Up basic School News

Basic education builds the foundation of a strong nation.

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a group of school children participating in a cultural event with joy and enthusiasm.

NIPUN Bharat Mission

NIPUN Bharat helps young children read and do basic math with understanding and confidence.

Nurturing Nature, Growing Futures

Green mission by students to make earth clean and fresh.

Mission Shikshan Samvad – For Education and Teacher Respect

Mission to uplift education, honor teachers, and promote human welfare through dialogue.

Friday, April 25, 2025

पहुलगाम में 22 अप्रैल 2025 का आतंकी हमला – बायसरन पार्क में निर्दोष हिंदू पर्यटकों की हत्या

 

22 अप्रैल 2025 का दिन देश के लिए बहुत दुख और सदमे से भरा हुआ रहा। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में बायसरन नाम की एक सुंदर और हरी-भरी जगह है, जिसे लोग 'मिनी स्विट्जरलैंड' भी कहते हैं। यह जगह घने जंगलों, बर्फ से ढके पहाड़ों और खूबसूरत मैदानों के कारण बहुत प्रसिद्ध है। गर्मियों की छुट्टियों में लोग परिवार के साथ घूमने-फिरने आते हैं और यहां की ठंडी हवा, हरियाली और शांत वातावरण का आनंद लेते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस बार बायसरन में कुछ ऐसा हुआ जिसने देशभर के लोगों का दिल दहला दिया।

मंगलवार की दोपहर को करीब तीन बजे का समय था। बायसरन पार्क में बहुत सारे लोग अपने परिवार के साथ टट्टू की सवारी कर रहे थे, बच्चे घास पर खेल रहे थे, कुछ लोग फोटोग्राफी कर रहे थे और कुछ खाने-पीने की दुकानों के पास चाय और स्नैक्स का आनंद ले रहे थे। तभी अचानक वहां कुछ लोग सेना की वर्दी पहनकर आए। उन्हें देखकर किसी को शक नहीं हुआ, क्योंकि ऐसा लग रहा था कि वो सेना के जवान हैं और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए आए हैं। लेकिन कुछ ही देर बाद सब कुछ बदल गया।

सेना की वर्दी में आए ये लोग असली सैनिक नहीं थे। ये आतंकवादी थे, जो पहले से योजना बनाकर आए थे। उन्होंने सबसे पहले लोगों को इकट्ठा किया और फिर उनसे उनका नाम और धर्म पूछा। कुछ लोगों से पहचान पत्र भी दिखवाए। जब उन्हें यह पता चला कि सामने खड़ा व्यक्ति हिंदू है और उसने कलमा नहीं पढ़ा है, तो उन्होंने उस पर गोलियां चला दीं। यह बहुत ही क्रूर और अमानवीय हमला था। लोग भागने लगे, बच्चों की चीखें गूंजने लगीं, और चारों ओर अफरा-तफरी मच गई।

इस हमले में कुल 26 लोगों की मौत हो गई और 17 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मरने वालों में ज्यादातर लोग अलग-अलग राज्यों से आए पर्यटक थे। कोई अपने माता-पिता के साथ आया था, कोई अपने बच्चों के साथ और कोई अपने जीवनसाथी के साथ। लेकिन अब वे सब वापस नहीं जा पाए। उनकी यात्रा वहीं खत्म हो गई। यह हमला पुलवामा के बाद जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा आतंकवादी हमला माना जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावर चार से छह की संख्या में थे। वे देवदार के पेड़ों के पीछे से चुपचाप आए थे और अचानक हमला कर दिया। उनके पास ऑटोमैटिक राइफलें थीं। उन्होंने पहले हिन्दू पहचान करने के लिए कई लोगों से बातें कीं और जैसे ही उनकी पहचान सुनिश्चित हुई, उन पर गोलियों की बौछार कर दी। जो लोग वहां मौजूद थे, उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा भयानक मंजर कभी नहीं देखा।

घटना के बाद सुरक्षा बलों को खबर दी गई और तुरंत सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान वहां पहुंचे। उन्होंने इलाके को घेर लिया और आतंकियों की तलाश शुरू की। घायलों को हेलीकॉप्टर से श्रीनगर के अस्पतालों में भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। बहुत सारे लोग अब भी सदमे में हैं और बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं।

इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने ली है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस हमले का मास्टरमाइंड लश्कर का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह खालिद है। सैफुल्लाह खालिद पाकिस्तान में बैठकर आतंक फैलाने की योजना बनाता है और पाकिस्तानी सेना की मदद से उन्हें अंजाम देता है। उसे हाल ही में पाकिस्तान के एक शहर में भाषण देने के लिए बुलाया गया था, जहां उसने भारतीय लोगों के खिलाफ नफरत फैलाई।

