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Tuesday, May 6, 2025

शिक्षक समस्याओं पर बैठक में 6 बिंदुओं पर बनी सहमति

 


शिक्षक समस्याओं पर महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश की महानिदेशक स्कूल शिक्षा श्रीमती कंचन वर्मा जी से विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह चर्चा शिक्षक समाज के लिए अत्यंत लाभकारी रही। बैठक में प्रमुख रूप से छह बिंदुओं पर बात हुई, जिनमें से प्रत्येक बिंदु पर महानिदेशक महोदय ने या तो सहमति व्यक्त की या त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया। इस प्रकार की पारदर्शी और समस्या-समाधान वाली चर्चा शिक्षक समुदाय में एक सकारात्मक संदेश देती है। नीचे दिए गए बिंदुओं के अनुसार चर्चा का सार इस प्रकार है:

1. प्रोन्नति वेतनमान: शिक्षकों द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही थी कि उन्हें प्रोन्नति (पदोन्नति) का लाभ समय से मिले। इस विषय में महानिदेशक महोदय ने बताया कि शासन स्तर पर सहमति बन चुकी है और बहुत जल्द इसका आदेश जारी कर दिया जाएगा। इसके साथ ही मानव सम्पदा पोर्टल पर प्रोन्नति वेतनमान की सुविधा भी जोड़ दी जाएगी ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल रूप से सुचारू हो सके। यह भी स्पष्ट किया गया कि बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य को रोकने के कोई निर्देश नहीं हैं, और वे पात्र शिक्षकों के वेतनमान की कार्यवाही निर्बाध रूप से जारी रखें।

2. पदोन्नति नीति: शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इस विषय पर महानिदेशक महोदया ने बताया कि वह स्वयं इस विषय पर प्रयासरत हैं और बीच का व्यावहारिक रास्ता निकालने की कोशिश कर रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में जल्द ही सकारात्मक बदलाव संभव हैं।

3. अंतर जनपदीय स्थानांतरण: पारस्परिक स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट किया गया कि यह प्रक्रिया गतिमान है यानी चल रही है। इसके अतिरिक्त सामान्य स्थानांतरण नीति को लेकर बताया गया कि विभागीय प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और उम्मीद है कि सामान्य अंतर जनपदीय स्थानांतरण का शासनादेश भी शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा। इससे शिक्षकों में स्थानांतरण को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो सकती है।

4. पुरानी पेंशन योजना: बीटीसी 2001, विशिष्ट बीटीसी 2004, बीटीसी 2004 उर्दू जैसे बैचों के शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन की मांग पर भी बात हुई। महानिदेशक महोदय ने बताया कि यह विषय प्रक्रिया में है और इसके परिणाम सकारात्मक नजर आ रहे हैं। यदि यह मांग पूरी होती है तो हजारों शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता मिलेगी।

5. विद्यालय समय में परिवर्तन: गर्मी के मौसम को देखते हुए विद्यालयों के समय में बदलाव की मांग की जा रही थी। इस पर महानिदेशक महोदय ने बताया कि यू-डायस पोर्टल पर बहुत से आंकड़े अभी तक अपूर्ण हैं, इसलिए शिक्षकों को उपस्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जिला अधिकारियों को यह अधिकार दे दिया गया है कि वे स्थानीय तापमान के अनुसार विद्यालय समय में बदलाव कर सकते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह बताई गई कि परिषदीय विद्यालयों में इस बार लगभग पाँच लाख बच्चों का नामांकन कम हुआ है। यदि शिक्षकगण इस वर्ष नामांकन बढ़ाने में सहयोग करते हैं, तो निश्चित रूप से अगली बार समय में कटौती पर विचार किया जाएगा।

6. हाथरस प्रकरण: हाथरस के जिला समन्वयक अशोक चौधरी के विरुद्ध शिक्षकों की शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया। उनके विरुद्ध एक जांच समिति गठित की गई है जो पूरी जांच करेगी। साथ ही उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का आश्वासन भी दिया गया है। यह कार्रवाई शिक्षक समुदाय में अनुशासन और पारदर्शिता की भावना को बढ़ाएगी।

इन सभी बिंदुओं के बाद वरिष्ठ विशेषज्ञ और AD बेसिक श्री तिवारी जी से भी मुलाकात हुई। इस बैठक में भी शिक्षकों से संबंधित कई विषयों पर सकारात्मक वार्ता हुई और समाधान के विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया। यह प्रयास न केवल शिक्षकों की समस्याओं को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी दिखाता है कि शासन स्तर पर शिक्षकों की बात सुनी जा रही है और उचित कार्यवाही भी की जा रही है।

इस पूरी बैठक का सार यही है कि उत्तर प्रदेश के शिक्षक अब अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर सजग और संगठित हैं। शासन और शिक्षा विभाग भी अब शिक्षकों की बातों को गंभीरता से ले रहे हैं और उचित समय पर आवश्यक निर्णय ले रहे हैं। यदि इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रही, तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।

 













