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Tuesday, May 27, 2025

TSCT – शिक्षकों की सेवा और सहयोग की मिसाल

 


आज हम एक ऐसी संस्था की बात करने जा रहे हैं जो शिक्षकों के जीवन में उम्मीद, सहयोग और इंसानियत की नई रौशनी लेकर आई है – TSCT यानी "teachers self care team”। यह संस्था ना सिर्फ एक सामाजिक आंदोलन बन चुकी है, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश में शिक्षक समुदाय के बीच एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है। जब इसका गठन हुआ था, तब किसी को यह अंदाज़ा नहीं था कि आने वाले समय में यह 4 लाख शिक्षकों के विश्वास की मिसाल बनेगी। यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक भावना है, एक परिवार है जो हर मुश्किल घड़ी में अपने साथियों के साथ खड़ा रहता है।

TSCT की स्थापना और उसका उद्देश्य:

करीब पाँच साल पहले, जब TSCT की स्थापना हुई, तब इसका मकसद था – संकट के समय में शिक्षक साथियों की मदद करना। इस संस्था की नींव ऐसे लोगों ने रखी जो निस्वार्थ भाव से समाज और शिक्षक समुदाय की भलाई के लिए समर्पित थे। धीरे-धीरे यह संस्था एक आंदोलन बन गई। हजारों शिक्षक जुड़ते गए, मदद करने लगे और जरूरतमंदों को संबल देने लगे।

TSCT का उद्देश्य है कि आज हम जिन लोगों की मदद करते हैं, वही कल को किसी और की मदद करने वाले बनें। यानी – आज का सहयोग, कल का सहारा। यही संस्था का मूलमंत्र है।

15 मई 2025 से चल रहा सहयोग अभियान:

इस वर्ष 15 मई से TSCT का एक और सहयोग अभियान शुरू हुआ, जिसमें दो ऐसे परिवारों को सहायता दी गई जिनकी स्थितियाँ बहुत भावुक करने वाली थीं:

1. स्वर्गीय हरीश गंगवार जी (बरेली):

एक कर्मठ और निष्ठावान शिक्षक जो जीवनभर सहयोग के भाव से जुड़े रहे। उनके निधन के बाद TSCT ने उनके परिवार की मदद के लिए कदम आगे बढ़ाया।

2. आजमगढ़ के शिक्षा मित्र का परिवार:

एक ऐसा परिवार जो आज भी छप्पर के नीचे जीवन यापन कर रहा है, जिसके पास खुद का घर नहीं है। उनके हालात देखकर हर कोई भावुक हो गया और TSCT ने इस परिवार की मदद कर मिसाल पेश की।

एक अनोखा और भावनात्मक अनुभव:

इस माह एक और बहुत महत्वपूर्ण और दिल को छू जाने वाली घटना घटी। TSCT ने उस दिवंगत शिक्षक साथी के परिवार की मदद की, जिसने कभी संस्था की निंदा की थी। उन्होंने TSCT के संस्थापक मंडल और उसके सदस्यों को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश की, आपसी बातचीत के ऑडियो और स्क्रीनशॉट सार्वजनिक किए और संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।

लेकिन जब वह शिक्षक गंभीर बीमारी से पीड़ित हुए और संस्था से जुड़ना चाहा, तो TSCT ने उन्हें खुले दिल से अपनाया। किसी ने भी उनकी पिछली बातों का बदला नहीं लिया। बल्कि संस्था के सभी सदस्यों ने ईश्वर से उनके स्वास्थ्य की कामना की। दुर्भाग्यवश उनका निधन हो गया। लेकिन उनके परिवार को TSCT ने पूरा सहयोग देकर यह सिद्ध कर दिया कि मानवता सबसे ऊपर है।

यह उदाहरण बताता है कि TSCT केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक संस्कार है – क्षमा, सेवा और अपनत्व का प्रतीक।

नियम और व्यवस्था की आवश्यकता:

