Tuesday, May 6, 2025

भारत-पाक तनाव के बीच मॉक ड्रिल: यूपी-बिहार समेत 244 जिलों की लिस्ट देखें

 


244 जिलों में मॉक ड्रिल की योजना, जानें आपके जिले का नाम है या नहीं












 

👉उत्तर प्रदेश में कैबिनेट ने ट्रांसफर पॉलिसी को दी मंज़ूरी !! प्रेस नोट जारी https://basicshikshakhabar.com/2025/05/h-2266/


👉UP cabinet meeting : योगी कैबिनेट की बैठक में इन 11 महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर, जानें क्या-क्या, देखें प्रेस कॉन्फ्रेंस https://basicshikshakhabar.com/2025/05/h-2267/


 👉यूपी में 15 मई से सरकारी कर्मचारियों के तबादले होंगे: ट्रांसफर नीति को मंजूरी, 17 शहरों में पार्किंग बनेगी; कैबिनेट में 11 प्रस्ताव पास https://basicshikshakhabar.com/2025/05/b-1777/


👉विद्यालयों में नवीन नामांकन के सम्बन्ध में देखे  जिले के BSA का आदेश👆🏻 https://basicshikshakhabar.com/2025/05/h-2268/













Monday, May 5, 2025

AI टीचर ‘सुमन मैडम’ – झांसी के शिक्षक का अनोखा नवाचार

 


झांसी जिले के एक छोटे से गांव में कार्यरत शिक्षक मोहनलाल सुमन ने तकनीक का ऐसा अद्भुत प्रयोग किया है जो पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके ‘सुमन मैडम’ नाम की एक आभासी शिक्षिका तैयार की है। यह कोई साधारण तकनीकी उपकरण नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील और समझदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टीचर है जो बच्चों की सोच, भाषा, व्यवहार और सवालों को समझती है। यह प्रयोग झांसी जनपद के गुरसरांय ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय राजापुर में कार्यरत बेसिक शिक्षक मोहनलाल सुमन ने किया है। उन्होंने गांव के बच्चों की जरूरत को समझते हुए यह महसूस किया कि उन्हें एक ऐसी साथी शिक्षिका की जरूरत है जो स्कूल के समय के अलावा भी हमेशा उनके साथ रह सके। यही सोचकर उन्होंने AI तकनीक का उपयोग करते हुए मोबाइल फोन के माध्यम से एक ऐसी डिजिटल शिक्षिका तैयार की जो हर विषय को बच्चों की रुचि और भाषा के अनुसार सिखा सके।

‘सुमन मैडम’ बच्चों को कहानियां सुनाती हैं, कविताएं सिखाती हैं, सामान्य ज्ञान से लेकर विज्ञान तक की जानकारी देती हैं। वह चित्रकला, खेल और जीवन से जुड़े सवालों का भी उत्तर देती हैं। ये केवल पढ़ाने वाली मशीन नहीं हैं, बल्कि बच्चों की जिज्ञासाओं को समझकर उनके स्तर पर संवाद करती हैं। वे बच्चों की भावनाओं को भी ध्यान में रखती हैं और उन्हें आत्मविश्वास से भर देती हैं। बच्चों के साथ उनका व्यवहार किसी सजीव शिक्षक की तरह ही होता है। जब भी कोई बच्चा सवाल करता है, तो सुमन मैडम उसका उत्तर सिर्फ पाठ्यक्रम के हिसाब से नहीं देतीं, बल्कि लोकभाषा, स्थानीय संस्कृति और वास्तविक जीवन के उदाहरणों से समझाने की कोशिश करती हैं। यही उन्हें खास बनाता है