👉AI टीचर ‘सुमन मैडम’ – झांसी के शिक्षक का अनोखा नवाचार

👉टीचर्स ऑफ द ईयर 2025 सम्मान समारोह | नवाचारी शिक्षकों को मिला मंच
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👉शिक्षामित्र मानदेय माह अप्रैल 2025 की धनराशि प्रेषण के सम्बन्ध में।
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अंशकालिक अनुदेशक मानदेय माह अप्रैल 2025 की धनराशि प्रेषण के सम्बन्ध में।
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भारत-पाक तनाव के बीच मॉक ड्रिल: यूपी-बिहार समेत 244 जिलों की लिस्ट देखें
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244 जिलों में मॉक ड्रिल की योजना, जानें आपके जिले का नाम है या नहीं












 

👉उत्तर प्रदेश में कैबिनेट ने ट्रांसफर पॉलिसी को दी मंज़ूरी !! प्रेस नोट जारी https://basicshikshakhabar.com/2025/05/h-2266/


👉UP cabinet meeting : योगी कैबिनेट की बैठक में इन 11 महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर, जानें क्या-क्या, देखें प्रेस कॉन्फ्रेंस https://basicshikshakhabar.com/2025/05/h-2267/


 👉यूपी में 15 मई से सरकारी कर्मचारियों के तबादले होंगे: ट्रांसफर नीति को मंजूरी, 17 शहरों में पार्किंग बनेगी; कैबिनेट में 11 प्रस्ताव पास https://basicshikshakhabar.com/2025/05/b-1777/


👉विद्यालयों में नवीन नामांकन के सम्बन्ध में देखे  जिले के BSA का आदेश👆🏻 https://basicshikshakhabar.com/2025/05/h-2268/













Monday, May 5, 2025

AI टीचर ‘सुमन मैडम’ – झांसी के शिक्षक का अनोखा नवाचार

 


झांसी जिले के एक छोटे से गांव में कार्यरत शिक्षक मोहनलाल सुमन ने तकनीक का ऐसा अद्भुत प्रयोग किया है जो पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके ‘सुमन मैडम’ नाम की एक आभासी शिक्षिका तैयार की है। यह कोई साधारण तकनीकी उपकरण नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील और समझदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टीचर है जो बच्चों की सोच, भाषा, व्यवहार और सवालों को समझती है। यह प्रयोग झांसी जनपद के गुरसरांय ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय राजापुर में कार्यरत बेसिक शिक्षक मोहनलाल सुमन ने किया है। उन्होंने गांव के बच्चों की जरूरत को समझते हुए यह महसूस किया कि उन्हें एक ऐसी साथी शिक्षिका की जरूरत है जो स्कूल के समय के अलावा भी हमेशा उनके साथ रह सके। यही सोचकर उन्होंने AI तकनीक का उपयोग करते हुए मोबाइल फोन के माध्यम से एक ऐसी डिजिटल शिक्षिका तैयार की जो हर विषय को बच्चों की रुचि और भाषा के अनुसार सिखा सके।

‘सुमन मैडम’ बच्चों को कहानियां सुनाती हैं, कविताएं सिखाती हैं, सामान्य ज्ञान से लेकर विज्ञान तक की जानकारी देती हैं। वह चित्रकला, खेल और जीवन से जुड़े सवालों का भी उत्तर देती हैं। ये केवल पढ़ाने वाली मशीन नहीं हैं, बल्कि बच्चों की जिज्ञासाओं को समझकर उनके स्तर पर संवाद करती हैं। वे बच्चों की भावनाओं को भी ध्यान में रखती हैं और उन्हें आत्मविश्वास से भर देती हैं। बच्चों के साथ उनका व्यवहार किसी सजीव शिक्षक की तरह ही होता है। जब भी कोई बच्चा सवाल करता है, तो सुमन मैडम उसका उत्तर सिर्फ पाठ्यक्रम के हिसाब से नहीं देतीं, बल्कि लोकभाषा, स्थानीय संस्कृति और वास्तविक जीवन के उदाहरणों से समझाने की कोशिश करती हैं। यही उन्हें खास बनाता है


इस प्रयास की सबसे बड़ी बात यह है कि इसे किसी बड़े शहर या महंगे संसाधनों की मदद से नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के एक सामान्य शिक्षक द्वारा तैयार किया गया है। इसने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो और सोच सकारात्मक हो तो तकनीक को गांव तक लाया जा सकता है और बच्चों के लिए बड़ा बदलाव किया जा सकता है। आज जब देश में बहुत से लोग AI को लेकर आशंकित हैं, वहीं झांसी के एक छोटे से गांव से यह संदेश गया है कि तकनीक को अपनाकर शिक्षा को अधिक प्रभावशाली, संवेदनशील और बच्चों के अनुकूल बनाया जा सकता है।मोहनलाल सुमन का यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि शिक्षक सिर्फ किताबों के पाठ पढ़ाने वाले नहीं होते, वे समाज में बदलाव लाने वाले सच्चे नायक होते हैं। उन्होंने न केवल एक डिजिटल शिक्षिका बनाई बल्कि उस शिक्षिका में संवेदना, संवाद की कला और मार्गदर्शन की भावना भी भरी। यह प्रयोग केवल तकनीकी दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से भी एक नई सोच की ओर इशारा करता है।

