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई और पहले स्थान पर पहुँच गया। यह बदलाव जिले के शैक्षिक माहौल में सुधार का संकेत है।

हालांकि, कुछ जिले इस बार पिछड़ गए हैं। अयोध्या जिला इस बार 64वें स्थान पर लुड़क गया है, जबकि सुल्तानपुर भी पिछली बार की 17वीं रैंक से फिसलकर 62वें स्थान पर पहुँच गया है। यह साबित करता है कि शैक्षिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार की आवश्यकता है और यह किसी एक साल की मेहनत से नहीं हो सकता, बल्कि इसे निरंतर बनाए रखना होता है।

अमेठी जिले की यह सफलता केवल बच्चों की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण, स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और अभिभावकों के सहयोग का भी परिणाम है। शिक्षकों को लगातार प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण पद्धतियाँ अपना सके। इसके अलावा, विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण की प्रक्रिया को लागू किया गया, जिसका परिणाम आज हम देख रहे हैं।

आने वाले समय में इस सफलता को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। अमेठी जिले के शिक्षा विभाग ने यह संकल्प लिया है कि बच्चों की शिक्षा में सुधार और गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए निरंतर मेहनत की जाएगी। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उनके काम की निगरानी भी की जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी न रहे।

अमेठी की इस सफलता से अन्य जिलों को भी प्रेरणा मिलनी चाहिए। यह दिखाता है कि अगर समर्पण, मेहनत और सही मार्गदर्शन हो, तो किसी भी जिले को उच्च स्थान प्राप्त किया जा सकता है। यह सफलता जिले के सभी शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

अब अमेठी जिले को इस सफलता को बनाए रखते हुए और भी बेहतर करने की चुनौती मिलेगी। बच्चों की शिक्षा में सुधार, शिक्षकों की गुणवत्ता और स्कूलों में सुविधाओं का सुधार अब अमेठी के लिए प्राथमिकता बनेगा। जिले को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों का प्रदर्शन इस स्तर पर बनाए रखा जाए और आगे और भी अच्छे परिणाम प्राप्त किए जाएं।

इस सफलता के बाद अब अमेठी जिले में शिक्षा का माहौल और भी बेहतर होगा। बच्चों को अब और भी अच्छे शिक्षक मिलेंगे, उनके लिए बेहतर सुविधाएँ होंगी और वे शिक्षा के क्षेत्र में और भी ऊँचाइयाँ छू सकेंगे। यह एक नई शुरुआत है, जो जिले की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अमेठी की सफलता से यह भी सीखने को मिलता है कि शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए केवल बच्चों की मेहनत ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की मेहनत और निरंतर प्रशिक्षण भी जरूरी है। जब शिक्षक बच्चों के लिए बेहतर तरीकों से पढ़ाते हैं और बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह होता है, तो अच्छा परिणाम आता है।

इस सफलता को देखकर अन्य जिलों को भी यह प्रेरणा मिलनी चाहिए कि वे भी अपनी शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाकर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। अगर हर जिला अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए काम करे, तो देशभर में शिक्षा का स्तर ऊँचा हो सकता है और बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सकता है।

अमेठी जिले की यह सफलता एक प्रेरणा है, जो यह साबित करती है कि अगर सही दिशा में काम किया जाए और सभी लोग मिलकर प्रयास करें, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।


👉वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयकर अग्रिम कटौती वेतन से प्रति माह किये जाने के सम्बन्ध में

             https://www.updatemarts.com/2025/04/2025-26_16.html

ए.आर.पी. को औचक निरीक्षण एवं निरीक्षण पंजिका में अंकन का अधिकार नहीं

https://www.updatemarts.com/2025/04/blog-post_345.html




Tuesday, April 15, 2025

कानपुर-उन्नाव सड़क हादसा: 3 शिक्षिकाओं और चालक की मौत, शिक्षक गंभीर घायल

 