TSCT जैसे बड़े समूह को चलाना कोई आसान काम नहीं। जब कोई व्यवस्था चलती है, तो उसमें नियम बनाना जरूरी होता है। लेकिन नियम कभी किसी को लाभ देते हैं तो कभी किसी को कठिनाई भी होती है। यही जीवन का सच है।

हर किसी को खुश रखना संभव नहीं, लेकिन अगर सोच और नीयत सही हो, तो संस्था अपने रास्ते पर मजबूती से चल सकती है। TSCT के संचालकों ने हमेशा यह कोशिश की कि किसी भी सदस्य के साथ अन्याय ना हो। कोई भूखा ना रहे, कोई संकट में अकेला ना पड़े, यह संस्था का संकल्प है।

TSCT क्यों है खास?

सहयोग की भावना: हर सदस्य दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहता है।

समर्पण: TSCT के संचालकों ने बिना किसी लाभ की उम्मीद के सेवा को अपना धर्म बना लिया है।

पारदर्शिता: संस्था में हर निर्णय खुले मंच पर साझा किया जाता है ताकि किसी को कोई भ्रम ना रहे।

समुदाय का विश्वास: पूरे प्रदेश के 80% से अधिक शिक्षक TSCT से जुड़े हैं, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

TSCT का संदेश:

TSCT का यही संदेश है कि आप संस्था के नियमों या नेतृत्व से मतभेद रख सकते हैं, लेकिन पूरी संस्था या प्रदेश के लाखों शिक्षकों से नाराजगी रखना अनुचित है। जो संस्था लाखों लोगों के दुःख में सहभागी है, जो हर आहट पर मदद के लिए तैयार है, उसका उद्देश्य हमेशा सेवा ही रहा है।

जब कोई शिक्षक TSCT की सहायता से फिर से मुस्कुराता है, जब किसी शिक्षक परिवार की रसोई में खाना बनता है, जब किसी विधवा को बच्चों की पढ़ाई का सहारा मिलता है – तब TSCT का हर सदस्य गौरव अनुभव करता है।

संस्था की ताकत – उसका संगठन:

TSCT आज जिस ऊँचाई पर है, उसका श्रेय उन हजारों शिक्षकों को जाता है जिन्होंने तन-मन-धन से संस्था को सींचा है। चाहे बाढ़ हो, बीमारी हो या आकस्मिक मृत्यु – TSCT हमेशा साथी के घर पहले पहुँचती है।

इसके संचालन में कोई राजनीति नहीं, कोई स्वार्थ नहीं – बस सेवा की भावना है। यहाँ कोई छोटा बड़ा नहीं, हर कोई "TSCT परिवार" का सदस्य है।

निष्कर्ष:

TSCT की कहानी सिर्फ एक संस्था की नहीं है, बल्कि यह उस संस्कृति की कहानी है जिसमें "वसुधैव कुटुम्बकम्" यानी पूरी दुनिया को परिवार मानने की सोच है। किसी की निंदा से नहीं, किसी के साथ खड़े होने से संगठन बनते हैं।

इसलिए अगर आप कभी किसी शिक्षक साथी को परेशानी में देखें, तो TSCT की याद ज़रूर करें। शायद वही दिन आपके जीवन का सबसे बड़ा दिन बन जाए।

TSCT का नारा:

"आज का सहयोग, कल का सहारा" – यह केवल शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्शन है जो हर शिक्षक को भाईचारे और मानवता की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

अंतिम संदेश:

अगर आप TSCT से अभी तक नहीं जुड़े हैं, तो यह समय है जुड़ने का, सहयोग करने का, एक नए युग की शुरुआत करने का।

ईश्वर की कृपा, शिक्षक साथियों का समर्थन, और संगठन की नीयत अगर सच्ची हो – तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

TSCT – सबका साथ, सबका सहयोग, सबका विश्वास, सबका प्रयास 

 

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Tuesday, May 6, 2025

भारत-पाक तनाव के बीच मॉक ड्रिल: यूपी-बिहार समेत 244 जिलों की लिस्ट देखें

 


244 जिलों में मॉक ड्रिल की योजना, जानें आपके जिले का नाम है या नहीं












 

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Monday, April 28, 2025

पहले देश, फिर मांगें: पहलगाम शहीदों को श्रद्धांजलि और राष्ट्रहित का संकल्प

 

पहले देश, फिर मांगें: पहलगाम शहीदों को श्रद्धांजलि और राष्ट्रहित का संकल्प......