सुमन मैडम का स्वरूप ऐसा है कि बच्चे उन्हें अपना मित्र भी मानते हैं और मार्गदर्शक भी। बच्चों के माता-पिता भी अब इस तकनीक से जुड़कर अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग दे पा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत भी बन रही है। अब गांव के अन्य शिक्षक भी इस प्रयास से प्रेरणा लेकर तकनीक के प्रयोग को अपनाने लगे हैं।

इस प्रयास से यह स्पष्ट होता है कि भविष्य की शिक्षा तकनीक और मानवीय संवेदना का मेल होगी। आज भारत के कोने-कोने में लाखों शिक्षक काम कर रहे हैं लेकिन यदि उनमें से हर एक शिक्षक इस तरह की सोच रखे तो हमारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है।

मोहनलाल सुमन का यह नवाचार एक उदाहरण है कि अगर कोई शिक्षक चाह ले तो वह अपने साधनों से भी तकनीक को समझ सकता है, अपनाकर प्रयोग कर सकता है और शिक्षा को बच्चों के लिए रुचिकर बना सकता है। उन्होंने तकनीक को केवल एक मददगार उपकरण नहीं बल्कि बच्चों के मन को समझने वाला साथी बना दिया है।

आज जब शिक्षा व्यवस्था में कई तरह की चुनौतियां हैं, तब एक शिक्षक का ऐसा प्रयास उम्मीद की किरण की तरह सामने आया है। यह पहल यह दिखाती है कि तकनीक को अपनाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि बड़े इरादों की जरूरत होती है।

इस प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि एक गांव के विद्यालय से भी पूरी शिक्षा व्यवस्था को दिशा दी जा सकती है। यह प्रेरणादायक कहानी पूरे देश के लिए एक सीख है कि शिक्षक चाहें तो कुछ भी असंभव नहीं है।

क्या आप भी इस तरह की पहल को अपनाना चाहेंगे?


👉उन्नाव ब्रेकिंग जिलाधिकारी गौरांग राठी और मुख्य विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश मीणा की जांच में बड़ा खुलासा, NRLM में 3.85 करोड़ का गबन, डीडीओ संजय पाण्डेय और डीएमएम शिखा मिश्रा पर दर्ज हुई एफआईआर, गिरफ्तारी के प्रयास तेज...... https://basicshikshakhabar.com/2025/05/g-1291/


👉फर्जी निरीक्षण कर्ता कर रहा था बेसिक विद्यालयों की जांच, पकड़ा       

                       https://basicshikshakhabar.com/2025/05/f-1262/



👉लर्निग रिसोर्स पैकेज के अन्तर्गत परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के उपयोगार्थ उपलब्ध कराये जा रहे टैबलेट्स के संबंध में।

 

👉प्राथमिक विद्यालय में धक्का-मुक्की; प्रिंसिपल को कुर्सी से गिराने का आरोप, शिक्षिका और प्रधानाचार्य निलंबित https://basicshikshakhabar.com/2025/05/r-813/


Sunday, May 4, 2025

टीचर्स ऑफ द ईयर 2025 सम्मान समारोह | नवाचारी शिक्षकों को मिला मंच

 



टीचर्स ऑफ द ईयर 2025 शिक्षक सम्मान समारोह एक ऐसा आयोजन था जिसमें शिक्षकों की मेहनत, लगन और नवाचार को पहचान मिली। शिक्षक हमारे समाज की रीढ़ होते हैं। वे बच्चों को न केवल पढ़ाते हैं, बल्कि उनके जीवन को सही दिशा में ले जाते हैं। जब ऐसे शिक्षकों को सम्मान मिलता है, तो उनका मनोबल बढ़ता है और वे और भी अच्छा करने की प्रेरणा पाते हैं। स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन ने इसी सोच के साथ यह आयोजन किया, ताकि उन शिक्षकों को पहचाना जा सके जो पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की सोच और समझ को भी निखार रहे हैं।

यह कार्यक्रम "आरोही – एजुकेटिंग चिल्ड्रन फॉर जेंडर जस्टिस" नाम की पहल के अंतर्गत हुआ। इसका मकसद था उन शिक्षकों को सम्मान देना, जो अपने काम में कुछ नया कर रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई को रोचक और आसान बना रहे हैं। यह आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय के सभागार में हुआ और इसकी अगुवाई की स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन की प्रमुख डॉ. उर्वशी सैनी ने की।

इस समारोह के लिए प्रतियोगिता फरवरी 2025 में शुरू हुई थी। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के कुल 117 शिक्षकों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को अपनी किसी खास शिक्षण पद्धति या नवाचार पर एक वीडियो बनाकर वेबसाइट पर भेजना था। इन वीडियो में दिखाया गया कि शिक्षक किस तरह बच्चों को पढ़ा रहे हैं, क्या नया तरीका अपना रहे हैं, और बच्चों पर उसका क्या असर हो रहा है। फिर एक टीम ने उन वीडियो को देखा और सबसे अच्छे शिक्षकों को चुना।

