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Monday, May 26, 2025

विद्यालय में तोड़फोड़ से हड़कंप

 


बिहार राज्य के मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड अंतर्गत नीरपुर पंचायत के फुलकिया गांव में एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां कुछ अज्ञात दबंगों ने मध्य विद्यालय फुलकिया के भवन को रविवार की रात जेसीबी मशीन से गिरा दिया। यह विद्यालय गांव के सैकड़ों बच्चों के लिए शिक्षा का केंद्र है, जहां लगभग 200 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। रविवार की रात को हुई इस घटना में स्कूल की चारदीवारी और दो कमरों वाला किचन भवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। यह किचन भवन बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार करने के लिए प्रयोग किया जाता था। सोमवार की सुबह जब स्कूल की प्रधानाध्यापिका आरती विश्वकर्मा विद्यालय पहुंचीं, तो उन्होंने देखा कि विद्यालय की पूर्वी दिशा की दीवार टूटी हुई है और किचन भवन पूरी तरह गिरा पड़ा है।

इस घटना से प्रधानाध्यापिका समेत पूरे विद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रधानाध्यापिका आरती विश्वकर्मा और विद्यालय प्रबंध समिति की सचिव अंबिका देवी ने मिलकर बरियारपुर थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि यह घटना किसी भी सामान्य तोड़फोड़ की नहीं, बल्कि सुनियोजित योजना का हिस्सा लगती है। विद्यालय की संपत्ति को इस तरह से रात के अंधेरे में नुकसान पहुंचाना एक गंभीर अपराध है और इस पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

स्थानीय ग्रामीणों ने घटना के पीछे मंदिर निर्माण को मुख्य कारण बताया है। गांव के पीछे श्री मंगला काली मां का मंदिर बन रहा है। पहले मंदिर का रास्ता विद्यालय के पश्चिमी हिस्से से होकर जाता था। लेकिन अब मंदिर निर्माण में लगे लोगों ने एक नया रास्ता निकालने की योजना बनाई है, जो सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग NH-80 से मंदिर को जोड़ सके। इसी योजना के चलते विद्यालय की दीवार और रसोईघर को जेसीबी से गिरा दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सोमवार और मंगलवार को जबरदस्त तरीके से मंदिर की चारदीवारी का निर्माण कार्य चलता रहा, जबकि प्रशासन ने किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगा रखी थी। यह प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना है।

विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था पर इस घटना का सीधा असर पड़ा है। लगभग 200 नामांकित बच्चों की पढ़ाई नए भवन में तो होती है, लेकिन मध्यान्ह भोजन का पकवान इसी टूटे हुए भवन में किया जाता था। अब चूल्हे, गैस सिलेंडर, बर्तन और अन्य रसोई सामग्री खुले मैदान में पड़ी है, जो कि बच्चों की स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए खतरा है। कई माता-पिता अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर चिंतित हैं। कुछ ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि जल्द ही स्कूल की मरम्मत और रसोईघर का पुनर्निर्माण नहीं हुआ तो बच्चों का विद्यालय आना कम हो जाएगा, जिससे उनकी शिक्षा पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।

जिला परियोजना अधिकारी (डीपीओ) आनंद वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विद्यालय भवन को गिराना पूरी तरह से गैरकानूनी है और यह शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने प्रधानाध्यापिका को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। बरियारपुर के बीडीओ देव मोहम्मद असगर अली ने भी कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुंगेर के जिलाधिकारी अवनीश कुमार ने भी मामले की जानकारी मिलने पर जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि रिपोर्ट मिलने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्य को तत्काल रोकने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद मंदिर निर्माण कार्य चलता रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दबंग लोगों को कानून का कोई डर नहीं है। बरियारपुर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जेसीबी मालिक, मंदिर निर्माण समिति और मजदूरों से पूछताछ की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना केवल एक विद्यालय की चारदीवारी गिराए जाने की नहीं, बल्कि समाज की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। जब एक सरकारी विद्यालय, जहां गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं, को इस तरह से निशाना बनाया जाता है, तो यह न केवल शिक्षा व्यवस्था, बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए भी खतरे की घंटी है। मंदिर जैसे धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए यदि बच्चों की शिक्षा के स्थान को गिराया जा रहा है, तो यह सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। कई संगठनों ने सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए जिला प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं अन्य गांवों में भी दोहराई जा सकती हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था को और नुकसान होगा।