हमले में जिन लोगों की जान गई, उनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा, केरल, ओडिशा, मध्यप्रदेश और यहां तक कि नेपाल और अरुणाचल प्रदेश से भी लोग थे। वे सभी सिर्फ छुट्टी मनाने और कश्मीर की खूबसूरती देखने आए थे। लेकिन अब उनकी लाशें घर पहुंचीं, जिससे उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

इस हमले ने न केवल पूरे देश को दुखी किया है, बल्कि एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है कि क्या पर्यटक अब सुरक्षित हैं? क्या परिवारों के साथ घूमने जाने वाले लोग अब डर के साए में जिएंगे? क्या धर्म के नाम पर किसी की जान लेना सही है? इन सवालों के जवाब ढूंढना सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और हम सभी की जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय विदेश दौरे पर थे और अमेरिका के उपराष्ट्रपति भारत दौरे पर आए थे। इस हमले का समय भी सोच-समझकर चुना गया था, ताकि दुनिया का ध्यान इस ओर जाए कि जम्मू-कश्मीर अब भी सुरक्षित नहीं है। इस हमले से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि जम्मू-कश्मीर में पर्यटक सुरक्षित नहीं हैं, खासकर हिंदू धर्म के लोग।

यह हमला अमरनाथ यात्रा से कुछ समय पहले हुआ, लेकिन यह यात्रा से जुड़ा नहीं था। यह उन लोगों पर हमला था, जो सिर्फ घूमने और प्रकृति का आनंद लेने आए थे। वे न तो किसी धार्मिक कार्य में लगे थे, न ही किसी राजनीतिक मकसद से आए थे। वे आम नागरिक थे, जो छुट्टी मना रहे थे।

हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी किए हैं, जिनके नाम आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबु तल्हा बताए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इनकी तलाश में जंगलों और आसपास के इलाकों में छानबीन कर रही हैं। साथ ही, बायसरन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इस हमले के बाद देशभर में गुस्सा और दुख की लहर फैल गई है। सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कई राज्यों में मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए शोक सभाएं आयोजित की गईं। स्कूलों और कार्यालयों में दो मिनट का मौन रखा गया और मोमबत्तियां जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

पर्यटन मंत्रालय ने भी इस हमले की निंदा की और कहा कि ऐसी घटनाएं देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। साथ ही, सरकार ने सभी राज्यों के पर्यटकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

अब यह सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि इस हमले के दोषियों को पकड़कर उन्हें कड़ी सजा दिलवाएं। साथ ही, पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में कोई भी परिवार इस तरह के दुख का सामना न करे।

यह हमला हमें यह भी याद दिलाता है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। जो लोग धर्म के नाम पर खून बहाते हैं, वे इंसान नहीं हो सकते। एक सच्चा इंसान किसी की मुस्कान, किसी के परिवार और किसी के सपने छीनने का हकदार नहीं हो सकता। हमें एकजुट होकर नफरत के इन सौदागरों का विरोध करना होगा और देश में शांति, भाईचारे और प्रेम की भावना को बनाए रखना होगा।

देश आज भी उन 26 निर्दोष लोगों के लिए शोक मना रहा है, जो केवल पहलगाम की सुंदरता देखने आए थे, लेकिन उनकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई। उनका कसूर बस इतना था कि वे किसी एक धर्म के अनुयायी थे और उन्होंने किसी का 'कलमा' नहीं पढ़ा। यह एक बहुत ही शर्मनाक और अमानवीय सोच है, जिसे हमें मिलकर खत्म करना होगा।

हमले के बाद बचे लोगों ने जो बताया, वह बहुत ही दर्दनाक था। एक महिला ने बताया कि उसका बेटा घास पर खेल रहा था, और तभी गोली चलने लगी। उसने अपने बेटे को बचाने की कोशिश की, लेकिन गोली उसके पति को लग गई और वह वहीं गिर पड़ा। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ आया था, और सब लोग बहुत खुश थे। लेकिन अचानक गोलियां चलने लगीं और उसका भाई वहीं मारा गया। ऐसे कितने ही लोगों की कहानियां हैं, जो सुनकर आंखों से आंसू निकल आते हैं।

हम सबको इस घटना से सीख लेनी चाहिए और अपने देश, अपने लोगों और अपने समाज की सुरक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। कोई भी ताकत हमें डराकर नहीं हरा सकती, जब तक हम मिलकर उसका विरोध करते रहें। इन शहीद पर्यटकों की याद में हमें अपने देश को और मजबूत और सुरक्षित बनाना होगा।