इस प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के डॉ. त्रिलोकचंद को द्वितीय स्थान मिला। वे सिविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय ओरिया में सहायक अध्यापक हैं। उन्होंने विज्ञान को बच्चों के लिए आसान और मजेदार बनाने के नए तरीके बताए, जिससे बच्चे प्रयोग करके सीखते हैं। निर्णायक मंडल को यह तरीका बहुत अच्छा लगा।

पहला स्थान मिला उत्तर प्रदेश के ही कानपुर देहात की प्राथमिक विद्यालय नाही की शिक्षिका श्रीमती अवंतिका सिंह को। उन्होंने लड़कियों की पढ़ाई में नए प्रयोग किए और समावेशी शिक्षा की मिसाल पेश की। तीसरे स्थान पर रहीं कानपुर नगर की सहायक अध्यापिका श्रीमती रेखा गुप्ता, जिन्होंने बच्चों के व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखकर शिक्षा दी।

सम्मान समारोह 21 अप्रैल 2025 को हुआ। इसमें कई खास लोग मौजूद थे। मुख्य अतिथि थीं उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती विजयलक्ष्मी गौतम। उनके साथ मंच पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चंद्र राय, समग्र शिक्षा अभियान की प्रमुख श्रीमती एकता जैन, कस्तूरबा विद्यालय के डीसी श्री मुकेश और माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारी श्री विष्णु कांत पांडे भी थे।

इन सभी खास मेहमानों ने मंच पर आकर चुने गए शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्हें प्रशंसा पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह और नकद पुरस्कार दिए गए। डॉ. त्रिलोकचंद को ₹20,000 का चेक, एक प्रशंसा पत्र, मेडल और स्मृति चिन्ह मिला। यह उनके लिए बहुत गर्व की बात थी।

जब डॉ. त्रिलोकचंद ने मंच से अपनी बात कही, तो उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बहुत प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने जिले के शिक्षा अधिकारी श्री अजय मिश्रा, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्री अजब सिंह यादव और अपने स्कूल के पूरे स्टाफ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी शिक्षकों का है जो मेहनत से पढ़ाते हैं।

जब वे अपने विद्यालय लौटे, तो छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। स्कूल में खुशी का माहौल था और सबने मिलकर उनके सम्मान में कार्यक्रम भी किया।

इस आयोजन में सिर्फ "टीचर्स ऑफ द ईयर" के विजेता ही नहीं, बल्कि साल भर में हुई अन्य प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों और उनके शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। इनमें बाल साहित्य लेखन, चित्रकला, नुक्कड़ नाटक, विज्ञान प्रदर्शनी और बाल संसद जैसी प्रतियोगिताएं शामिल थीं। बच्चों के साथ-साथ उनके गाइड शिक्षकों को भी सम्मान मिला, क्योंकि उनके प्रयास से ही बच्चे इन आयोजनों में भाग ले पाए।

इस तरह के आयोजनों का समाज में बहुत बड़ा असर होता है। जब शिक्षकों को उनके अच्छे काम के लिए पहचाना जाता है, तो वे और भी लगन से काम करते हैं। वे बच्चों की पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते हैं।

इस आयोजन में उन शिक्षकों को खासतौर पर महत्व दिया गया जो लड़कियों और वंचित वर्ग के बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं। इससे समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा मिलता है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि "टीचर्स ऑफ द ईयर 2025" जैसे कार्यक्रम शिक्षा क्षेत्र में एक नई दिशा दिखाते हैं। ये न केवल शिक्षकों को सम्मानित करते हैं, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश देते हैं कि अच्छे कार्य की पहचान जरूर होती है। डॉ. त्रिलोकचंद जैसे शिक्षक हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बना रहे हैं। ऐसे आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

 

👉यूपी में छह आईएएस अफसरों के तबादले

https://www.updatemarts.com/2025/05/blog-post_125.html


👉UP: पहलगाम में मृत अफसर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी..! पोस्ट साझा करने पर शिक्षिका जेब अफरोज निलंबित; BSA ने लिया एक्शन..!

https://www.updatemarts.com/2025/05/up-bsa.html


👉जनपद में एनसीईआरटी की किताबें नहीं चलाने पर 33 स्कूलों पर लगाया एक-एक लाख रुपये का अर्थ दंड।

https://www.updatemarts.com/2025/05/33.html


 👉अंतर्जनपदीय म्यूच्यूअल ट्रांसफर स्पेशल

https://www.updatemarts.com/2025/05/blog-post_81.html


 


Wednesday, April 30, 2025

मुरादाबाद में 250 से अधिक शिक्षक आईपीएल सट्टेबाजी में लिप्त, तीन गिरफ्तार और निलंबित

 