अभी विद्यालय प्रशासन, ग्रामीण और अधिकारी इस मामले में एकमत हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और विद्यालय की चारदीवारी और रसोईघर का पुनर्निर्माण शीघ्र कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी विद्यालय या सार्वजनिक संपत्ति को धार्मिक या निजी हितों के लिए इस प्रकार से नुकसान न पहुंचाया जा सके।

सरकारी विद्यालय देश के भविष्य निर्माता बच्चों की शिक्षा का आधार हैं। इन्हें सुरक्षित और सशक्त रखना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। अगर समाज की आंखों के सामने कोई विद्यालय तोड़ा जाता है और लोग चुप रहते हैं, तो वह चुप्पी एक दिन पूरे भविष्य पर भारी पड़ सकती है।

फुलकिया गांव की यह घटना एक चेतावनी है कि शिक्षा के मंदिरों को बचाना अब केवल सरकार या प्रशासन का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इस घटना ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हम विकास के नाम पर क्या खो रहे हैं और किस दिशा में बढ़ रहे हैं।

इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका अब सबसे अहम है। यदि जिला प्रशासन समय पर जांच पूरी करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है और स्कूल का पुनर्निर्माण करवाता है, तो यह न केवल फुलकिया गांव, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी विद्यालय को इस तरह की घटनाओं का सामना न करना पड़े।

फुलकिया गांव का विद्यालय अब न्याय की प्रतीक्षा में है। बच्चों की मासूम आंखें एक बार फिर से साफ-सुथरे, सुरक्षित रसोईघर और मजबूत दीवारों वाले विद्यालय की ओर देख रही हैं। उन्हें यह भरोसा दिलाना हम सबकी जिम्मेदारी है कि उनकी शिक्षा, पोषण और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका, प्रबंध समिति, ग्रामीण और प्रशासन मिलकर इस नुकसान की भरपाई करेंगे, ऐसा विश्वास हर नागरिक को होना चाहिए। शिक्षा का दीपक किसी भी परिस्थिति में बुझने नहीं देना है। यही इस घटना से मिलने वाला सबसे बड़ा संदेश है।



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Thursday, May 15, 2025

TSCT द्वारा शिक्षामित्र परिवार को पक्की छत का सहारा

 


TSCT द्वारा एक ज़रूरतमंद परिवार को पक्की छत – शिक्षकों की मदद से बदल रही है एक ज़िंदगी

TSCT (Teachers Social Contribution Team) ने अपने चार साल के सफर में अनेक जरूरतमंद परिवारों की मदद की है, लेकिन इस बार की पहल विशेष है। इस बार सहयोग एक ऐसे परिवार के लिए किया जा रहा है जो आज भी छप्पर के नीचे जिंदगी बिता रहा है। यह परिवार आजमगढ़ जिले के पवई ब्लॉक के मझरिया गाँव में रहने वाले स्वर्गीय जोगेंद्र राजभर का है, जो शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहा है।

इस कठिन समय में TSCT ने आगे बढ़कर यह निर्णय लिया है कि इस परिवार को कम से कम एक पक्की छत प्रदान की जाए, जिससे वे सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसके अलावा, TSCT की ओर से इस परिवार की रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए कुछ आर्थिक सहायता भी दी जाएगी, ताकि उनके जीवन यापन में कुछ सहूलियत आ सके।

TSCT द्वारा की जा रही इस मदद में हर शिक्षक साथी की भागीदारी आवश्यक है। आज जब शिक्षामित्र साथी TSCT के हर कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रहे हैं, तो यह हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि उनके किसी जरूरतमंद परिवार के लिए भी हम सब मिलकर कुछ करें। यह सहयोग सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सेवा भाव का प्रतीक है।