इस प्रयास की सबसे बड़ी बात यह है कि इसे किसी बड़े शहर या महंगे संसाधनों की मदद से नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के एक सामान्य शिक्षक द्वारा तैयार किया गया है। इसने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो और सोच सकारात्मक हो तो तकनीक को गांव तक लाया जा सकता है और बच्चों के लिए बड़ा बदलाव किया जा सकता है। आज जब देश में बहुत से लोग AI को लेकर आशंकित हैं, वहीं झांसी के एक छोटे से गांव से यह संदेश गया है कि तकनीक को अपनाकर शिक्षा को अधिक प्रभावशाली, संवेदनशील और बच्चों के अनुकूल बनाया जा सकता है।मोहनलाल सुमन का यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि शिक्षक सिर्फ किताबों के पाठ पढ़ाने वाले नहीं होते, वे समाज में बदलाव लाने वाले सच्चे नायक होते हैं। उन्होंने न केवल एक डिजिटल शिक्षिका बनाई बल्कि उस शिक्षिका में संवेदना, संवाद की कला और मार्गदर्शन की भावना भी भरी। यह प्रयोग केवल तकनीकी दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से भी एक नई सोच की ओर इशारा करता है।

सुमन मैडम का स्वरूप ऐसा है कि बच्चे उन्हें अपना मित्र भी मानते हैं और मार्गदर्शक भी। बच्चों के माता-पिता भी अब इस तकनीक से जुड़कर अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग दे पा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत भी बन रही है। अब गांव के अन्य शिक्षक भी इस प्रयास से प्रेरणा लेकर तकनीक के प्रयोग को अपनाने लगे हैं।

इस प्रयास से यह स्पष्ट होता है कि भविष्य की शिक्षा तकनीक और मानवीय संवेदना का मेल होगी। आज भारत के कोने-कोने में लाखों शिक्षक काम कर रहे हैं लेकिन यदि उनमें से हर एक शिक्षक इस तरह की सोच रखे तो हमारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है।

मोहनलाल सुमन का यह नवाचार एक उदाहरण है कि अगर कोई शिक्षक चाह ले तो वह अपने साधनों से भी तकनीक को समझ सकता है, अपनाकर प्रयोग कर सकता है और शिक्षा को बच्चों के लिए रुचिकर बना सकता है। उन्होंने तकनीक को केवल एक मददगार उपकरण नहीं बल्कि बच्चों के मन को समझने वाला साथी बना दिया है।

आज जब शिक्षा व्यवस्था में कई तरह की चुनौतियां हैं, तब एक शिक्षक का ऐसा प्रयास उम्मीद की किरण की तरह सामने आया है। यह पहल यह दिखाती है कि तकनीक को अपनाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि बड़े इरादों की जरूरत होती है।

इस प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि एक गांव के विद्यालय से भी पूरी शिक्षा व्यवस्था को दिशा दी जा सकती है। यह प्रेरणादायक कहानी पूरे देश के लिए एक सीख है कि शिक्षक चाहें तो कुछ भी असंभव नहीं है।

क्या आप भी इस तरह की पहल को अपनाना चाहेंगे?


👉उन्नाव ब्रेकिंग जिलाधिकारी गौरांग राठी और मुख्य विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश मीणा की जांच में बड़ा खुलासा, NRLM में 3.85 करोड़ का गबन, डीडीओ संजय पाण्डेय और डीएमएम शिखा मिश्रा पर दर्ज हुई एफआईआर, गिरफ्तारी के प्रयास तेज...... https://basicshikshakhabar.com/2025/05/g-1291/


👉फर्जी निरीक्षण कर्ता कर रहा था बेसिक विद्यालयों की जांच, पकड़ा       

                       https://basicshikshakhabar.com/2025/05/f-1262/



👉लर्निग रिसोर्स पैकेज के अन्तर्गत परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के उपयोगार्थ उपलब्ध कराये जा रहे टैबलेट्स के संबंध में।

 

👉प्राथमिक विद्यालय में धक्का-मुक्की; प्रिंसिपल को कुर्सी से गिराने का आरोप, शिक्षिका और प्रधानाचार्य निलंबित https://basicshikshakhabar.com/2025/05/r-813/


Sunday, May 4, 2025

टीचर्स ऑफ द ईयर 2025 सम्मान समारोह | नवाचारी शिक्षकों को मिला मंच

 