मुरादाबाद जिले में एक बहुत ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यह घटना शिक्षा जगत से जुड़ी है, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग के 250 से भी ज्यादा शिक्षक आईपीएल में सट्टा लगाने के मामले में शामिल पाए गए हैं। यह बात जब सामने आई तो शिक्षा विभाग और पुलिस दोनों में हलचल मच गई। जो शिक्षक बच्चों को स्कूल में पढ़ाने और संस्कार देने की जिम्मेदारी निभाते हैं, वही अब सट्टेबाजी जैसे गलत कामों में लिप्त पाए गए हैं।

इस पूरे मामले की शुरुआत 11 अप्रैल 2025 की रात को हुई, जब मुरादाबाद पुलिस ने सीओ सिविल लाइंस कुलदीप गुप्ता के नेतृत्व में एक फ्लैट पर छापा मारा। यह फ्लैट सिविल लाइंस इलाके में पीटीसी के सामने था। पुलिस को यहां आईपीएल मैच पर सट्टा लगाए जाने की जानकारी मिली थी। जब पुलिस ने छापा मारा, तो वहां 9 लोग मौके पर रंगे हाथों पकड़े गए। कुछ समय बाद पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया, जिससे कुल मिलाकर 10 लोग जेल भेजे गए। इन्हीं में से 3 लोग बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक हैं।

इन तीन शिक्षकों के नाम हैं: धर्मेंद्र कुमार, जो बिलारी ब्लॉक के कंपोजिट स्कूल इब्राहिमपुर में प्रभारी प्रधानाध्यापक हैं; मनोज अरोड़ा, जो सहायक शिक्षक हैं; और सुशील चौधरी उर्फ सुरेंद्र सिंह, जो डिलारी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय वसावनपुर में प्रधानाध्यापक हैं। ये तीनों अब मुरादाबाद जेल में बंद हैं। बीएसए विमलेश कुमार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन तीनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया है।

पुलिस को जांच के दौरान जो मोबाइल चैट्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड मिले हैं, उनमें लगभग 250 से ज्यादा शिक्षकों के नाम, मोबाइल नंबर और बातचीत की जानकारी सामने आई है। इन चैट्स में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े लेन-देन, भाव, रकम और अन्य सटोरियों से बातचीत के सबूत हैं। अब पुलिस इन्हीं सबूतों के आधार पर बाकी शिक्षकों की पहचान कर रही है। जिन शिक्षकों के नंबर और चैट्स मिले हैं, उनके खिलाफ भी जल्दी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि इन शिक्षकों ने पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी छोड़कर सट्टेबाजी को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। बहुत से शिक्षक ऐसे हैं जो अब अपने स्कूल तक नहीं जाते। कुछ ने तो अपने स्कूलों में प्राइवेट टीचर रख लिए हैं, जो उनकी जगह बच्चों को पढ़ाते हैं। वहीं कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो अपने रसूख के दम पर घर बैठे ही हाजिरी लगवाते हैं। इन शिक्षकों ने सट्टा लगाकर रातोंरात लाखों और करोड़ों रुपये कमाए हैं। लेकिन अब उनका यह खेल पुलिस और प्रशासन की नजर में आ गया है।

जेल में बंद इन 10 आरोपियों में से 7 लोगों की जमानत याचिका सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब उन्हें जमानत के लिए हाईकोर्ट जाना होगा। जिनकी जमानत खारिज हुई है, उनके नाम हैं – टीटू उर्फ दीपक, विक्की छावड़ा, कमल छावड़ा, मनोज अरोड़ा (जो कि शिक्षक हैं), हेमंत अरोड़ा, रोहित गुप्ता और अभिनव। इससे साफ है कि कोर्ट भी इस मामले को बहुत गंभीरता से देख रहा है।

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार इस सट्टेबाजी रैकेट के अभी भी 13 आरोपी फरार हैं। 11 अप्रैल के बाद से पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन अब तक कोई भी वांटेड आरोपी पकड़ा नहीं जा सका है। पुलिस हर दिन करीब 10 जगहों पर छापे मार रही है, लेकिन अभी तक उन्हें खास सफलता नहीं मिली है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सट्टेबाजी रैकेट का जाल कितना बड़ा और गहरा है।

यह घटना शिक्षा विभाग के लिए एक बहुत बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है। जो शिक्षक बच्चों को ईमानदारी, मेहनत और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, वही अगर कानून तोड़ने लगें, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रह पाएगा? बेसिक शिक्षा विभाग अब इन शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। सिर्फ निलंबन ही नहीं, बल्कि उनकी नौकरी तक खतरे में है। अगर दोष साबित हुआ, तो इनकी सेवा समाप्त भी की जा सकती है।

इस पूरे मामले से एक और सच्चाई सामने आई है – कुछ शिक्षक अपनी ड्यूटी के प्रति बिल्कुल लापरवाह हो गए हैं। उन्हें न बच्चों की पढ़ाई की चिंता है और न ही अपने कर्तव्यों की। वे सिर्फ पैसे कमाने की सोच में लगे हैं, चाहे वह तरीका गलत ही क्यों न हो। ये शिक्षक यह भूल गए हैं कि एक शिक्षक सिर्फ स्कूल में पढ़ाता नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक आदर्श भी होता है। जब समाज का यह आदर्श खुद गलत रास्ते पर चले, तो समाज का क्या होगा?