आप कल्पना कीजिए कि सिर्फ 300-310 रुपए का छोटा सा सहयोग किसी के जीवन में कितनी बड़ी राहत बन सकता है। यह सिर्फ दान नहीं, बल्कि एक पुण्य कार्य है। आप जब किसी को छत देते हैं, तो सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी देते हैं। एक शिक्षक होने के नाते जब आप किसी दूसरे शिक्षक के परिवार को संबल देते हैं, तो यह शिक्षा जगत की एकजुटता और मानवीयता का जीता-जागता उदाहरण बन जाता है।

TSCT का उद्देश्य केवल भवन बनवाना नहीं है, बल्कि ऐसे परिवारों की जिंदगी में स्थायित्व और सम्मान वापस लाना है। एक शिक्षामित्र जो वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देता रहा, उसके परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। यह प्रयास दिखाता है कि शिक्षक समाज केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए सच्ची सेवा भावना रखता है।

TSCT की इस पहल में सभी शिक्षक साथियों से अनुरोध है कि वे आगे आएं और इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें। यह एक ऐसा अवसर है जिसमें हम अपने सहयोग से किसी की जिंदगी संवार सकते हैं। 300 रुपए का यह योगदान न केवल एक पक्की छत बनेगा, बल्कि यह उन बच्चों के भविष्य की नींव भी मजबूत करेगा जो उस घर में रहेंगे।

इस सहयोग के माध्यम से TSCT यह भी दिखा रहा है कि शिक्षक समाज के भीतर भी जब कोई संकट में होता है, तो हम सब एक परिवार की तरह एकजुट होते हैं। शिक्षकों की यह एकता और सेवा भावना ही TSCT की सबसे बड़ी ताकत है। TSCT केवल एक संगठन नहीं, बल्कि वह भावना है जो शिक्षक के भीतर छिपे सेवा भाव को समाज के सामने लाती है।

इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शिता के साथ संचालित किया जा रहा है। जितना भी सहयोग एकत्र किया जाएगा, उसका पूरा विवरण TSCT द्वारा सार्वजनिक किया जाएगा। घर निर्माण की प्रक्रिया, खर्च, और हर गतिविधि की जानकारी सोशल मीडिया और ग्रुपों के माध्यम से साझा की जाएगी, ताकि सभी को यह विश्वास रहे कि उनका योगदान सही दिशा में जा रहा है।

इस नेक कार्य में भाग लेने से न केवल आत्मसंतोष मिलता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे का वातावरण भी बनता है। जो लोग आर्थिक रूप से बहुत बड़ा योगदान नहीं दे सकते, वे भी 300 रुपए जैसे छोटे सहयोग से इस अभियान में शामिल होकर बहुत बड़ा असर डाल सकते हैं।

यह पहल केवल आजमगढ़ के एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और देश के शिक्षक समाज के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। जब एक शिक्षक समुदाय किसी साथी के परिवार के लिए इस तरह खड़ा होता है, तो समाज में उसकी प्रतिष्ठा और आत्मबल दोनों ही बढ़ते हैं।

TSCT की यह कोशिश बताती है कि हम केवल पढ़ाई नहीं करवाते, हम समाज की रीढ़ हैं। हम जरूरतमंदों का सहारा हैं और हम वे लोग हैं जो अपने कर्म और संवेदना से बदलाव ला सकते हैं। जब हम सब मिलकर किसी को छत देंगे, तो वह केवल उसका घर नहीं होगा, बल्कि पूरे शिक्षक समाज का गर्व और आत्मसम्मान भी उसमें समाहित होगा।

आइए, हम सब मिलकर इस नेक कार्य को सफल बनाएं। TSCT की इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनकर हम न केवल एक परिवार को राहत देंगे, बल्कि एक नई परंपरा की नींव भी रखेंगे, जिसमें शिक्षक केवल ज्ञान का वाहक नहीं, बल्कि समाज सेवा का भी प्रतीक होगा।