कानपुर और उन्नाव के बीच मंगलवार की सुबह एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में तीन महिला शिक्षिकाओं और एक कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा एक शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। यह भयानक हादसा नारामऊ हाईवे कट के पास हुआ। हादसे की खबर जैसे ही आसपास के लोगों और शिक्षा विभाग तक पहुँची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

सुबह लगभग 7:30 बजे कल्याणपुर निवासी विशाल द्विवेदी नामक युवक अपनी कार से तीन शिक्षिकाओं को स्कूल छोड़ने उन्नाव की ओर ले जा रहा था। नारामऊ में दलहन रोड के पास हाईवे पर एक सीएनजी पंप है। जैसे ही विशाल अपनी कार को सीएनजी भरवाने के लिए मोड़ने लगे, तभी उनकी कार एक बाइक से टकरा गई। बाइक सवार सरकारी शिक्षक अशोक कुमार, जो पनकी के रहने वाले हैं, इस टक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस टक्कर के तुरंत बाद सामने से आ रही एक प्राइवेट ट्रैवल्स की बस ने कार को जोरदार टक्कर मार दी। बस की टक्कर इतनी तेज थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कार में सवार सभी लोग कार के अंदर बुरी तरह फंस गए। राहगीरों और बिठूर पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला।

कार में कुल चार लोग सवार थे। इनमें आकांक्षा मिश्रा, अंजुला मिश्रा, ऋचा अग्निहोत्री और कार चालक विशाल द्विवेदी शामिल थे। हादसे के बाद आकांक्षा मिश्रा और अंजुला मिश्रा को हैलेट अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विशाल द्विवेदी ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शुरू में यह सूचना भी आई कि ऋचा अग्निहोत्री की भी मृत्यु हो गई है, लेकिन बाद में यह खबर गलत साबित हुई।



ऋचा अग्निहोत्री फिलहाल रामा अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। वो होश में हैं, बात कर रही हैं और अपने परिजनों को पहचान भी रही हैं। उनके पेट में गंभीर अंदरूनी चोटें हैं। डॉक्टरों ने बताया है कि अगर ब्लीडिंग नहीं हो रही है, तो वो पूरी तरह ठीक हो सकती हैं। अगर सीटी स्कैन में किसी गंभीर स्थिति का पता चलता है, तो ऑपरेशन कर उनकी तिल्ली निकालनी पड़ सकती है। उनके हाथ, पैर और गले में भी काफी चोटें आई हैं और उन पर प्लास्टर चढ़ाया गया है। उनके परिजन और शिक्षा विभाग के लोग लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं। सभी लोग ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी सीटी स्कैन रिपोर्ट ठीक आए और वो जल्द से जल्द स्वस्थ होकर घर लौटें।

बाइक सवार अशोक कुमार का भी इलाज रामा अस्पताल में चल रहा है। उनकी हालत भी गंभीर बनी हुई है। इस हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन अस्पताल पहुँचते ही फूट-फूट कर रोने लगे। वहीं शिक्षा विभाग में भी शोक की लहर फैल गई।

एनएचएआई की टीम ने घटनास्थल पर पहुँच कर क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाया और ट्रैफिक को सामान्य कराया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जाँच शुरू कर दी। इस दुर्घटना में जिन शिक्षिकाओं की मृत्यु हुई, वे कंपोजिट स्कूल जमाल नगर सफीपुर में कार्यरत थीं। इसके अलावा अर्चना नाम की एक और शिक्षिका, जो विद्यालय न्यामतपुर में कार्यरत हैं, की हालत भी गंभीर बताई गई थी। आकांक्षा मिश्रा का भी मौके पर ही निधन हो गया था।

घटना के समय वहां मौजूद राहगीरों ने बताया कि कार पहले बाइक से टकराई और फिर बस से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद राहगीरों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला।