पुलिस अब इस मामले में तकनीकी सहायता भी ले रही है। मोबाइल चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स, बैंक ट्रांजैक्शन, व्हाट्सएप ग्रुप्स और मोबाइल पेमेंट ऐप्स की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि और कितने लोग इस सट्टेबाजी में शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने यह भी बताया है कि जो शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे थे, उनका रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। अगर कोई शिक्षक लगातार अनुपस्थित रहा है और फिर भी वेतन ले रहा है, तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी कहा है कि वे इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। बीएसए कार्यालय से यह निर्देश जारी किया गया है कि सभी बीईओ अपने-अपने ब्लॉक के स्कूलों की हाजिरी और शिक्षकों की उपस्थिति की रिपोर्ट दें। यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं और कौन गायब रहते हैं।

इस घटना ने साफ कर दिया है कि शिक्षा विभाग को अब और सख्ती बरतनी होगी। शिक्षकों की भर्ती से लेकर उनकी निगरानी तक हर स्तर पर पारदर्शिता लानी होगी। साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो, ताकि गलत काम करने वालों को सबक मिले और बाकी शिक्षक भी अपनी जिम्मेदारी समझें।

यह भी जरूरी है कि समाज के लोग और अभिभावक भी इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाएं। स्कूल बच्चों का दूसरा घर होता है और शिक्षक उनके मार्गदर्शक। अगर वही शिक्षक गलत राह पर चलें, तो बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।

इस पूरे प्रकरण से हमें यह सिखने को मिलता है कि चाहे कोई भी पेशा हो, अगर उसमें ईमानदारी न हो, तो उसका समाज पर बुरा असर पड़ता है। शिक्षक का काम सिर्फ नौकरी नहीं है, वह एक मिशन है, एक जिम्मेदारी है। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि इस तरह के मामलों पर जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई हो और ऐसे शिक्षक जो इस पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं, उन्हें उनके किए की सजा मिले।



Monday, April 28, 2025

पहले देश, फिर मांगें: पहलगाम शहीदों को श्रद्धांजलि और राष्ट्रहित का संकल्प

 

पहले देश, फिर मांगें: पहलगाम शहीदों को श्रद्धांजलि और राष्ट्रहित का संकल्प......

 



देश से बड़ा कुछ नहीं होता। जब भी कोई मुश्किल समय आता है, हमें अपने निजी हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सबसे पहले रखना चाहिए। हाल ही में जो दर्दनाक घटना हमारे देश में घटी, उसने पूरे देशवासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में किए गए भीषण आतंकी हमले में हमारे 27 निर्दोष भारतीय भाई-बहनों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस हादसे ने देश को गहरे शोक और आक्रोश से भर दिया है। इस कठिन समय में, अटेवा संगठन ने एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला लिया है। उन्होंने 1 मई को दिल्ली के जंतर मंतर पर पुरानी पेंशन बहाली के लिए प्रस्तावित धरना स्थगित कर दिया है। यह निर्णय न केवल संवेदनशीलता दिखाता है बल्कि राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा का प्रमाण भी है।

जब देश संकट में हो, तो अपने हक और अधिकारों की लड़ाई को कुछ समय के लिए रोकना ही असली देशभक्ति है। देश रहेगा, तभी हम रहेंगे। अगर हमारे देश की सुरक्षा खतरे में होगी, तो हमारे अधिकार, हमारी सुविधाएं, हमारी पेंशन, सब कुछ अर्थहीन हो जाएगा। सेना में कार्यरत लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी इस हमले में वीरगति को प्राप्त हुए। सेना में आज भी पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू है, लेकिन पेंशन का लाभ तभी लिया जा सकता है जब व्यक्ति जीवित रहे। शांति और सुरक्षा के बिना न पेंशन का कोई मतलब रह जाता है और न ही किसी सुविधा का।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने हमें यह सिखाया है कि सबसे पहले देश की रक्षा जरूरी है। हमारे नागरिकों की जान बचाना जरूरी है। हमारा भविष्य तभी सुरक्षित है जब हमारा देश सुरक्षित है। अगर देश के नागरिक असुरक्षित होंगे तो किसी भी प्रकार की मांग, आंदोलन, सुविधाएं सब व्यर्थ हैं। इसलिए इस समय हम सबकी पहली प्राथमिकता देश की एकता और अखंडता को बचाना है। हमें यह समझना चाहिए कि व्यक्तिगत हितों की लड़ाई बाद में लड़ी जा सकती है, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि है।