आपका छोटा सा योगदान, किसी के जीवन का सबसे बड़ा सहारा बन सकता है।

TSCT – जहाँ शिक्षक समाज बनाता है एक बेहतर कल।

अब आपकी बारी है – चलिए मिलकर किसी को पक्की छत दें।


👉पीटीएम बैठक अप्रैल 2025 - अभिभावकों और शिक्षकों के सहयोग से छात्र उन्नति पर जोर  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/PTM.html

 

👉TSCT: संकट में शिक्षकों का सच्चा साथी…. https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/04/tsct.html

 

👉प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन: ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का सशक्त संदेश  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/pm.html


👉उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की जानकारी अब ऑनलाइन होगी – हर गतिविधि मानव संपदा पोर्टल पर  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/manavsampda.html


👉शिक्षक: समाज के सच्चे हीरो और जीवन के मार्गदर्शक https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/heroesofsociety.html


👉शिक्षकों ने गरीब लड़की की शादी के लिए की मदद https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/poorgirl.html


Sunday, May 11, 2025

शिक्षक: समाज के सच्चे हीरो और जीवन के मार्गदर्शक

 

शिक्षक केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं होते, वे समाज के मार्गदर्शक, संस्कारों के संरक्षक और भावी पीढ़ियों के शिल्पकार होते हैं। “शिक्षक: सिर्फ पढ़ाते नहीं, जीना सिखाते हैं, हर मुश्किल राह में बनते हैं साहस” — इस शीर्षक के साथ प्रकाशित यह समाचार कानपुर देहात के शिक्षकों के सामाजिक योगदान, नैतिक नेतृत्व और जीवन निर्माण में उनकी भूमिका को उजागर करता है। यह लेख शिक्षक दिवस जैसे अवसरों की गरिमा को और भी गहरा करता है क्योंकि इसमें शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं मानी गई, बल्कि उनके जीवन मूल्यों, प्रेरणा, संघर्ष और समर्पण को दर्शाया गया है।

कानपुर देहात में शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, वे अपने विद्यार्थियों के जीवन को संवारने में निरंतर सक्रिय रहते हैं। चाहे जीवन की कठिन परिस्थितियाँ हों या समाज में व्याप्त चुनौतियाँ, शिक्षक अपने अनुभव, संवेदनशीलता और परिश्रम से न केवल विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं, बल्कि उनके परिवार और पूरे समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बन जाते हैं। यह रिपोर्ट इसी बात की पुष्टि करती है कि शिक्षक शिक्षा से बढ़कर जीवन का पाठ पढ़ाते हैं।

समाचार में यह बताया गया है कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए केवल शिक्षक नहीं बल्कि मित्र, मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। वे अपने जीवन के अनुभवों से बच्चों को न केवल किताबों की जानकारी देते हैं, बल्कि उन्हें जीवन की कठिनाइयों से जूझने का साहस और समाधान ढूंढने की कला भी सिखाते हैं। जब बच्चे निराशा, असफलता या मानसिक दबाव में आते हैं, तब यही शिक्षक उन्हें सहारा देते हैं और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि एक आदर्श शिक्षक वही होता है जो अपने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाए, उन्हें अच्छे-बुरे में फर्क करना सिखाए और उनके अंदर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करे। शिक्षक अपने कार्य के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और करुणा की भावना भी भरते हैं, जिससे वे आगे चलकर समाज के अच्छे नागरिक बन सकें।

इस समाचार में कुछ शिक्षकों के उदाहरण भी दिए गए हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों से न केवल स्कूलों में बल्कि समाज में भी बदलाव की लहर चलाई है। उन्होंने शिक्षा को केवल विषयों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षा को जीवन से जोड़ा है। ऐसे शिक्षक अपने विद्यार्थियों के सपनों को पहचानते हैं और उन्हें साकार करने में मदद करते हैं।

समाचार यह भी दर्शाता है कि एक शिक्षक का सबसे बड़ा गुण उसका सकारात्मक दृष्टिकोण होता है। वह अपने विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान कर उसे विकसित करता है। शिक्षक के अंदर करुणा, धैर्य, सहनशीलता, और हर बच्चे को अपनाने की भावना होती है। यही गुण उन्हें एक साधारण व्यक्ति से समाज निर्माता बना देते हैं।