 



देश से बड़ा कुछ नहीं होता। जब भी कोई मुश्किल समय आता है, हमें अपने निजी हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सबसे पहले रखना चाहिए। हाल ही में जो दर्दनाक घटना हमारे देश में घटी, उसने पूरे देशवासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में किए गए भीषण आतंकी हमले में हमारे 27 निर्दोष भारतीय भाई-बहनों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस हादसे ने देश को गहरे शोक और आक्रोश से भर दिया है। इस कठिन समय में, अटेवा संगठन ने एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला लिया है। उन्होंने 1 मई को दिल्ली के जंतर मंतर पर पुरानी पेंशन बहाली के लिए प्रस्तावित धरना स्थगित कर दिया है। यह निर्णय न केवल संवेदनशीलता दिखाता है बल्कि राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा का प्रमाण भी है।

जब देश संकट में हो, तो अपने हक और अधिकारों की लड़ाई को कुछ समय के लिए रोकना ही असली देशभक्ति है। देश रहेगा, तभी हम रहेंगे। अगर हमारे देश की सुरक्षा खतरे में होगी, तो हमारे अधिकार, हमारी सुविधाएं, हमारी पेंशन, सब कुछ अर्थहीन हो जाएगा। सेना में कार्यरत लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी इस हमले में वीरगति को प्राप्त हुए। सेना में आज भी पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू है, लेकिन पेंशन का लाभ तभी लिया जा सकता है जब व्यक्ति जीवित रहे। शांति और सुरक्षा के बिना न पेंशन का कोई मतलब रह जाता है और न ही किसी सुविधा का।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने हमें यह सिखाया है कि सबसे पहले देश की रक्षा जरूरी है। हमारे नागरिकों की जान बचाना जरूरी है। हमारा भविष्य तभी सुरक्षित है जब हमारा देश सुरक्षित है। अगर देश के नागरिक असुरक्षित होंगे तो किसी भी प्रकार की मांग, आंदोलन, सुविधाएं सब व्यर्थ हैं। इसलिए इस समय हम सबकी पहली प्राथमिकता देश की एकता और अखंडता को बचाना है। हमें यह समझना चाहिए कि व्यक्तिगत हितों की लड़ाई बाद में लड़ी जा सकती है, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि है।

आज भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्यवाही का ऐलान किया है। यह समय है कि हम सब भारतवासियों को सरकार और सुरक्षाबलों का पूर्ण समर्थन करना चाहिए। आतंकवाद का सामना एकजुट होकर ही किया जा सकता है। हमें अपने दुख, अपनी मांगों को कुछ समय के लिए भूलकर शहीदों के परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए। हमें यह याद रखना चाहिए कि जो लोग देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं, उनके कारण ही हम सुरक्षित रह पाते हैं।

शिक्षक, कर्मचारी, सैनिक, किसान, व्यापारी — सभी देश की उन्नति में अपना योगदान देते हैं। लेकिन इन सबका योगदान तभी अर्थपूर्ण होता है जब देश का वातावरण शांत और सुरक्षित हो। कोई भी विकास तभी संभव है जब देश की सीमाएं सुरक्षित हों, जब देश के भीतर शांति हो। इसलिए इस समय जरूरी है कि हम राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें।

जब देश की रक्षा में लगे जवान अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं, तब हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने छोटे-छोटे हितों को भूलकर राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए काम करें। इस समय आंदोलन, धरना, प्रदर्शन का समय नहीं है। यह समय है देश के साथ खड़े होने का, आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का।

