शिक्षक समस्याओं पर महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश की महानिदेशक स्कूल शिक्षा श्रीमती कंचन वर्मा जी से विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह चर्चा शिक्षक समाज के लिए अत्यंत लाभकारी रही। बैठक में प्रमुख रूप से छह बिंदुओं पर बात हुई, जिनमें से प्रत्येक बिंदु पर महानिदेशक महोदय ने या तो सहमति व्यक्त की या त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया। इस प्रकार की पारदर्शी और समस्या-समाधान वाली चर्चा शिक्षक समुदाय में एक सकारात्मक संदेश देती है। नीचे दिए गए बिंदुओं के अनुसार चर्चा का सार इस प्रकार है:
1. प्रोन्नति वेतनमान: शिक्षकों द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही थी कि उन्हें प्रोन्नति (पदोन्नति) का लाभ समय से मिले। इस विषय में महानिदेशक महोदय ने बताया कि शासन स्तर पर सहमति बन चुकी है और बहुत जल्द इसका आदेश जारी कर दिया जाएगा। इसके साथ ही मानव सम्पदा पोर्टल पर प्रोन्नति वेतनमान की सुविधा भी जोड़ दी जाएगी ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल रूप से सुचारू हो सके। यह भी स्पष्ट किया गया कि बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य को रोकने के कोई निर्देश नहीं हैं, और वे पात्र शिक्षकों के वेतनमान की कार्यवाही निर्बाध रूप से जारी रखें।
2. पदोन्नति नीति: शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इस विषय पर महानिदेशक महोदया ने बताया कि वह स्वयं इस विषय पर प्रयासरत हैं और बीच का व्यावहारिक रास्ता निकालने की कोशिश कर रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में जल्द ही सकारात्मक बदलाव संभव हैं।
3. अंतर जनपदीय स्थानांतरण: पारस्परिक स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट किया गया कि यह प्रक्रिया गतिमान है यानी चल रही है। इसके अतिरिक्त सामान्य स्थानांतरण नीति को लेकर बताया गया कि विभागीय प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और उम्मीद है कि सामान्य अंतर जनपदीय स्थानांतरण का शासनादेश भी शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा। इससे शिक्षकों में स्थानांतरण को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो सकती है।
4. पुरानी पेंशन योजना: बीटीसी 2001, विशिष्ट बीटीसी 2004, बीटीसी 2004 उर्दू जैसे बैचों के शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन की मांग पर भी बात हुई। महानिदेशक महोदय ने बताया कि यह विषय प्रक्रिया में है और इसके परिणाम सकारात्मक नजर आ रहे हैं। यदि यह मांग पूरी होती है तो हजारों शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता मिलेगी।
5. विद्यालय समय में परिवर्तन: गर्मी के मौसम को देखते हुए विद्यालयों के समय में बदलाव की मांग की जा रही थी। इस पर महानिदेशक महोदय ने बताया कि यू-डायस पोर्टल पर बहुत से आंकड़े अभी तक अपूर्ण हैं, इसलिए शिक्षकों को उपस्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जिला अधिकारियों को यह अधिकार दे दिया गया है कि वे स्थानीय तापमान के अनुसार विद्यालय समय में बदलाव कर सकते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह बताई गई कि परिषदीय विद्यालयों में इस बार लगभग पाँच लाख बच्चों का नामांकन कम हुआ है। यदि शिक्षकगण इस वर्ष नामांकन बढ़ाने में सहयोग करते हैं, तो निश्चित रूप से अगली बार समय में कटौती पर विचार किया जाएगा।
6. हाथरस प्रकरण: हाथरस के जिला समन्वयक अशोक चौधरी के विरुद्ध शिक्षकों की शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया। उनके विरुद्ध एक जांच समिति गठित की गई है जो पूरी जांच करेगी। साथ ही उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का आश्वासन भी दिया गया है। यह कार्रवाई शिक्षक समुदाय में अनुशासन और पारदर्शिता की भावना को बढ़ाएगी।
इन सभी बिंदुओं के बाद वरिष्ठ विशेषज्ञ और AD बेसिक श्री तिवारी जी से भी मुलाकात हुई। इस बैठक में भी शिक्षकों से संबंधित कई विषयों पर सकारात्मक वार्ता हुई और समाधान के विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया। यह प्रयास न केवल शिक्षकों की समस्याओं को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी दिखाता है कि शासन स्तर पर शिक्षकों की बात सुनी जा रही है और उचित कार्यवाही भी की जा रही है।
इस पूरी बैठक का सार यही है कि उत्तर प्रदेश के शिक्षक अब अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर सजग और संगठित हैं। शासन और शिक्षा विभाग भी अब शिक्षकों की बातों को गंभीरता से ले रहे हैं और उचित समय पर आवश्यक निर्णय ले रहे हैं। यदि इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रही, तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।