शिक्षकों की भूमिका तकनीकी युग में और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आज जब सोशल मीडिया, इंटरनेट और मोबाइल बच्चों के मन-मस्तिष्क पर प्रभाव डाल रहे हैं, तब शिक्षक ही हैं जो उन्हें सही दिशा में सोचने, निर्णय लेने और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। यह समाचार उसी विचार को और गहराई देता है कि डिजिटल युग में भी मानवीय मूल्यों की शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है और शिक्षक उसका प्रमुख स्रोत हैं।

इस रिपोर्ट में एक संदेश यह भी छिपा है कि शिक्षक समाज के सभी वर्गों को जोड़ने वाला एक मजबूत पुल हैं। वे जाति, धर्म, भाषा या वर्ग के भेद से ऊपर उठकर सभी बच्चों को एक समान दृष्टि से देखते हैं और उन्हें सशक्त बनाते हैं। जब शिक्षक समाज सेवा, सहयोग और नैतिक आचरण की मिसाल पेश करते हैं, तब विद्यार्थी भी उन्हीं मूल्यों को अपने जीवन में अपनाते हैं।

यह लेख शिक्षक समुदाय के समर्पण, परिश्रम और आत्मबल को एक सम्मान के रूप में प्रस्तुत करता है। यह हमें यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि समाज को बदलने की शुरुआत स्कूलों से और खासकर शिक्षकों से होती है। एक शिक्षक यदि चाहे तो किसी बच्चे की जिंदगी बदल सकता है और बदली हुई जिंदगी से पूरा समाज प्रभावित हो सकता है।

समाचार में इस बात को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि शिक्षक सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और सेवा है। शिक्षक वही नहीं जो सिर्फ विषय समझाए, बल्कि वह है जो जीवन जीना सिखाए, जो बच्चे को भावनात्मक, मानसिक और नैतिक रूप से मज़बूत बनाए।

कुल मिलाकर यह समाचार यह संदेश देता है कि शिक्षक समाज के सच्चे हीरो हैं। वे प्रेरणा हैं, शक्ति हैं और मार्गदर्शक हैं। उनका काम केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि बच्चों को ज़िंदगी की हर परीक्षा के लिए तैयार करना है। ऐसे शिक्षक ही समाज के निर्माण में नींव का पत्थर होते हैं। यह लेख सभी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें अपने शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन करना चाहिए और उनकी शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करना चाहिए।


👉सिविल डिफेंस में भर्ती शुरू, आम लोग बनें देश के रक्षक https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/civil%20efence.html


👉शिक्षकों ने गरीब लड़की की शादी के लिए की मदद  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/poorgirl.html


👉UP TGT परीक्षा 2025 स्थगित – 14 और 15 मई की परीक्षा अब नई तिथि पर होगी  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/TGT.html


👉बस्ती में ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक को जेल https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/social%20media%20post%20.html


👉उत्तर प्रदेश में जातिवार गणना के लिए जियो फेंसिंग, टैबलेट और एआई तकनीक का होगा प्रयोग: एक ऐतिहासिक पहल  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/censusnews.html



 

Tuesday, May 6, 2025

शिक्षक समस्याओं पर बैठक में 6 बिंदुओं पर बनी सहमति

 


शिक्षक समस्याओं पर महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश की महानिदेशक स्कूल शिक्षा श्रीमती कंचन वर्मा जी से विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह चर्चा शिक्षक समाज के लिए अत्यंत लाभकारी रही। बैठक में प्रमुख रूप से छह बिंदुओं पर बात हुई, जिनमें से प्रत्येक बिंदु पर महानिदेशक महोदय ने या तो सहमति व्यक्त की या त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया। इस प्रकार की पारदर्शी और समस्या-समाधान वाली चर्चा शिक्षक समुदाय में एक सकारात्मक संदेश देती है। नीचे दिए गए बिंदुओं के अनुसार चर्चा का सार इस प्रकार है:

1. प्रोन्नति वेतनमान: शिक्षकों द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही थी कि उन्हें प्रोन्नति (पदोन्नति) का लाभ समय से मिले। इस विषय में महानिदेशक महोदय ने बताया कि शासन स्तर पर सहमति बन चुकी है और बहुत जल्द इसका आदेश जारी कर दिया जाएगा। इसके साथ ही मानव सम्पदा पोर्टल पर प्रोन्नति वेतनमान की सुविधा भी जोड़ दी जाएगी ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल रूप से सुचारू हो सके। यह भी स्पष्ट किया गया कि बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य को रोकने के कोई निर्देश नहीं हैं, और वे पात्र शिक्षकों के वेतनमान की कार्यवाही निर्बाध रूप से जारी रखें।

2. पदोन्नति नीति: शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इस विषय पर महानिदेशक महोदया ने बताया कि वह स्वयं इस विषय पर प्रयासरत हैं और बीच का व्यावहारिक रास्ता निकालने की कोशिश कर रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में जल्द ही सकारात्मक बदलाव संभव हैं।

3. अंतर जनपदीय स्थानांतरण: पारस्परिक स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट किया गया कि यह प्रक्रिया गतिमान है यानी चल रही है। इसके अतिरिक्त सामान्य स्थानांतरण नीति को लेकर बताया गया कि विभागीय प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और उम्मीद है कि सामान्य अंतर जनपदीय स्थानांतरण का शासनादेश भी शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा। इससे शिक्षकों में स्थानांतरण को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो सकती है।

4. पुरानी पेंशन योजना: बीटीसी 2001, विशिष्ट बीटीसी 2004, बीटीसी 2004 उर्दू जैसे बैचों के शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन की मांग पर भी बात हुई। महानिदेशक महोदय ने बताया कि यह विषय प्रक्रिया में है और इसके परिणाम सकारात्मक नजर आ रहे हैं। यदि यह मांग पूरी होती है तो हजारों शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता मिलेगी।

5. विद्यालय समय में परिवर्तन: गर्मी के मौसम को देखते हुए विद्यालयों के समय में बदलाव की मांग की जा रही थी। इस पर महानिदेशक महोदय ने बताया कि यू-डायस पोर्टल पर बहुत से आंकड़े अभी तक अपूर्ण हैं, इसलिए शिक्षकों को उपस्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जिला अधिकारियों को यह अधिकार दे दिया गया है कि वे स्थानीय तापमान के अनुसार विद्यालय समय में बदलाव कर सकते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह बताई गई कि परिषदीय विद्यालयों में इस बार लगभग पाँच लाख बच्चों का नामांकन कम हुआ है। यदि शिक्षकगण इस वर्ष नामांकन बढ़ाने में सहयोग करते हैं, तो निश्चित रूप से अगली बार समय में कटौती पर विचार किया जाएगा।

6. हाथरस प्रकरण: हाथरस के जिला समन्वयक अशोक चौधरी के विरुद्ध शिक्षकों की शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया। उनके विरुद्ध एक जांच समिति गठित की गई है जो पूरी जांच करेगी। साथ ही उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का आश्वासन भी दिया गया है। यह कार्रवाई शिक्षक समुदाय में अनुशासन और पारदर्शिता की भावना को बढ़ाएगी।

इन सभी बिंदुओं के बाद वरिष्ठ विशेषज्ञ और AD बेसिक श्री तिवारी जी से भी मुलाकात हुई। इस बैठक में भी शिक्षकों से संबंधित कई विषयों पर सकारात्मक वार्ता हुई और समाधान के विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया। यह प्रयास न केवल शिक्षकों की समस्याओं को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी दिखाता है कि शासन स्तर पर शिक्षकों की बात सुनी जा रही है और उचित कार्यवाही भी की जा रही है।

इस पूरी बैठक का सार यही है कि उत्तर प्रदेश के शिक्षक अब अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर सजग और संगठित हैं। शासन और शिक्षा विभाग भी अब शिक्षकों की बातों को गंभीरता से ले रहे हैं और उचित समय पर आवश्यक निर्णय ले रहे हैं। यदि इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रही, तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।

 













👉AI टीचर ‘सुमन मैडम’ – झांसी के शिक्षक का अनोखा नवाचार

👉टीचर्स ऑफ द ईयर 2025 सम्मान समारोह | नवाचारी शिक्षकों को मिला मंच
https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/2025.html