आज भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्यवाही का ऐलान किया है। यह समय है कि हम सब भारतवासियों को सरकार और सुरक्षाबलों का पूर्ण समर्थन करना चाहिए। आतंकवाद का सामना एकजुट होकर ही किया जा सकता है। हमें अपने दुख, अपनी मांगों को कुछ समय के लिए भूलकर शहीदों के परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए। हमें यह याद रखना चाहिए कि जो लोग देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं, उनके कारण ही हम सुरक्षित रह पाते हैं।

शिक्षक, कर्मचारी, सैनिक, किसान, व्यापारी — सभी देश की उन्नति में अपना योगदान देते हैं। लेकिन इन सबका योगदान तभी अर्थपूर्ण होता है जब देश का वातावरण शांत और सुरक्षित हो। कोई भी विकास तभी संभव है जब देश की सीमाएं सुरक्षित हों, जब देश के भीतर शांति हो। इसलिए इस समय जरूरी है कि हम राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें।

जब देश की रक्षा में लगे जवान अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं, तब हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने छोटे-छोटे हितों को भूलकर राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए काम करें। इस समय आंदोलन, धरना, प्रदर्शन का समय नहीं है। यह समय है देश के साथ खड़े होने का, आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का।

आज हमारे 27 भाई-बहन आतंकी हमले में शहीद हो गए। उनके घरों में मातम पसरा है। उनके परिवारों का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन परिवारों का दर्द समझना और उनके साथ खड़ा होना हम सबका नैतिक दायित्व है। जब देश पर हमला होता है तो वह केवल एक जगह या कुछ लोगों पर हमला नहीं होता, वह हम सब पर हमला होता है।

अटेवा द्वारा धरना स्थगित करने का निर्णय एक उदाहरण है कि कैसे देशहित को निजी मांगों से ऊपर रखा जा सकता है। हमें इस निर्णय से प्रेरणा लेकर हमेशा यह याद रखना चाहिए कि देश सबसे पहले है। अगर देश सुरक्षित है तो हम अपनी सभी मांगें भविष्य में पूरी कर सकते हैं। लेकिन अगर देश ही सुरक्षित नहीं रहा तो कोई आंदोलन, कोई मांग, कोई सुविधा बच नहीं पाएगी।

देशभक्ति केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी को झंडा फहराने से पूरी नहीं होती। असली देशभक्ति तो तब होती है जब हम कठिन समय में अपने निजी हितों को त्याग कर देश के साथ खड़े होते हैं। जब हम शहीदों के बलिदान को याद करते हैं और उनके सपनों का भारत बनाने के लिए काम करते हैं।

आज आतंकवाद केवल गोली चलाकर नहीं लड़ रहा, बल्कि वह हमारे समाज में डर फैलाकर हमें तोड़ने की कोशिश कर रहा है। अगर हम अपने छोटे-छोटे स्वार्थों में उलझकर एकता भूल जाएंगे तो आतंकवादी अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे। लेकिन अगर हम एकजुट रहेंगे, अपने मतभेदों को भूलकर देश के साथ खड़े रहेंगे तो कोई भी ताकत हमें हरा नहीं सकती।

पहलगाम के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनका बलिदान व्यर्थ न जाने दें। हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम हर परिस्थिति में देश को सर्वोपरि रखेंगे। देशहित में जो भी त्याग करना पड़े, हम करेंगे।

हमें यह भी समझना चाहिए कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई एक दिन की नहीं है। यह एक लंबी लड़ाई है जिसमें धैर्य, एकता और समर्पण की जरूरत है। हमें अपने सैनिकों, अपने सुरक्षाबलों पर भरोसा रखना चाहिए और उन्हें अपना पूर्ण समर्थन देना चाहिए।

जब देश सुरक्षित रहेगा, जब देश में अमन रहेगा, तब ही हम अपने हक और अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं। तब ही हम पेंशन बहाली की लड़ाई को भी सही तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।

आज का दिन हमें यह सिखाता है कि पहले देश, फिर अन्य मांगें। राष्ट्र सबसे पहले। व्यक्तिगत हित बाद में।

आइए, हम सब मिलकर पहलगाम के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें और यह संकल्प लें कि हम हर हाल में देश के साथ खड़े रहेंगे। हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहेंगे। हम अपने निजी स्वार्थों को देशहित के सामने छोटा मानेंगे।

भारत माता की जय! जय हिंद! वंदे मातरम्!