Thursday, April 24, 2025

UP Board Result 2025: 10वीं और 12वीं का रिजल्ट कल होगा जारी

 

UP Board 10वीं और 12वीं रिजल्ट 2025 कल होगा जारी | यूपी बोर्ड रिजल्ट अपडेट
यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा 2025 में फरवरी और मार्च के महीनों में हुई थी। अब सभी छात्र और उनके परिवार बहुत उत्साहित हैं क्योंकि कल बोर्ड का रिजल्ट आने वाला है। इस रिजल्ट का इंतजार लाखों छात्रों को है, जिन्होंने साल भर मेहनत करके परीक्षा दी थी।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) रिजल्ट को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी करेगी। छात्र अपना रिजल्ट upresults.nic.in या upmsp.edu.in पर जाकर देख सकेंगे। रिजल्ट देखने के लिए रोल नंबर और जन्मतिथि की जरूरत होगी।
इस साल लगभग 55 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। इसमें 10वीं के करीब 30 लाख और 12वीं के लगभग 25 लाख छात्र शामिल थे। इस बार परीक्षा को नकल रहित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं की गई थीं जैसे सीसीटीवी कैमरे और सख्त निगरानी। इससे परीक्षा ठीक से हुई और अब रिजल्ट की तैयारी पूरी हो गई है।
जब रिजल्ट आएगा, तो उसमें छात्र का नाम, रोल नंबर, विषय के अंक, कुल अंक, प्रतिशत और पास या फेल की जानकारी होगी। अगर किसी छात्र को लगे कि उसके अंक कम आए हैं, तो वह पुनः जांच (रीचेकिंग) के लिए आवेदन कर सकता है। और अगर कोई छात्र एक-दो विषयों में फेल हो जाता है, तो वह कम्पार्टमेंट परीक्षा देकर पास हो सकता है।
10वीं पास करने के बाद छात्र 11वीं में जाकर आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स में से कोई भी स्ट्रीम चुन सकते हैं। कुछ छात्र आईटीआई या तकनीकी कोर्स भी कर सकते हैं। वहीं 12वीं पास करने वाले छात्र कॉलेज में बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे कोर्स में दाखिला ले सकते हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं।
हर साल की तरह इस साल भी जो छात्र टॉप करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से इनाम मिल सकते हैं, जैसे लैपटॉप, टेबलेट या छात्रवृत्ति। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी टॉप करने वाले छात्रों को सम्मानित कर सकते हैं।
रिजल्ट आने पर बहुत सारे छात्र एक साथ वेबसाइट खोलते हैं, जिससे साइट स्लो हो सकती है। ऐसे में घबराएं नहीं, थोड़ा इंतजार करें और दोबारा कोशिश करें। रिजल्ट का प्रिंट या स्क्रीनशॉट जरूर निकालकर रखें, क्योंकि यह आगे स्कूल या कॉलेज में काम आएगा।
अगर किसी छात्र के अंक कम आए हैं, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। रिजल्ट केवल एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं। मेहनत करने से हमेशा आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है। इस रिजल्ट से हर छात्र को अपने भविष्य की नई शुरुआत करने का मौका मिलेगा।
कल का दिन बहुत खास होगा, क्योंकि लाखों छात्र अपनी सालभर की मेहनत का फल देखेंगे। सभी बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं। मेहनत और ईमानदारी से काम करने वालों को सफलता जरूर मिलती है।
👉UP Board Result 2025 : यूपी बोर्ड परिणाम पर बड़ा अपडेट, कल 12:30 बजे जारी होंगे 10वीं-12वीं के नतीजे, आदेश जारी
https://basicshikshakhabar.com/2025/04/d-3607/ 

 

👉UP TGT, PGT दोनों में bed अनिवार्य कर दिया गया है , देखें ऑफिशल लेटर https://basicshikshakhabar.com/2025/04/dd-1146/

 

👉पूरे प्रदेश में स्कूल अब 07:30-01:30 चलेंगे। लेकिन बच्चों की छुट्टी 12:30 बजे होगी। , देखें शिक्षा निदेशक बेसिक क आदेश जारी https://basicshikshakhabar.com/2025/04/ff-706/








8वां वेतन आयोग: सरकारी वेतन और पेंशन में बदलाव की तैयारी

 

                

              वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी लाएगा 8वां वेतन आयोग, केंद्र सरकार की तैयारी तेज