👉शिक्षामित्र मानदेय माह अप्रैल 2025 की धनराशि प्रेषण के सम्बन्ध में।
https://www.updatemarts.com/2025/05/2025.html


अंशकालिक अनुदेशक मानदेय माह अप्रैल 2025 की धनराशि प्रेषण के सम्बन्ध में।
https://www.updatemarts.com/2025/05/2025_6.html


भारत-पाक तनाव के बीच मॉक ड्रिल: यूपी-बिहार समेत 244 जिलों की लिस्ट देखें
https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/244.html


Wednesday, April 30, 2025

मुरादाबाद में 250 से अधिक शिक्षक आईपीएल सट्टेबाजी में लिप्त, तीन गिरफ्तार और निलंबित

 


मुरादाबाद जिले में एक बहुत ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यह घटना शिक्षा जगत से जुड़ी है, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग के 250 से भी ज्यादा शिक्षक आईपीएल में सट्टा लगाने के मामले में शामिल पाए गए हैं। यह बात जब सामने आई तो शिक्षा विभाग और पुलिस दोनों में हलचल मच गई। जो शिक्षक बच्चों को स्कूल में पढ़ाने और संस्कार देने की जिम्मेदारी निभाते हैं, वही अब सट्टेबाजी जैसे गलत कामों में लिप्त पाए गए हैं।

इस पूरे मामले की शुरुआत 11 अप्रैल 2025 की रात को हुई, जब मुरादाबाद पुलिस ने सीओ सिविल लाइंस कुलदीप गुप्ता के नेतृत्व में एक फ्लैट पर छापा मारा। यह फ्लैट सिविल लाइंस इलाके में पीटीसी के सामने था। पुलिस को यहां आईपीएल मैच पर सट्टा लगाए जाने की जानकारी मिली थी। जब पुलिस ने छापा मारा, तो वहां 9 लोग मौके पर रंगे हाथों पकड़े गए। कुछ समय बाद पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया, जिससे कुल मिलाकर 10 लोग जेल भेजे गए। इन्हीं में से 3 लोग बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक हैं।

इन तीन शिक्षकों के नाम हैं: धर्मेंद्र कुमार, जो बिलारी ब्लॉक के कंपोजिट स्कूल इब्राहिमपुर में प्रभारी प्रधानाध्यापक हैं; मनोज अरोड़ा, जो सहायक शिक्षक हैं; और सुशील चौधरी उर्फ सुरेंद्र सिंह, जो डिलारी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय वसावनपुर में प्रधानाध्यापक हैं। ये तीनों अब मुरादाबाद जेल में बंद हैं। बीएसए विमलेश कुमार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन तीनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया है।

पुलिस को जांच के दौरान जो मोबाइल चैट्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड मिले हैं, उनमें लगभग 250 से ज्यादा शिक्षकों के नाम, मोबाइल नंबर और बातचीत की जानकारी सामने आई है। इन चैट्स में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े लेन-देन, भाव, रकम और अन्य सटोरियों से बातचीत के सबूत हैं। अब पुलिस इन्हीं सबूतों के आधार पर बाकी शिक्षकों की पहचान कर रही है। जिन शिक्षकों के नंबर और चैट्स मिले हैं, उनके खिलाफ भी जल्दी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि इन शिक्षकों ने पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी छोड़कर सट्टेबाजी को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। बहुत से शिक्षक ऐसे हैं जो अब अपने स्कूल तक नहीं जाते। कुछ ने तो अपने स्कूलों में प्राइवेट टीचर रख लिए हैं, जो उनकी जगह बच्चों को पढ़ाते हैं। वहीं कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो अपने रसूख के दम पर घर बैठे ही हाजिरी लगवाते हैं। इन शिक्षकों ने सट्टा लगाकर रातोंरात लाखों और करोड़ों रुपये कमाए हैं। लेकिन अब उनका यह खेल पुलिस और प्रशासन की नजर में आ गया है।