 

👉जनपद के भीतर BEO के बदले विकास खण्ड

https://www.updatemarts.com/2025/04/beo_28.html

👉हर सप्ताह परखी जाएगी विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता

👉समस्त डायट प्राचार्य, AD BASIC, BSA, BEO, DCs, SRG, ARP एवं शिक्षक संकुल कृपया ध्यान दें

👉95 हजार विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में शीघ्र जाएगी यूनिफॉर्म की रकम https://basicshikshakhabar.com/2025/04/ff-715/


 


भविष्य के स्कूलों में एआई टीचर का आगमन: शिक्षक और मानवता का महत्व

 


हमारा और हमारे विद्यालयों का भविष्य अब तेजी से बदल रहा है। आने वाला समय ऐसा होगा, जब हमारे स्कूलों में इंसान नहीं, बल्कि एआई टीचर पढ़ाएंगे। एआई टीचर यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने शिक्षक होंगे, जिन्हें न सैलरी देनी होगी, न भत्ते, न ही पेंशन देना पड़ेगा। ये टीचर कभी छुट्टी नहीं मांगेंगे, बीमार नहीं पड़ेंगे और हमेशा समय पर पढ़ाई कराएंगे। लेकिन क्या ये एआई टीचर बच्चों को वह सच्चा मार्गदर्शन दे पाएंगे जो एक इंसानी शिक्षक देता है? आज के शिक्षक बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं कराते, बल्कि उन्हें संस्कार, समझदारी और जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। जब बच्चे किसी परेशानी में होते हैं तो एक इंसानी शिक्षक उन्हें समझता है, सहारा देता है। लेकिन एआई टीचर केवल मशीन की तरह काम करेंगे। वे बच्चों के दुख, खुशी, डर या सपनों को नहीं समझ पाएंगे। सरकारों के लिए एआई टीचर सुविधाजनक हो सकते हैं क्योंकि इससे पैसे बचेंगे, लेकिन क्या इससे बच्चों का सही विकास हो पाएगा? गाँवों और कस्बों में आज भी बच्चे अपने शिक्षकों से जीवन के बड़े सबक सीखते हैं। अगर भविष्य में केवल मशीनें बच्चों को पढ़ाएंगी, तो बच्चों में संवेदनशीलता, करुणा और समझ कम हो सकती है। वे केवल जानकारी के भंडार बन जाएंगे, पर इंसानी भावना से खाली हो सकते हैं। स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं हैं, वे बच्चों के व्यक्तित्व को संवारने का स्थान हैं। एक इंसानी शिक्षक अपने अनुभव, ज्ञान और प्यार से बच्चों को जीवन का सही रास्ता दिखाता है। एआई टीचर केवल तय कार्यक्रम के अनुसार पढ़ाएंगे। वे बच्चों के सवालों के पीछे छुपी जिज्ञासा को नहीं समझ पाएंगे, न ही बच्चों के विचारों को उड़ान दे पाएंगे। इसलिए तकनीक का उपयोग हमें शिक्षकों की सहायता के लिए करना चाहिए, न कि उनकी जगह लेने के लिए। आज डिजिटल बोर्ड, ऑनलाइन क्लास जैसे साधनों ने शिक्षा को आसान बनाया है, लेकिन इंसानी शिक्षक की जगह कभी नहीं ले सकते। इंसानी शिक्षक बच्चों की आँखों से उनका मन पढ़ सकते हैं, उनकी समस्याएं समझ सकते हैं। एक मशीन कभी यह नहीं कर सकती। अगर पूरी शिक्षा मशीनों के हाथ में चली गई तो आने वाली पीढ़ी संवेदनहीन हो सकती है। सोचने, समझने और महसूस करने की शक्ति कम हो सकती है। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि शिक्षा केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि अच्छा इंसान बनाना है। शिक्षक वह दीपक है जो बच्चों के जीवन में उजाला करता है। मशीनें चाहे जितनी तेज हो जाएं, लेकिन वे उस दीपक की जगह नहीं ले सकतीं। अगर एआई टीचर आएंगे तो हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि वे केवल सहायक बनें, शिक्षक नहीं। हमारे विद्यालयों का भविष्य तभी सुरक्षित रहेगा जब इंसान और तकनीक दोनों साथ मिलकर काम करेंगे। शिक्षकों का सम्मान करना जरूरी है क्योंकि वे समाज का निर्माण करते हैं। एक मशीन कभी समाज नहीं बना सकती। शिक्षा का मकसद केवल नौकरी पाना नहीं है, बल्कि एक अच्छा इंसान बनाना है। इसलिए हमें अपने विद्यालयों में एआई टीचर को सहायक के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए, मुख्य शिक्षक के रूप में नहीं। हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने असली शिक्षकों का सम्मान करें और तकनीक का सही उपयोग करें। भविष्य तभी उज्ज्वल रहेगा जब मानवता और ज्ञान साथ-साथ चलेंगे। शिक्षक जिंदाबाद, मानवता जिंदाबाद।


👉शिक्षा निदेशालय में भीषण आग पांच हजार फाइलें जलकर राख, घटना की जांच के लिए समिति गठित

https://www.updatemarts.com/2025/04/blog-post_329.html


👉निकली शिक्षक पदों हेतु नौकरियां, करें आवेदन, देखें विज्ञप्ति

https://www.updatemarts.com/2025/04/blog-post_103.html


👉बिना सूचना/बिना अवकाश के विद्यालय से दीर्घावधि से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के सम्बन्ध में ।

https://www.updatemarts.com/2025/04/blog-post_872.html


👉शिक्षकों ने अपराह्न 1.30 के पहले छोड़ा स्कूल, तो होगी कार्यवाही

https://www.updatemarts.com/2025/04/130.html




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