भारत में सरकारी कर्मचारी देश के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार समय-समय पर उनके वेतन और पेंशन में बदलाव करती है ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें और अपने काम में मन लगाकर योगदान दे सकें। इसी उद्देश्य से हर 10 साल में एक वेतन आयोग (Pay Commission) बनाया जाता है। अब भारत सरकार 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) बनाने जा रही है, जिसकी तैयारी जोरों पर है।

सरकार ने 8वें वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र (Terms of Reference - ToR) को तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और यह प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर आयोग के कार्यक्षेत्र को अधिसूचित कर दिया जाएगा और इसके साथ ही आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के नाम भी घोषित कर दिए जाएंगे। इससे पहले इस प्रक्रिया में कई महीने की देरी हो चुकी थी, लेकिन अब सरकार ने इसे प्राथमिकता देते हुए तेज़ी से आगे बढ़ाया है।

सरकारी कर्मचारियों का वेतन समय के साथ बढ़ाना जरूरी होता है क्योंकि महंगाई बढ़ती रहती है, चीजों की कीमतें बदलती हैं और जीवन की आवश्यकताएं भी बढ़ती हैं। ऐसे में कर्मचारियों का वेतन यदि पुराना ही बना रहता है, तो वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर पाते। इसीलिए हर दशक में एक वेतन आयोग बनाया जाता है, जो यह तय करता है कि वर्तमान समय में वेतन और पेंशन की दरें क्या होनी चाहिए।

8वें वेतन आयोग का काम होगा कि वह सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करके एक रिपोर्ट तैयार करे। इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) और कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत की जाएगी। आयोग को यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए कम से कम एक वर्ष का समय मिल सकता है। रिपोर्ट 2026 के मध्य में आने की संभावना है। इसके बाद सरकार रिपोर्ट पर निर्णय लेकर 1 जनवरी 2026 से नए वेतन और पेंशन लागू करेगी। इसका लाभ सभी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलेगा और उन्हें पिछली तारीख से बकाया राशि भी दी जाएगी।

यह आयोग लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को सीधे प्रभावित करेगा। इन कर्मचारियों में सेना, अर्धसैनिक बल, रेलवे, डाक, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन जैसे विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाखों कर्मचारी भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे क्योंकि वे भी केंद्र सरकार के वेतन आयोग की सिफारिशों को अपनाते हैं।

सरकार ने हाल ही में व्यय विभाग (Department of Expenditure) के माध्यम से एक विज्ञापन भी जारी किया है जिसमें 8वें वेतन आयोग के लिए 35 पदों को प्रतिनियुक्ति (deputation) के आधार पर भरने की बात कही गई है। इससे साफ है कि सरकार आयोग की स्थापना में तेजी ला रही है।

7वां वेतन आयोग 28 फरवरी 2014 को गठित हुआ था और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई थीं। उस समय आयोग की अध्यक्षता जस्टिस अशोक कुमार माथुर ने की थी। 7वें आयोग ने वेतन और पेंशन में औसतन 23.55% की वृद्धि की थी। इससे कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया था और अधिकतम वेतन 90,000 रुपये से बढ़कर 2.5 लाख रुपये प्रति माह हो गया था। उस समय महंगाई भत्ता 119% था, जिसे नए वेतन में जोड़ दिया गया था।

7वें वेतन आयोग ने एक नई "वेतन मैट्रिक्स" भी प्रस्तावित की थी जिसमें पुरानी "पे बैंड" और "ग्रेड पे" की जगह एक सरल वेतन संरचना बनाई गई थी। इसमें हर स्तर पर वेतन तय कर दिया गया था और कर्मचारियों को उनके स्तर के अनुसार वेतन मिलने लगा था। आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था, जिसका अर्थ था कि पुराने वेतन को 2.57 गुना करके नया वेतन तय किया गया।

अब 8वां वेतन आयोग भी ऐसा ही कोई नया फिटमेंट फैक्टर तय करेगा। यह तय करने में आयोग महंगाई, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), जीवन यापन की लागत और कर्मचारियों की खरीदने की शक्ति को ध्यान में रखेगा। जैसे 2016-17 में जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ था, तो सरकार के राजस्व खर्च में 9.9% की वृद्धि हो गई थी, जबकि इससे पहले यह केवल 4.8% थी। इससे सरकार के लिए पूंजीगत व्यय (capital expenditure) पर असर पड़ा था।

हालांकि, वेतन आयोग की सिफारिशों से सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है, लेकिन इसका फायदा भी होता है। जब कर्मचारियों के पास अधिक पैसा आता है, तो वे ज्यादा खरीदारी करते हैं, जिससे बाजार में रौनक बढ़ती है और देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इससे व्यापार और उद्योग को भी लाभ होता है।