टीचर्स ऑफ द ईयर 2025 शिक्षक सम्मान समारोह एक ऐसा आयोजन था जिसमें शिक्षकों की मेहनत, लगन और नवाचार को पहचान मिली। शिक्षक हमारे समाज की रीढ़ होते हैं। वे बच्चों को न केवल पढ़ाते हैं, बल्कि उनके जीवन को सही दिशा में ले जाते हैं। जब ऐसे शिक्षकों को सम्मान मिलता है, तो उनका मनोबल बढ़ता है और वे और भी अच्छा करने की प्रेरणा पाते हैं। स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन ने इसी सोच के साथ यह आयोजन किया, ताकि उन शिक्षकों को पहचाना जा सके जो पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की सोच और समझ को भी निखार रहे हैं।

यह कार्यक्रम "आरोही – एजुकेटिंग चिल्ड्रन फॉर जेंडर जस्टिस" नाम की पहल के अंतर्गत हुआ। इसका मकसद था उन शिक्षकों को सम्मान देना, जो अपने काम में कुछ नया कर रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई को रोचक और आसान बना रहे हैं। यह आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय के सभागार में हुआ और इसकी अगुवाई की स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन की प्रमुख डॉ. उर्वशी सैनी ने की।

इस समारोह के लिए प्रतियोगिता फरवरी 2025 में शुरू हुई थी। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के कुल 117 शिक्षकों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को अपनी किसी खास शिक्षण पद्धति या नवाचार पर एक वीडियो बनाकर वेबसाइट पर भेजना था। इन वीडियो में दिखाया गया कि शिक्षक किस तरह बच्चों को पढ़ा रहे हैं, क्या नया तरीका अपना रहे हैं, और बच्चों पर उसका क्या असर हो रहा है। फिर एक टीम ने उन वीडियो को देखा और सबसे अच्छे शिक्षकों को चुना।

इस प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के डॉ. त्रिलोकचंद को द्वितीय स्थान मिला। वे सिविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय ओरिया में सहायक अध्यापक हैं। उन्होंने विज्ञान को बच्चों के लिए आसान और मजेदार बनाने के नए तरीके बताए, जिससे बच्चे प्रयोग करके सीखते हैं। निर्णायक मंडल को यह तरीका बहुत अच्छा लगा।

पहला स्थान मिला उत्तर प्रदेश के ही कानपुर देहात की प्राथमिक विद्यालय नाही की शिक्षिका श्रीमती अवंतिका सिंह को। उन्होंने लड़कियों की पढ़ाई में नए प्रयोग किए और समावेशी शिक्षा की मिसाल पेश की। तीसरे स्थान पर रहीं कानपुर नगर की सहायक अध्यापिका श्रीमती रेखा गुप्ता, जिन्होंने बच्चों के व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखकर शिक्षा दी।

सम्मान समारोह 21 अप्रैल 2025 को हुआ। इसमें कई खास लोग मौजूद थे। मुख्य अतिथि थीं उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती विजयलक्ष्मी गौतम। उनके साथ मंच पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चंद्र राय, समग्र शिक्षा अभियान की प्रमुख श्रीमती एकता जैन, कस्तूरबा विद्यालय के डीसी श्री मुकेश और माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारी श्री विष्णु कांत पांडे भी थे।

इन सभी खास मेहमानों ने मंच पर आकर चुने गए शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्हें प्रशंसा पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह और नकद पुरस्कार दिए गए। डॉ. त्रिलोकचंद को ₹20,000 का चेक, एक प्रशंसा पत्र, मेडल और स्मृति चिन्ह मिला। यह उनके लिए बहुत गर्व की बात थी।

जब डॉ. त्रिलोकचंद ने मंच से अपनी बात कही, तो उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बहुत प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने जिले के शिक्षा अधिकारी श्री अजय मिश्रा, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्री अजब सिंह यादव और अपने स्कूल के पूरे स्टाफ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी शिक्षकों का है जो मेहनत से पढ़ाते हैं।

जब वे अपने विद्यालय लौटे, तो छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। स्कूल में खुशी का माहौल था और सबने मिलकर उनके सम्मान में कार्यक्रम भी किया।