जेल में बंद इन 10 आरोपियों में से 7 लोगों की जमानत याचिका सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब उन्हें जमानत के लिए हाईकोर्ट जाना होगा। जिनकी जमानत खारिज हुई है, उनके नाम हैं – टीटू उर्फ दीपक, विक्की छावड़ा, कमल छावड़ा, मनोज अरोड़ा (जो कि शिक्षक हैं), हेमंत अरोड़ा, रोहित गुप्ता और अभिनव। इससे साफ है कि कोर्ट भी इस मामले को बहुत गंभीरता से देख रहा है।

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार इस सट्टेबाजी रैकेट के अभी भी 13 आरोपी फरार हैं। 11 अप्रैल के बाद से पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन अब तक कोई भी वांटेड आरोपी पकड़ा नहीं जा सका है। पुलिस हर दिन करीब 10 जगहों पर छापे मार रही है, लेकिन अभी तक उन्हें खास सफलता नहीं मिली है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सट्टेबाजी रैकेट का जाल कितना बड़ा और गहरा है।

यह घटना शिक्षा विभाग के लिए एक बहुत बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है। जो शिक्षक बच्चों को ईमानदारी, मेहनत और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, वही अगर कानून तोड़ने लगें, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रह पाएगा? बेसिक शिक्षा विभाग अब इन शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। सिर्फ निलंबन ही नहीं, बल्कि उनकी नौकरी तक खतरे में है। अगर दोष साबित हुआ, तो इनकी सेवा समाप्त भी की जा सकती है।

इस पूरे मामले से एक और सच्चाई सामने आई है – कुछ शिक्षक अपनी ड्यूटी के प्रति बिल्कुल लापरवाह हो गए हैं। उन्हें न बच्चों की पढ़ाई की चिंता है और न ही अपने कर्तव्यों की। वे सिर्फ पैसे कमाने की सोच में लगे हैं, चाहे वह तरीका गलत ही क्यों न हो। ये शिक्षक यह भूल गए हैं कि एक शिक्षक सिर्फ स्कूल में पढ़ाता नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक आदर्श भी होता है। जब समाज का यह आदर्श खुद गलत रास्ते पर चले, तो समाज का क्या होगा?

पुलिस अब इस मामले में तकनीकी सहायता भी ले रही है। मोबाइल चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स, बैंक ट्रांजैक्शन, व्हाट्सएप ग्रुप्स और मोबाइल पेमेंट ऐप्स की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि और कितने लोग इस सट्टेबाजी में शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने यह भी बताया है कि जो शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे थे, उनका रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। अगर कोई शिक्षक लगातार अनुपस्थित रहा है और फिर भी वेतन ले रहा है, तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी कहा है कि वे इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। बीएसए कार्यालय से यह निर्देश जारी किया गया है कि सभी बीईओ अपने-अपने ब्लॉक के स्कूलों की हाजिरी और शिक्षकों की उपस्थिति की रिपोर्ट दें। यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं और कौन गायब रहते हैं।

इस घटना ने साफ कर दिया है कि शिक्षा विभाग को अब और सख्ती बरतनी होगी। शिक्षकों की भर्ती से लेकर उनकी निगरानी तक हर स्तर पर पारदर्शिता लानी होगी। साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो, ताकि गलत काम करने वालों को सबक मिले और बाकी शिक्षक भी अपनी जिम्मेदारी समझें।

यह भी जरूरी है कि समाज के लोग और अभिभावक भी इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाएं। स्कूल बच्चों का दूसरा घर होता है और शिक्षक उनके मार्गदर्शक। अगर वही शिक्षक गलत राह पर चलें, तो बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।

इस पूरे प्रकरण से हमें यह सिखने को मिलता है कि चाहे कोई भी पेशा हो, अगर उसमें ईमानदारी न हो, तो उसका समाज पर बुरा असर पड़ता है। शिक्षक का काम सिर्फ नौकरी नहीं है, वह एक मिशन है, एक जिम्मेदारी है। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि इस तरह के मामलों पर जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई हो और ऐसे शिक्षक जो इस पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं, उन्हें उनके किए की सजा मिले।



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