लेकिन राज्यों और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए यह हमेशा आसान नहीं होता। उन्हें भी केंद्र के समान वेतन लागू करना पड़ता है जिससे उन पर भी आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। इसलिए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से पहले हर सरकार को अपने वित्तीय संसाधनों का आंकलन करना पड़ता है।

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के असर को नई मध्यम अवधि की वित्तीय योजनाओं और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में भी जोड़ा जाएगा। 16वां वित्त आयोग वर्ष 2027 से शुरू होने वाले पांच सालों के लिए केंद्रीय करों के वितरण और राज्यों को मिलने वाले अनुदानों के बारे में सिफारिशें करेगा।

वेतन आयोग न केवल कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। जब सरकारी कर्मचारियों को अच्छा वेतन मिलता है, तो वे बेहतर जीवन जी पाते हैं, उनका मनोबल बढ़ता है और वे अपने काम में और मेहनत करते हैं। इससे सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में भी मदद मिलती है।

8वें वेतन आयोग से लाखों कर्मचारियों को उम्मीदें हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें उचित वेतन मिले, ताकि वे अपने परिवार की जरूरतें अच्छी तरह पूरी कर सकें। महंगाई के इस दौर में जब सब कुछ महंगा होता जा रहा है, वेतन में वृद्धि समय की मांग है। सरकार भी जानती है कि यदि कर्मचारियों को संतोषजनक वेतन नहीं मिला, तो उनका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

इसलिए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें केवल वेतन और पेंशन का मामला नहीं हैं, यह कर्मचारियों की मेहनत को सम्मान देने और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने का एक जरिया भी है


👉 8वां वेतन आयोग हेतु पैनल का 2-3 सप्ताह में होगा गठन: टीओआर, अध्यक्ष और वेतन संशोधन पर प्रमुख अपडेट

https://www.updatemarts.com/2025/04/8-2-3.html


👉 UP Board Result 2025 : यूपी बोर्ड परिणाम पर बड़ा अपडेट, कल 12:30 बजे जारी होंगे 10वीं-12वीं के नतीजे, आदेश जारी 

https://basicshikshakhabar.com/2025/04/d-3607/


👉पूरे प्रदेश में स्कूल अब 07:30-01:30। बच्चों की छुट्टी 12:30 बजे।

https://www.updatemarts.com/2025/04/0730-0130-1230.html



Monday, April 21, 2025

कानपुर देहात में शिक्षकों का सम्मान और प्रेरणा भरा आयोजन

 

शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता — सम्मान समारोह में जीवन भर की उपलब्धियों को सलाम



दिनांक 19 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ, ब्लॉक इकाई मैंथा कानपुर देहात द्वारा एक बहुत ही सुंदर और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विकासखंड मैथा के उन शिक्षकों के सम्मान में किया गया, जिन्होंने लंबे समय तक शिक्षा सेवा दी और 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त हुए। यह समारोह टाउन एरिया गेस्ट हाउस शिवली, कानपुर देहात में बड़े ही अच्छे तरीके से और खुशी-खुशी मनाया गया। इस कार्यक्रम में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों का सम्मान किया गया।

सेवानिवृत्त शिक्षकों में श्री अशोक कुमार शुक्ला जो कि जिला मंत्री, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय औगी मैंथा के पद पर कार्यरत थे, श्रीमती रमा वर्मा, प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय कारानी, श्रीमती उषा कटियार, प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद, श्री ओम नारायण कटियार, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रंजीतपुर और श्रीमती रुखसाना बेगम, सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय जुगराजपुर शिवली शामिल रहे। सभी शिक्षकों को इस समारोह में बड़े सम्मान के साथ बुलाया गया और उनके कार्यकाल की प्रशंसा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन, अर्चन और माल्यार्पण से की गई। सबसे पहले मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र सिंह, जिन्हें सभी राजू भैया के नाम से जानते हैं और जो कंचौसी टाउन एरिया के प्रथम अध्यक्ष और जिला पंचायत अध्यक्ष के पति हैं, ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पंचायत शिवली के अध्यक्ष श्री अवधेश शुक्ला ने की।

कार्यक्रम में नगर पंचायत सिकंदरा की अध्यक्षा श्रीमती सीमा पाल और उनके प्रतिनिधि श्री पंकज पाल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी मैथा सुश्री सपना सिंह भी समारोह में पधारीं। सबसे पहले सभी अतिथियों का स्वागत उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जनपद और ब्लॉक पदाधिकारियों द्वारा माल्यार्पण और फूलों से किया गया।