हादसे के बाद एक और दुखद बात यह रही कि एम्बुलेंस काफी देर से पहुँची। अगर एम्बुलेंस समय पर पहुँच जाती तो शायद कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। इस हादसे ने पूरे कानपुर और उन्नाव को गहरे दुख में डुबो दिया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने शोक व्यक्त किया और कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी है।

हादसे का सबसे बड़ा कारण हाईवे कट पर अचानक मोड़ लेना और सावधानी में कमी को माना जा रहा है। ऐसे हाईवे कट पर हमेशा दुर्घटनाओं का खतरा ज्यादा रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे पर कट बनाते समय विशेष ध्यान देना चाहिए। सीएनजी पंप के सामने कट नहीं होना चाहिए और वहाँ ट्रैफिक सिग्नल व रिफ्लेक्टर लगाए जाने चाहिए। साथ ही बस और भारी वाहन चालकों को भी हाईवे पर धीमी गति से गाड़ी चलानी चाहिए।

इस हादसे से सभी को यह सीख लेनी चाहिए कि कभी भी हाईवे पर अचानक मोड़ नहीं लेना चाहिए। बाइक और कार को आगे-पीछे चलाते समय उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए। एम्बुलेंस और पुलिस को घटनास्थल पर समय से पहुँचना चाहिए। सरकारी स्तर पर भी सड़क सुरक्षा के उपाय मजबूत करने चाहिए ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और घायल शिक्षक व शिक्षिका को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ दे। उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें। यह हादसा पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि हम सभी को सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए।






Thursday, April 10, 2025

महावीर के आदर्श और शिक्षा में समावेशिता की जरूरत

 


संकीर्ण सोच नहीं, समावेशिता सिखाएं

आज भगवान महावीर जयंती है। भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। वे अहिंसा, सत्य, संयम और अपरिग्रह के बहुत बड़े उपदेशक थे। उनका जीवन और उनके विचार पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि आज बहुत सारे शिक्षक इस दिन को भूल गए हैं। आज के दिन, जब हमें भगवान महावीर के आदर्शों को याद करना चाहिए, तब कई शिक्षक समूहों में चुप्पी छाई रही। न कोई शुभकामना, न कोई प्रेरक संदेश, और न ही कोई स्मरण।

वहीं, यही शिक्षक समूह साल भर में अनेक जयंती और पुण्यतिथि पर पोस्ट और बधाइयों से भरे रहते हैं। तो फिर आज भगवान महावीर की बात करते हुए यह चुप्पी क्यों?

क्या भगवान महावीर केवल जैन धर्म के ही हैं? या वे पूरी मानव जाति के लिए एक प्रेरणा हैं? उन्होंने जो बातें सिखाईं – जैसे कि "अहिंसा परमो धर्म" – क्या वो सिर्फ एक धर्म के लिए हैं, या पूरे विश्व के लिए?

आज अगर हम शिक्षक होकर भी महापुरुषों को धर्म और जाति के चश्मे से देखेंगे, तो यह बहुत खतरनाक बात है। शिक्षक का काम है अपने छात्रों को एकता, भाईचारे और सद्भाव की शिक्षा देना। अगर शिक्षक ही संकीर्ण सोच रखेंगे, तो वे बच्चों में कैसे बड़े विचार और इंसानियत भर पाएंगे?

आज की खामोशी यह नहीं दिखाती कि लोग एक दिन भूल गए, बल्कि यह दिखाती है कि हमारे अंदर एक उदासीनता, एक लापरवाही घर कर चुकी है। और यह सोचने का समय है कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं?

भगवान महावीर का जीवन हमें सिखाता है कि हिंसा किसी भी रूप में ठीक नहीं है। हमें संयम से, सच्चाई से और त्याग से जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि उनके विचार सिर्फ किसी एक धर्म के लिए हैं। उनके विचार सबके लिए हैं – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, या कोई और।

आज जरूरत है कि शिक्षक इस पर सोचें। अगर हम महापुरुषों को केवल जाति या धर्म के अनुसार पहचानेंगे, तो हम छात्रों को क्या सिखाएंगे? क्या हम उनके मन में भी यही भेदभाव भरेंगे?



