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Saturday, April 19, 2025

स्कूल चलो मिशन 2025-26: हर बच्चा स्कूल जाएगा, सपनों को सच बनाएगा।




स्कूल चलो मिशन 2025 – एक शिक्षित उत्तर प्रदेश की दिशा में कदम



स्कूल चलो मिशन 2025 उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य यह है कि हर बच्चा स्कूल जाए और पढ़ाई से वंचित न रहे। यह योजना खासकर गरीब, पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है ताकि वे भी शिक्षा का अधिकार पा सकें। यह मिशन उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा चलाया जा रहा है और इसका मकसद सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ना है।

उत्तर प्रदेश की सरकार यह मानती है कि जब तक हर बच्चा स्कूल नहीं जाएगा, तब तक समाज और देश का विकास अधूरा रहेगा। इसीलिए सरकार ने यह लक्ष्य रखा है कि 2025 तक राज्य का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे। इसके लिए गांव-गांव और मोहल्लों में जाकर अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है कि वे अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजें। कई जगहों पर शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्राम प्रधानों की मदद से बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है|



स्कूल चलो मिशन 2025 में कई योजनाओं को जोड़ा गया है जिससे बच्चों को स्कूल आने में किसी तरह की परेशानी न हो। बच्चों को मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोज़े और बैग दिए जा रहे हैं। साथ ही मिड-डे मील योजना के तहत दोपहर का भोजन भी स्कूलों में दिया जा रहा है। इससे गरीब परिवारों के लिए अपने बच्चों को स्कूल भेजना आसान हो गया है क्योंकि अब उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ खाना और जरूरी सामान भी स्कूल से मिल रहा है।

सरकार ने यह भी तय किया है कि जो बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं, उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाए। इसके लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। शिक्षक और अधिकारी उन बच्चों के घर जाकर उनसे और उनके माता-पिता से बात करते हैं और उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाने का प्रयास करते हैं। खासकर बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि कई बार लड़कियों को घरेलू कामों में लगा दिया जाता है और उनकी पढ़ाई छूट जाती है। अब सरकार लड़कियों को स्कूल भेजने के लिए भी विशेष योजनाएं बना रही है।

स्कूल चलो मिशन के तहत सभी स्कूलों में नामांकन अभियान चलाया गया है। इसमें बच्चों को स्कूल में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया जाता है और हर बच्चे की जानकारी दर्ज की जाती है। अगर कोई बच्चा स्कूल से गायब होता है या नहीं आता, तो उसके बारे में जांच की जाती है और उसे वापस स्कूल लाने की कोशिश की जाती है। शिक्षकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र के सभी बच्चों की जानकारी रखें और सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।

इस योजना में तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। कई स्कूलों में अब डिजिटल हाजिरी की जा रही है जिससे यह पता चलता है कि कितने बच्चे नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं। साथ ही शिक्षा विभाग एक ऐप के माध्यम से हर स्कूल की जानकारी इकट्ठा कर रहा है ताकि योजना को सफल बनाया जा सके। यह ऐप यह भी दिखाता है कि कहां पर बच्चों की संख्या कम है और कहां पर और काम करने की जरूरत है।

स्कूल चलो मिशन 2025 में पंचायतों, नगर निकायों, शिक्षकों, समाजसेवियों और स्थानीय लोगों की भी मदद ली जा रही है। स्कूल चलो रैलियां, प्रभात फेरियां और जनजागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि शिक्षा कितनी जरूरी है। छोटे-छोटे बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर जब गांवों में निकलते हैं और नारे लगाते हैं "पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया", तो लोगों का ध्यान इस ओर जाता है और वे भी अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने लगते हैं।

सरकार यह भी चाहती है कि सरकारी स्कूलों की छवि सुधरे ताकि माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों में भेजने को तैयार हों। इसके लिए स्कूलों की इमारतें सुधारी जा रही हैं, शौचालय बनवाए जा रहे हैं, पीने का साफ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और कंप्यूटर शिक्षा की सुविधा भी दी जा रही है। जब स्कूल अच्छा और साफ-सुथरा होगा, तो बच्चे भी वहां जाना पसंद करेंगे और पढ़ाई में रुचि लेंगे।

स्कूल चलो मिशन में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। खेल-कूद, चित्रकला, गायन, नृत्य और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रुचियों को भी पहचान सकें। शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि वे बच्चों को प्यार और स्नेह से पढ़ाएं ताकि बच्चा स्कूल आने से डरे नहीं बल्कि खुशी से आए।

यह मिशन केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सबका है। जब तक हर माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं भेजेंगे, तब तक यह मिशन सफल नहीं हो सकता। समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा और शिक्षा के इस अभियान में योगदान देना होगा। स्कूल चलो मिशन 2025 हमें यह याद दिलाता है कि शिक्षा केवल किताबें पढ़ना नहीं है, बल्कि यह बच्चों का भविष्य है, और एक पढ़ा-लिखा बच्चा ही कल एक अच्छा नागरिक बन सकता है।