इसके बाद मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र सिंह राजू भैया ने सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को मंच पर बुलाया और माल्यार्पण कर, प्रतीक चिन्ह भेंट कर और अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथियों ने भी सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया। पूरे माहौल में खुशियों और सम्मान की भावना दिख रही थी।

मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र सिंह ने अपने भाषण में कहा कि शिक्षक कभी भी पूरी तरह से सेवानिवृत्त नहीं होता। वह केवल एक पड़ाव पार करता है, लेकिन समाज और शिक्षा के लिए उसका मार्गदर्शन जीवनभर बना रहता है। उन्होंने सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि आप सभी का जीवन हमेशा खुशहाल और सुखद हो।

इसके बाद विशिष्ट अतिथि श्रीमती सीमा पाल ने कहा कि एक शिक्षक समाज का सबसे बड़ा निर्माता होता है। वह बच्चों को पढ़ाकर उनके भविष्य को संवारता है। उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और उनके जीवन में सुख-शांति की कामना की। खंड शिक्षा अधिकारी सुश्री सपना सिंह ने भी अपने शब्दों में कहा कि यह बहुत अच्छा और सुंदर कार्यक्रम है। शिक्षक संघ की ब्लॉक इकाई ने इसे बहुत ही अच्छे तरीके से आयोजित किया है। उन्होंने सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि आपका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

नगर पंचायत शिवली के अध्यक्ष श्री अवधेश शुक्ला ने अपने भाषण में रामायण की कहानियों का उदाहरण देकर बताया कि जीवन में सेवा और सम्मान का बहुत महत्व है। उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है जो जीवनभर शिक्षा देता है। उन्होंने सभी शिक्षकों की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से सभी को प्रेरणा मिलती है।

इस समारोह में शिक्षकों के साथ-साथ अनुदेशक, शिक्षामित्र, बेसिक शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारी और बहुत सारे स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। सभी ने पूरे कार्यक्रम का आनंद लिया और सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान करते हुए तालियां बजाईं।

कार्यक्रम के अंत में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष श्री एल.बी. सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष श्री मुकेश बाजपेई और ब्लॉक मंत्री श्री शशिकांत यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम सबका कर्तव्य है कि अपने शिक्षकों का सम्मान करें और उनके अनुभवों से सीखें। उन्होंने कहा कि संगठन का हमेशा यह प्रयास रहेगा कि शिक्षकों का मान-सम्मान इसी तरह बना रहे।

उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इतने अच्छे और व्यवस्थित कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई और शुभकामनाएं।

इस समारोह में शिक्षकों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने अपने जीवन के कई साल बच्चों को पढ़ाने और संस्कार देने में लगाए। कई शिक्षक अपनी बातें कहते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। वह हमेशा समाज और अपने आसपास के लोगों को कुछ न कुछ सिखाता रहता है।

सभी ने मिलकर यह ठाना कि आगे भी इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए ताकि शिक्षक समाज का सम्मान और गौरव हमेशा बना रहे। इस पूरे कार्यक्रम में कहीं भी अव्यवस्था नहीं थी। सब कुछ बहुत अच्छे ढंग से हुआ।

यह कार्यक्रम शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा देने वाला और समाज में शिक्षकों के सम्मान को दर्शाने वाला रहा। इस कार्यक्रम ने यह भी बताया कि समाज में शिक्षक का कितना बड़ा स्थान है। अगर शिक्षक न हों तो समाज का निर्माण ही अधूरा रह जाता है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सरस्वती वंदना ने भी सबका मन मोह लिया। पूरे समय वातावरण में खुशी और सम्मान का माहौल रहा। हर किसी के चेहरे पर मुस्कान और गर्व साफ दिख रहा था।

अंत में एक बार फिर से उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया गया और यह संकल्प लिया गया कि आगे भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे।

इस पूरे कार्यक्रम की सफलता ने यह साबित कर दिया कि शिक्षक हमारे समाज की सबसे मजबूत और सम्मानित कड़ी हैं। जो हर समय देश, समाज और बच्चों के भविष्य को संवारने में लगे रहते हैं।

यह दिन सभी के लिए यादगार और प्रेरणा देने वाला रहा। सभी ने मिलकर इसे एक यादगार समारोह बना दिया।





विद्यालयों में ए आर पी का काम और सहयोगात्मक पर्वेक्षण का महत्व

 

ए आर पी को औचक निरीक्षण और निरीक्षण पंजिका में अंकन का अधिकार नहीं: एक विस्तृत विश्लेषण