                            👉    भारत में महंगाई भत्ते (DA) की वृद्धि: एक विश्लेषण

                                      https://basicshikshakhabar.com/2025/04/n-1433/

एक सच्चे शिक्षक का काम है सबके विचारों का आदर करना। उन्हें यह नहीं देखना चाहिए कि कौन किस धर्म से है, बल्कि यह देखना चाहिए कि कौन क्या अच्छा सिखा रहा है। अगर कोई व्यक्ति पूरी मानवता के लिए कुछ अच्छा कहता है, तो हमें उसे अपनाना चाहिए।

आज हमें एक नई शुरुआत करनी चाहिए। हमें हर धर्म और जाति के महान लोगों की बातों को बच्चों तक पहुंचाना चाहिए। हमें छात्रों को यह सिखाना चाहिए कि इंसानियत सबसे बड़ी चीज है। हमें उन्हें सिखाना चाहिए कि समाज में प्रेम, सहयोग और समझदारी से रहना जरूरी है।

अगर हम शिक्षक बनकर यह नहीं सिखा पाए, तो हम केवल किताबें पढ़ाने वाले बन जाएंगे, सच्चे शिक्षक नहीं।

इसलिए आज इस पावन दिन पर हम सबको आत्ममंथन करना चाहिए। हमें सोचकर देखना चाहिए कि क्या हम सही कर रहे हैं। क्या हम अपने छात्रों को सही रास्ता दिखा रहे हैं? क्या हम खुद सही सोच रखते हैं?

आइए, आज भगवान महावीर के आदर्शों को याद करें। आइए, हम सब महापुरुषों का आदर करें, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों। और आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जिसमें सबको समान नजर से देखा जाए, जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, और जहां शिक्षा का मतलब केवल जानकारी नहीं, बल्कि इंसानियत भी हो।

यही हमारे भारत की असली पहचान है।

👉परिषदीय शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के डी०ए० अवशेष भुगतान के सम्बन्ध में।  

          https://www.updatemarts.com/2025/04/blog-post_833.html


      👉 भारत में महंगाई भत्ते (DA) की वृद्धि: एक विश्लेषण

         https://www.updatemarts.com/2025/04/da.html



Thursday, April 3, 2025

डिजिटल प्रवेश पंजिका

 


‘’अतिमहत्वपूर्ण/ तत्काल’’ उत्तर प्रदेश  बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं का विवरण 'डिजिटल प्रवेश पंजिका में अंकित किये जाने के सम्बन्ध में।

 समस्त 

      A.D.(B), BSA, BEO, DIET PRINCIPAL, DC, BEO, SRG

      ** सभी संबंधित से अपेक्षा है कि संलग्न निर्देश के अनुपालन में नव प्रवेशित बच्चों का विवरण 'डिजिटल प्रवेश

      ** पंजिका' पर प्रतिदिन अंकित कराना सुनिश्चित  करें।

      ** डिजिटल प्रवेश पंजिका के आधार पर प्रतिदिन के नवीन प्रवेश की समीक्षा उच्च स्तर से की जा रही है।


   उ०प्र० बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं का विवरण 'डिजिटल प्रवेश पंजिका में अंकित किये जाने के सम्बन्ध में।



















               स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम फेज-2 सत्र 2025-26 के संचालन के पूर्व की तैयारी             (1अप्रैल 2025 से 15अप्रैल 2025 तक)   

 
  
  दीक्षा पोर्टल पर 12 सप्ताह के स्कूल रेडीनेस कोर्स -1,2 एवं 3 को नोडल शिक्षक संकुल, नोडल अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक द्वारा पूर्ण किया जाना है।

 
कोर्स लिंक 


मूल्यांकन प्रश्नोत्तरी  

https://shorturl.at/efCS5
 
               https://youtu.be/GljwwgrAiMk?si=GPIQLgaUMQvgcxlH






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