आज हमारे 27 भाई-बहन आतंकी हमले में शहीद हो गए। उनके घरों में मातम पसरा है। उनके परिवारों का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन परिवारों का दर्द समझना और उनके साथ खड़ा होना हम सबका नैतिक दायित्व है। जब देश पर हमला होता है तो वह केवल एक जगह या कुछ लोगों पर हमला नहीं होता, वह हम सब पर हमला होता है।

अटेवा द्वारा धरना स्थगित करने का निर्णय एक उदाहरण है कि कैसे देशहित को निजी मांगों से ऊपर रखा जा सकता है। हमें इस निर्णय से प्रेरणा लेकर हमेशा यह याद रखना चाहिए कि देश सबसे पहले है। अगर देश सुरक्षित है तो हम अपनी सभी मांगें भविष्य में पूरी कर सकते हैं। लेकिन अगर देश ही सुरक्षित नहीं रहा तो कोई आंदोलन, कोई मांग, कोई सुविधा बच नहीं पाएगी।

देशभक्ति केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी को झंडा फहराने से पूरी नहीं होती। असली देशभक्ति तो तब होती है जब हम कठिन समय में अपने निजी हितों को त्याग कर देश के साथ खड़े होते हैं। जब हम शहीदों के बलिदान को याद करते हैं और उनके सपनों का भारत बनाने के लिए काम करते हैं।

आज आतंकवाद केवल गोली चलाकर नहीं लड़ रहा, बल्कि वह हमारे समाज में डर फैलाकर हमें तोड़ने की कोशिश कर रहा है। अगर हम अपने छोटे-छोटे स्वार्थों में उलझकर एकता भूल जाएंगे तो आतंकवादी अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे। लेकिन अगर हम एकजुट रहेंगे, अपने मतभेदों को भूलकर देश के साथ खड़े रहेंगे तो कोई भी ताकत हमें हरा नहीं सकती।

पहलगाम के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनका बलिदान व्यर्थ न जाने दें। हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम हर परिस्थिति में देश को सर्वोपरि रखेंगे। देशहित में जो भी त्याग करना पड़े, हम करेंगे।

हमें यह भी समझना चाहिए कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई एक दिन की नहीं है। यह एक लंबी लड़ाई है जिसमें धैर्य, एकता और समर्पण की जरूरत है। हमें अपने सैनिकों, अपने सुरक्षाबलों पर भरोसा रखना चाहिए और उन्हें अपना पूर्ण समर्थन देना चाहिए।

जब देश सुरक्षित रहेगा, जब देश में अमन रहेगा, तब ही हम अपने हक और अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं। तब ही हम पेंशन बहाली की लड़ाई को भी सही तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।

आज का दिन हमें यह सिखाता है कि पहले देश, फिर अन्य मांगें। राष्ट्र सबसे पहले। व्यक्तिगत हित बाद में।

आइए, हम सब मिलकर पहलगाम के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें और यह संकल्प लें कि हम हर हाल में देश के साथ खड़े रहेंगे। हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहेंगे। हम अपने निजी स्वार्थों को देशहित के सामने छोटा मानेंगे।

भारत माता की जय! जय हिंद! वंदे मातरम्!



 

👉जनपद के भीतर BEO के बदले विकास खण्ड

https://www.updatemarts.com/2025/04/beo_28.html

👉हर सप्ताह परखी जाएगी विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता

👉समस्त डायट प्राचार्य, AD BASIC, BSA, BEO, DCs, SRG, ARP एवं शिक्षक संकुल कृपया ध्यान दें

👉95 हजार विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में शीघ्र जाएगी यूनिफॉर्म की रकम https://basicshikshakhabar.com/2025/04/ff-715/


 


टीचर्स सेल्फ केयर टीम का शानदार सहयोग अभियान: 20 दिवंगत परिवारों को 9.61 करोड़ से अधिक की मदद

 

                                              