बेसिक शिक्षा विभाग का यह प्रयास सराहनीय है कि वह हर साल इस योजना को और मजबूत बना रहा है। पहले जहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अधिक थी, वहीं अब धीरे-धीरे यह संख्या घट रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अब माता-पिता भी शिक्षा के महत्व को समझने लगे हैं। उन्हें यह समझ में आने लगा है कि अगर उनके बच्चे पढ़-लिख जाएंगे तो वे एक अच्छा जीवन जी पाएंगे।

अभी भी कुछ चुनौतियाँ हैं, जैसे कुछ इलाकों में स्कूल दूर होने के कारण बच्चे नहीं जा पाते, कुछ जगहों पर शिक्षक पर्याप्त नहीं हैं, तो कहीं स्कूलों में सुविधा कम है। लेकिन सरकार इन सभी समस्याओं को दूर करने की कोशिश कर रही है। नए स्कूल खोले जा रहे हैं, शिक्षक बहाल किए जा रहे हैं और स्कूलों को सुविधाजनक बनाया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि स्कूलों में बच्चों को सही तरीके से पढ़ाया जाए और उनकी पढ़ाई में कोई कमी न हो।

स्कूल चलो मिशन 2025 का लक्ष्य बड़ा है लेकिन अगर सभी लोग मिलकर प्रयास करें तो यह जरूर सफल हो सकता है। यह मिशन न केवल बच्चों को शिक्षा देगा बल्कि हमारे देश को एक उज्जवल भविष्य भी देगा। जब हर बच्चा पढ़ेगा, तो वह अपने परिवार, गांव और देश के विकास में योगदान देगा। एक पढ़ा-लिखा समाज ही सशक्त समाज बन सकता है।

इसलिए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने आस-पास के सभी बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे, उनकी मदद करेंगे और इस मिशन को सफल बनाने में अपना योगदान देंगे। स्कूल चलो मिशन 2025 केवल एक योजना नहीं है, यह एक आंदोलन है – शिक्षा का आंदोलन, भविष्य निर्माण का आंदोलन। आइए हम सब मिलकर इस मिशन को सफल बनाएं और उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बनाएं।


Wednesday, April 2, 2025

सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम एक सन्देश ...

 




प्रिय सेवानिवृत्त साथीयों

हम शानदार उम्र में हैं, हम बहुत खूबसूरत भी दिखते हैं, हमारे पास लगभग वह सबकुछ है, जो हम बचपन में चाहते थे:---

हम स्कूल या काम पर नहीं जाते और हमें हर महीने पेंशन मिलती है। अब हमें जाने के बाद, एक निश्चित समय पर वापस नहीं आना पड़ता | हममें से कुछ के पास अभी भी ड्राइविंग लाइसेंस और यहाँ तक कि अपनी कार भी है, तो जीवन सुंदर है | साथ ही, हम अविश्वसनीय रूप से होशियार हैं, लेकिन हमारा मस्तिष्क थोड़ा धीमा है, क्योंकि यह ज्ञान से भरा हुआ है। हमारे सिर में कई चीजें जमा हो जाती हैं, जो आंतरिक कान पर दबाव डालती हैं, इस कारण से, हमें कभी-कभी सुनने में समस्या होती है  । हमारा मस्तिष्क कमजोर नहीं है, लेकिन इसमें बहुत सारी जानकारी जमा हो गई है, इसलिए हमारी उम्र के लोग, कभी-कभी जब एक कमरे में जाते हैं, तो हमें याद ही नहीं रहता कि, हम क्या करना चाहते थे, या हमें याद नहीं रह पाता है कि, हमने कुछ सामान कहाँ रखा था । यह याददाश्त की समस्या नहीं है, प्रकृति हमें कम से कम थोड़ी देर और, चलते रहने के लिए मजबूर करती है।

60 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए विशेष:-

आवश्यक खाद्य पदार्थ ----

1. सब्जियाँ और फल।

2. प्रचुर मात्रा में सलाद ।

3. सूखे मेवे।

4. एक्स्ट्रा-वर्जिन ऑलिव ऑयल ।

5. और सबसे बढ़कर, स्वस्थ भोजन |       

भूलने की कोशिश करने वाली 3  चीजें -

1. उम्र।                                                        

2. अतीत।

3. नाराज़गी।

चार महत्वपूर्ण चीजें:---

1. परिवार।

2. दोस्त।

3. सकारात्मक विचार।

4. वर्तमान में जिएँ।

आपके सबसे महत्वपूर्ण कार्य:---

1. खूब हँसें, बेवजह हंसें।

2. खेलकूद करें, लेकिन केवल अपनी गति से।

3. दोस्तों के साथ अधिक समय बिताएँ (सिर्फ़ बच्चों या नाती-नातिनों के साथ नहीं, बल्कि दोस्तों के साथ)।