भारत में शिक्षा व्यवस्था को लगातार सुधारने के लिए समय-समय पर कई नई योजनाएँ और व्यवस्थाएँ बनाई जाती हैं। विद्यालयों में पढ़ाई की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियाँ तय की जाती हैं। इन्हीं में से एक व्यवस्था है ए आर पी यानी अकादमिक रिसोर्स पर्सन। ए आर पी का काम यह होता है कि वे विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को पढ़ाई-लिखाई में मदद करें, बच्चों की पढ़ाई की स्थिति को समझें और अगर कोई कमी हो, तो उसे सुधारने के लिए सुझाव दें।

ए आर पी का मुख्य उद्देश्य शिक्षा में गुणवत्ता सुधार करना है। वे विद्यालय में जाकर यह देखते हैं कि बच्चे क्या पढ़ रहे हैं, कैसे पढ़ रहे हैं और किस तरीके से शिक्षक पढ़ा रहे हैं। अगर कहीं कोई परेशानी आती है, तो ए आर पी शिक्षक को सलाह देता है कि पढ़ाई में सुधार कैसे किया जा सकता है। साथ ही ए आर पी नई शिक्षा नीति और शिक्षण पद्धति के बारे में भी जानकारी देता है ताकि विद्यालय में पढ़ाई और बेहतर हो सके।

कई बार लोगों में यह भ्रम होता है कि ए आर पी को भी विद्यालय का औचक निरीक्षण करने और निरीक्षण पंजिका में लिखने का अधिकार होता है। लेकिन यह सही नहीं है। औचक निरीक्षण का मतलब होता है बिना बताए अचानक विद्यालय पहुँचकर उसकी पूरी जांच करना। यह अधिकार केवल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को होता है। जैसे कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी या खंड शिक्षा अधिकारी।

ए आर पी केवल सहयोगात्मक पर्वेक्षण कर सकता है। सहयोगात्मक पर्वेक्षण का मतलब होता है विद्यालय में जाकर शिक्षकों और बच्चों की मदद करना, पढ़ाई की स्थिति को समझना और सुझाव देना। ए आर पी का काम सख्ती करना, दोष निकालना या कार्रवाई करना नहीं होता। वे शिक्षक और बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।

जब ए आर पी विद्यालय में जाता है, तो उसे पहले से सूचना देने की आवश्यकता नहीं होती। वह बिना बताए भी विद्यालय पहुँच सकता है। लेकिन उसका उद्देश्य केवल मदद करना और पढ़ाई में सुधार के लिए सहयोग देना होता है। उसे औचक निरीक्षण करने और निरीक्षण पंजिका में कुछ भी लिखने का अधिकार नहीं है।

डॉ. रहबर सुल्तान द्वारा पूछी गई एक जनसूचना में इस विषय पर जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ए आर पी का काम केवल सहयोग करना है। वे औचक निरीक्षण नहीं कर सकते और निरीक्षण पंजिका में कोई टिप्पणी भी दर्ज नहीं कर सकते। वे केवल भ्रमण पंजिका या सहयोगात्मक पंजिका में ही अपना भ्रमण, सुझाव और शिक्षकों के साथ हुई बातचीत का विवरण दर्ज कर सकते हैं।

निरीक्षण पंजिका वह पंजिका होती है, जिसमें निरीक्षण के समय अधिकारियों द्वारा की गई टिप्पणियाँ, निर्देश और सुझाव दर्ज किए जाते हैं। इसमें यह भी लिखा जाता है कि विद्यालय में क्या-क्या देखा गया, क्या कमियाँ पाई गईं और क्या सुधार करने को कहा गया। यह अधिकार केवल अधिकृत अधिकारी को होता है।

ए आर पी का काम है कि वह विद्यालय में जाकर देखे कि शिक्षक पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ा रहे हैं या नहीं, बच्चे पढ़ाई को समझ रहे हैं या नहीं, पढ़ाई में कोई परेशानी आ रही है या नहीं। अगर कोई कमी दिखाई दे तो शिक्षक को सहयोगात्मक रूप से सुझाव दें कि इसे कैसे सुधारा जा सकता है। वे शिक्षकों को नई पद्धतियों की जानकारी देते हैं और शिक्षण में मदद करते हैं।

विद्यालयों में औचक निरीक्षण का अधिकार केवल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को होता है। वे ही विद्यालय की सफाई, बच्चों की उपस्थिति, मिड डे मील, कक्षाओं की स्थिति और दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। वे ही निरीक्षण पंजिका में अपनी टिप्पणियाँ लिख सकते हैं।