शानदार, जबरदस्त, जिंदाबाद! सहयोग अलर्ट 62 के तहत एक बार फिर से मदद का रिकॉर्ड बन गया है। सम्मानित साथियों, आप सभी ने मिलकर जो कार्य किया है, वह वाकई में प्रशंसनीय है। आपने अपने 20 दिवंगत साथियों के परिवारों को 9 करोड़ 61 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि पहुँचाई है। प्रत्येक परिवार को औसतन 48 लाख रुपये से अधिक की मदद मिली है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा काम है। इस अद्भुत सहायता के लिए आप सभी दानवीर साथियों का दिल से हार्दिक धन्यवाद किया जाता है।

यह सब आपके अथक प्रयासों, समर्पण और सेवा भावना के कारण ही संभव हो पाया है। ब्लॉक टीमों ने स्थानीय स्तर पर सहयोग जुटाया, जिला टीमों ने समन्वय किया, रिसेट प्रभारी ने सभी जानकारी को एकत्रित कर सही दिशा में भेजा, प्रदेश आईटी सेल ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया, प्रदेश टीम ने पूरे अभियान को नेतृत्व दिया और सह संस्थापकों ने मार्गदर्शन किया। सभी की मेहनत और ईमानदारी से ही यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की गई।

इस पूरे अभियान के दौरान सभी सदस्यों ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर इरादा नेक हो और टीम भावना मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। दिवंगत साथियों के परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता पहुँचाकर आपने न सिर्फ उनकी आर्थिक परेशानी को कम किया बल्कि उन्हें यह भी अहसास कराया कि शिक्षक समाज उनके दुख में साथ खड़ा है।

सहयोग अलर्ट 62 का यह प्रयास एक प्रेरणा बन गया है। इससे पहले भी कई सहयोग कार्यक्रम चलाए गए थे, लेकिन इस बार जो समर्पण और उत्साह दिखा, वह अद्वितीय था। सभी दानदाता साथियों ने दिल खोलकर सहयोग किया, चाहे वह छोटा योगदान रहा हो या बड़ा। सबका उद्देश्य एक ही था — दिवंगत साथियों के परिवारों की मदद करना और उनका भविष्य सुरक्षित बनाना।

दान देने वालों में वरिष्ठ शिक्षक भी थे और नए शिक्षक भी। कुछ शिक्षकों ने अपनी एक महीने की तनख्वाह तक दान कर दी। कुछ साथियों ने अपने परिवार के सदस्यों से भी इस नेक कार्य के लिए सहयोग जुटाया। छात्र-छात्राओं ने भी अपने छोटे-छोटे दान से इस अभियान में भाग लिया। इस प्रकार यह अभियान जन-आंदोलन जैसा बन गया।

ब्लॉक टीमों ने गांव-गांव जाकर शिक्षकों से संपर्क किया, उन्हें इस अभियान की जानकारी दी और सहयोग के लिए प्रेरित किया। जिला टीमों ने पूरे जिले में विभिन्न स्तर पर बैठकों का आयोजन किया और दान एकत्र किया। रिसेट प्रभारियों ने तकनीकी रूप से हर जानकारी को सही समय पर सही स्थान तक पहुँचाया। प्रदेश आईटी सेल ने फंड एकत्र करने, रिकॉर्ड रखने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया। प्रदेश टीम ने लगातार निगरानी रखी और किसी भी समस्या को तुरंत सुलझाया। सह संस्थापकों ने दिशा और समर्थन देकर पूरे अभियान को गति दी।

इन सभी प्रयासों का नतीजा यह रहा कि बहुत कम समय में इतनी बड़ी सहायता राशि एकत्र की जा सकी। दिवंगत परिवारों को जब यह मदद पहुँची तो उनकी आँखों में आभार के आंसू थे। उन्होंने महसूस किया कि शिक्षक समाज उन्हें भूला नहीं है। यह सहायता केवल धनराशि नहीं थी, बल्कि प्यार, सम्मान और साथ का प्रतीक थी।