इस आयोजन में सिर्फ "टीचर्स ऑफ द ईयर" के विजेता ही नहीं, बल्कि साल भर में हुई अन्य प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों और उनके शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। इनमें बाल साहित्य लेखन, चित्रकला, नुक्कड़ नाटक, विज्ञान प्रदर्शनी और बाल संसद जैसी प्रतियोगिताएं शामिल थीं। बच्चों के साथ-साथ उनके गाइड शिक्षकों को भी सम्मान मिला, क्योंकि उनके प्रयास से ही बच्चे इन आयोजनों में भाग ले पाए।

इस तरह के आयोजनों का समाज में बहुत बड़ा असर होता है। जब शिक्षकों को उनके अच्छे काम के लिए पहचाना जाता है, तो वे और भी लगन से काम करते हैं। वे बच्चों की पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते हैं।

इस आयोजन में उन शिक्षकों को खासतौर पर महत्व दिया गया जो लड़कियों और वंचित वर्ग के बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं। इससे समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा मिलता है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि "टीचर्स ऑफ द ईयर 2025" जैसे कार्यक्रम शिक्षा क्षेत्र में एक नई दिशा दिखाते हैं। ये न केवल शिक्षकों को सम्मानित करते हैं, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश देते हैं कि अच्छे कार्य की पहचान जरूर होती है। डॉ. त्रिलोकचंद जैसे शिक्षक हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बना रहे हैं। ऐसे आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

 

👉यूपी में छह आईएएस अफसरों के तबादले

https://www.updatemarts.com/2025/05/blog-post_125.html


👉UP: पहलगाम में मृत अफसर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी..! पोस्ट साझा करने पर शिक्षिका जेब अफरोज निलंबित; BSA ने लिया एक्शन..!

https://www.updatemarts.com/2025/05/up-bsa.html


👉जनपद में एनसीईआरटी की किताबें नहीं चलाने पर 33 स्कूलों पर लगाया एक-एक लाख रुपये का अर्थ दंड।

https://www.updatemarts.com/2025/05/33.html


 👉अंतर्जनपदीय म्यूच्यूअल ट्रांसफर स्पेशल

https://www.updatemarts.com/2025/05/blog-post_81.html


 


Saturday, May 3, 2025

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025: 11वें योग दिवस का आयोजन












 

👉उत्तर  प्रदेश के योजनान्तर्गत चयनित 1129 कम्पोजिट पी0एम0श्री विद्यालयों (कक्षा 1-8 ) में खान एकेडमी द्वारा STEM इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत शैक्षिक सत्र 2025-26 की ऑनलाइन कार्यशाला के सम्बन्ध में।

https://www.updatemarts.com/2025/05/1129-00-1-8-stem-2025-26.html


👉बंद मिले स्कूल, तीन प्रधानाध्यापक निलंबित

https://www.updatemarts.com/2025/05/blog-post_32.html


👉 स्थानांतरण के लिए आवेदन में ओटीपी का अड़ंगा

https://www.updatemarts.com/2025/05/blog-post_11.html



लू और हीट वेव से बचाव के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की गाइडलाइन

 





👉हाईकोर्ट में 6 मई 2025 को होगी पुरानी पेंशन के लिए सुनवाई: 28 मार्च 2005 से पूर्व नियुक्त शिक्षामित्रों को उम्मीद


👉शैक्षिक सत्र 2025-26 में (डी०बी०टी०) के माध्यम से सीधे छात्र-छात्राओं के माता/पिता/अभिभावकों के खाते में अन्तरित करने हेतु आवश्यक तैयारियों के सम्बन्ध में।


👉यू-डायस+ 2024-25 के अन्तर्गत परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों की स्टूडेण्ट प्रोफाइल तथा ड्रापबाक्स सम्बन्धी समीक्षा बैठक के सम्बन्ध में।


👉MDM : मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत कनवर्जन कास्ट व फल लागत की दरें एवं खाद्यान्न की मात्रा, योजना की शुरुआत से अबतक








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