ए आर पी भ्रमण पंजिका या सहयोगात्मक पंजिका में अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसमें वे लिखते हैं कि किस दिन, कितने बजे विद्यालय आए, किस शिक्षक से मिले, किस कक्षा में गए और बच्चों की पढ़ाई की स्थिति क्या पाई। साथ ही वे अपने सुझाव भी लिख सकते हैं।

अगर ए आर पी अपने कार्य को सही तरीके से करें तो इससे विद्यालय को कई फायदे हो सकते हैं। शिक्षकों को पढ़ाई के नए तरीके सीखने को मिलेंगे। बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा। शिक्षकों और बच्चों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। बच्चों को अपने सवाल पूछने और समझने में आसानी होगी। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बेहतर बनेगा।

विद्यालयों में सहयोगात्मक पर्वेक्षण इसलिए जरूरी है ताकि शिक्षकों को पढ़ाई में मदद मिले और बच्चों की पढ़ाई में गुणवत्ता बनी रहे। ए आर पी और शिक्षक मिलकर अगर ईमानदारी से काम करें तो पढ़ाई का स्तर निश्चित रूप से बेहतर होगा।

सहयोगात्मक पर्वेक्षण का मतलब यह नहीं है कि कमियाँ ढूँढकर सख्ती की जाए। इसका मतलब है मिल-जुलकर पढ़ाई को सुधारना और एक अच्छा शैक्षिक वातावरण बनाना। ए आर पी को भी यह समझना चाहिए कि उनका काम केवल सहयोग करना है, न कि औचक निरीक्षण करना।

विद्यालयों में भ्रमण के दौरान ए आर पी को कोई सख्ती नहीं करनी चाहिए। उन्हें सिर्फ बच्चों और शिक्षकों से बात कर के पढ़ाई की स्थिति को समझना चाहिए और जहाँ जरूरत हो, वहाँ सुझाव देना चाहिए। अगर ए आर पी सच्चे मन से यह काम करें, तो बच्चों की पढ़ाई में बहुत सुधार आ सकता है।

विद्यालयों के शिक्षकों को भी चाहिए कि वे ए आर पी का सहयोग करें। उनसे नई-नई शिक्षण विधियाँ सीखें और अपने पढ़ाने के तरीके में सुधार करें। बच्चों को अच्छे से पढ़ाएँ और उनकी समस्याएँ समझें।

जब शिक्षक और ए आर पी मिलकर काम करेंगे तो विद्यालय का माहौल अच्छा बनेगा। बच्चे भी पढ़ाई में रुचि लेने लगेंगे और अच्छे अंक लाएँगे।

इसलिए यह बहुत जरूरी है कि ए आर पी केवल सहयोगात्मक पर्वेक्षण करें। वे औचक निरीक्षण न करें और निरीक्षण पंजिका में कुछ भी न लिखें। उन्हें केवल भ्रमण पंजिका या सहयोगात्मक पंजिका में ही अपनी रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए।

यह बात जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा भी स्पष्ट कर दी गई है। उन्होंने कहा है कि ए आर पी का काम केवल सहयोग करना है। वे औचक निरीक्षण नहीं कर सकते और निरीक्षण पंजिका में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।

अगर हम सभी मिलकर इस व्यवस्था का सही तरीके से पालन करें तो निश्चित रूप से विद्यालयों की पढ़ाई का स्तर और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा। सहयोग, समझदारी और ईमानदारी से किया गया हर काम हमेशा अच्छे परिणाम देता है।

विद्यालयों में शिक्षा का माहौल तभी बेहतर होगा जब शिक्षक, ए आर पी और अधिकारी मिल-जुलकर काम करें। हर किसी को अपने अधिकार और कर्तव्य का ज्ञान होना चाहिए। इससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और देश का भविष्य भी बेहतर बनेगा।

अगर ए आर पी अपना काम ईमानदारी से करें, शिक्षक उनका सहयोग करें और अधिकारी समय-समय पर विद्यालय का उचित निरीक्षण करें तो पढ़ाई में निश्चित रूप से सुधार होगा। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी और वे देश का नाम रोशन करेंगे।

इसी सोच और भावना के साथ हमें सभी को मिलकर काम करना चाहिए। शिक्षकों को अपने पढ़ाने के तरीके को सुधारना चाहिए। ए आर पी को सहयोग करना चाहिए और अधिकारी को अपने अधिकार के अनुसार निरीक्षण करना चाहिए।

अगर हम सभी मिलकर ईमानदारी और नियम के अनुसार काम करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। शिक्षा का स्तर ऊँचा होगा और समाज में अच्छा माहौल बनेगा। यही देश की तरक्की का असली रास्ता है।






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