टीचर्स सेल्फ केयर टीम का यह प्रयास यह भी दिखाता है कि शिक्षकों में केवल पढ़ाई का ही नहीं, बल्कि सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी भाव होता है। सहयोग अलर्ट 62 से यह सिद्ध हुआ कि शिक्षक समुदाय जब ठान ले तो असंभव को भी संभव कर सकता है।

यह सहायता अभियान न केवल एक आर्थिक सहयोग था बल्कि एक सामाजिक संदेश भी था कि दुःख की घड़ी में हम अपने साथियों को अकेला नहीं छोड़ते। जब एक परिवार पर दुख आता है तो पूरा शिक्षक समाज उसे अपने परिवार जैसा समझता है और उसे सहारा देता है।

यह अभियान भविष्य में भी प्रेरणा का स्रोत रहेगा। टीचर्स सेल्फ केयर टीम ने यह निर्णय लिया है कि इस प्रकार के सहयोग अलर्ट आगे भी जारी रहेंगे। हर वर्ष दिवंगत साथियों के परिवारों के लिए विशेष सहायता कार्यक्रम चलाए जाएंगे ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। इसके लिए एक स्थायी राहत कोष भी बनाने की योजना है जिसमें सभी शिक्षक नियमित रूप से योगदान देंगे।

भविष्य में जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। बीमार परिवारजनों के लिए स्वास्थ्य बीमा सहायता की भी व्यवस्था की जाएगी। मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श सेवाएँ भी शुरू की जाएँगी ताकि परिवारजनों को भावनात्मक सहारा मिल सके।

यह पूरा अभियान एकता, समर्पण और सहयोग की मिसाल बन गया है। इसने यह दिखा दिया कि जब हम सब मिलकर चलते हैं तो कोई भी बाधा हमारे रास्ते को नहीं रोक सकती।

सहयोग अलर्ट 62 में मिली सफलता के बाद सभी टीमों ने तय किया है कि अब हर ब्लॉक, हर जिला और हर प्रदेश स्तर पर सहयोग समितियाँ बनाई जाएंगी जो समय-समय पर सहयोग एकत्र करेंगी और जरूरतमंदों तक पहुँचाएंगी।

टीचर्स सेल्फ केयर टीम का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं है, बल्कि दिवगंत परिवारों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना है। उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि शिक्षक समाज उनका हमेशा साथ देगा।

इस अभियान में शामिल हर शिक्षक, हर दानदाता, हर ब्लॉक टीम, जिला टीम, रिसेट प्रभारी, प्रदेश आईटी सेल, प्रदेश टीम और सह संस्थापक एक सच्चे नायक हैं। आप सभी ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाएगा।

सहयोग अलर्ट 62 के तहत जितनी बड़ी राशि एकत्र हुई, वह सिर्फ संख्या नहीं है। वह हर उस भावना का प्रतीक है जो आपने अपने दिवंगत साथियों के लिए दिखाई है। यह विश्वास का प्रतीक है, सेवा भाव का प्रतीक है और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।

आप सभी का समर्पण और सहयोग एक मिसाल बन चुका है। आपने यह दिखाया है कि शिक्षक केवल किताबों के पाठ नहीं पढ़ाते, बल्कि सेवा, करुणा और भाईचारे का पाठ भी पढ़ाते हैं। आपने यह दिखाया कि शिक्षकों का समाज सच्चे अर्थों में एक परिवार है।

भविष्य में भी इसी भावना के साथ हम सब मिलकर आगे बढ़ेंगे। हम हर जरूरतमंद साथी और उनके परिवार के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।

एक बार फिर से आप सभी दानवीरों को, ब्लॉक टीमों को, जिला टीमों को, रिसेट प्रभारियों को, प्रदेश आईटी सेल को, प्रदेश टीम को और सह संस्थापकों को हार्दिक धन्यवाद और साधुवाद।

आप सभी के सहयोग और समर्पण से ही यह ऐतिहासिक कार्य संभव हो पाया है।

आप सभी को एक बार फिर से दिल से धन्यवाद!

शानदार! जबरदस्त! जिंदाबाद!

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