4. कोई भी कार्यक्रम मिस न करें।

 छह ज़रूरी बातें:---

1. पानी पीने के लिए प्यास लगने का इंतज़ार न करें, ज़्यादा बार पिएँ।

2. जल्दी न उठें, पर्याप्त नींद लें।

3. आराम करने के लिए, थकने का इंतज़ार न करें।

4. मेडिकल जाँच करवाने के लिए, बीमार होने का इंतज़ार न करें।

5. भगवान पर विश्वास करना कभी न छोड़ें, चमत्कार होते हैं।

6. सकारात्मक रहें और हमेशा अच्छे की उम्मीद करें।

"इस संदेश को अपने सबसे अच्छे दोस्तों को फ़ॉरवर्ड करें। इससे कोई नुकसान नहीं होगा, उन्हें बताएँ कि वे अद्भुत हैं...!


https://www.updatemarts.com/2025/03/blog-post_263.html


















के०आर०पी ० की अनदेखी





 KRP's की कार्यमुक्ति कब होगी? 

 इनको कभी नहीं मिल पाया उचित और पूरा सम्मान,इनके योगदान की हमेशा ही की गई अनदेखी 



बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा 2019 में शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु निष्ठा (NISHTHA) कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ब्लाक स्तर पर पाँच-पाँच KRP (Knowledge Resource Person / Key Resource Person) की  नियुक्त की गयी थी । इनका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को शिक्षा के छेत्र की तनवीनतम शिक्षण विधियों, शिक्षा नीतियों और नवाचारों से अवगत कराना था। लेकिन आज, जब ARP (Academic Resource Person) को कार्यमुक्त कर दिया गया है जो की वर्तमान में बशिक शिक्षा कि धुरी मने जाते रहे हैं | तो KRP की स्थिति पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। यह अत्यंत खेदजनक एवंम  आवश्यक है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए।

KRP के रूप में चयनित शिक्षकों ने बिना किसी अतिरिक्त मानदेय के, केवल अपने दायित्व और समर्पण से प्रदेशभर के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने निष्ठा प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को शिक्षण के नए कौशल सिखाए, डिजिटल संसाधनों से जोड़ा और पाठ्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू करने में मदद की।जो ARP अब कार्यमुक्त हुए हैं उनको भी निष्ठा के अंतर्गत KRP's ने ही प्रशिक्षण दिया था।

लेकिन इन KRP's का योगदान सदैव उपेक्षित रहा। न तो उनकी मेहनत को सार्वजनिक रूप से सराहा गया, न ही उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ दिया गया। इसके विपरीत, जहां जिस ब्लाक में ARP नियुक्त नहीं हो पाए या कम संख्या में नियुक्त हो पाए वहां शिक्षकों को सभी विभागीय प्रशिक्षण देने का कार्य KRP के द्वारा ही संपन्न कराया गया | 

 KRP को उनके अतिरिक्त कार्यों के लिए कोई मानदेय नहीं दिया गया, जबकि उन्होंने विभागीय निर्देशों के अनुसार पूरी निष्ठा,समर्पण और पूरे जोश उत्साह से अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई। विद्यालयीय शिक्षण कार्य के साथ-साथ, प्रशिक्षण में संदर्भदाता कि भूमिका का पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वाहन करना और अन्य  जिम्मेदारियों का निर्वहन करना अत्यंत कठिन रहा लेकिन फिर भी सभी दायित्वों का उचित निर्वहन किया ।विभाग द्वारा बार-बार नए निर्देश जारी किए जाते रहे, जिससे KRP पर मानसिक तनाव और दबाव बना रहा

वर्षों से KRP's ने बड़ी लगन और पूर्ण निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया | अब समय आ गया है कि KRP's को भी कार्यमुक्त कर दिया जाए,

जब ARP को तीन वर्षों के पश्चात कार्यमुक्त कर दिया गया, तो KRP को कार्यमुक्त करने में कोई तर्कसंगत बाधा नहीं होनी चाहिए। यदि उनके स्थान पर अन्य योग्य शिक्षकों को प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया जाए, तो KRP अपने विद्यालय में गंभीरता से पूर्णतः शिक्षण कार्य कर सकेंगे और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकेंगे।

अंत में कहना चाहूंगा कि KRP का योगदान किसी भी दृष्टिकोण से कम महत्वपूर्ण नहीं है,  इनकी कर्त्तव्य निष्ठा और परिश्रम के लिए बेसिक शिक्षा परिवार सदैव इनका आभारी रहेगा |


https://www.updatemarts.com/2025/04/mdm-exclusive.html

https://www.updatemarts.com/2025/04/t-c.html







 

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