Up basic School News

Basic education builds the foundation of a strong nation.

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a group of school children participating in a cultural event with joy and enthusiasm.

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NIPUN Bharat helps young children read and do basic math with understanding and confidence.

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Green mission by students to make earth clean and fresh.

Mission Shikshan Samvad – For Education and Teacher Respect

Mission to uplift education, honor teachers, and promote human welfare through dialogue.

Tuesday, May 13, 2025

प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन: ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का सशक्त संदेश

 


दिनांक 12 मई 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक संदेश दिया गया, जिसका मूल उद्देश्य देशवासियों को हाल ही में हुए आतंकवादी हमले, 'ऑपरेशन सिंदूर', और उसके बाद भारत की कड़ी कार्रवाई की जानकारी देना था। प्रधानमंत्री ने देश की जनता को संबोधित करते हुए वीरता, साहस और देशभक्ति की मिसाल बने हमारे सुरक्षाबलों को नमन किया और देश के प्रत्येक नागरिक को एकजुट होने का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देश के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना, वैज्ञानिकों, पुलिस बल, और खुफिया एजेंसियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की सुरक्षा और सम्मान के लिए की गई एक आवश्यक और निर्णायक कार्रवाई थी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले ने देश को झकझोर दिया था, जिसमें निर्दोष बच्चों और महिलाओं को निशाना बनाया गया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब चुप नहीं बैठ सकता था। यह हमला न केवल हमारे लोगों पर, बल्कि हमारे धैर्य और गरिमा पर भी हमला था। देश के शत्रुओं ने सोचा था कि भारत केवल बयान देगा और चुप रहेगा, लेकिन भारत ने अपनी नीति बदलते हुए "नेशन फर्स्ट" के सिद्धांत पर चलते हुए ठोस निर्णय लिया।

उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं का प्रतिकार था। यह भारत की ओर से स्पष्ट संदेश था कि आतंक और आतंकियों के लिए अब भारत में कोई जगह नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 6 मई की रात और 7 मई की सुबह भारत की सेनाओं ने अद्भुत बहादुरी के साथ उस कार्य को अंजाम दिया, जो पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारत अब किसी भी आतंकवादी हरकत को बर्दाश्त नहीं करेगा।

इस अभियान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकियों के कई लॉन्चिंग पैड, ट्रेनिंग कैंप और हथियार डिपो को ध्वस्त कर दिया। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह हमला केवल सैन्य बल पर ही आधारित नहीं था, बल्कि इसके पीछे महीनों की तैयारी, सटीक खुफिया जानकारी और अत्याधुनिक तकनीक का भी बड़ा योगदान था।

उन्होंने कहा कि यह समय देश में एकता और संकल्प का है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे किसी भी धर्म, जाति, वर्ग या भाषा से हों, देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक साथ खड़े हों। यह देश हम सबका है, और जब इस पर हमला होता है, तो जवाब भी एकजुट होकर दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की यह कार्रवाई किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन शांति का मतलब यह नहीं कि हम डरकर बैठें। अगर कोई हमारी माताओं, बहनों और बच्चों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा, तो भारत माफ नहीं करेगा।

इस भाषण में प्रधानमंत्री ने उन शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की, जिन्होंने अपने प्रियजनों को आतंक की भेंट चढ़ते देखा। उन्होंने कहा कि देश आपके साथ खड़ा है और आपकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। उन्होंने हर नागरिक से अपील की कि वे सेना और सरकार पर विश्वास बनाए रखें, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ सीमाओं की नहीं, बल्कि देश के आत्मसम्मान की है।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि आतंकवाद के खिलाफ यह निर्णायक लड़ाई केवल एक शुरुआत है। जब तक आतंक की जड़ें पूरी तरह समाप्त नहीं हो जातीं, तब तक भारत शांत नहीं बैठेगा। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि आने वाले दिनों में भारत अपनी सुरक्षा नीति को और सशक्त करेगा, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंक के समर्थकों को बेनकाब करेगा और सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत का यह हमला केवल सैन्य जीत नहीं, बल्कि नैतिक और रणनीतिक जीत भी है। आज पूरी दुनिया भारत की इस कार्रवाई को सराह रही है और कई देशों ने भारत के साहसिक कदम की सराहना की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य युद्ध नहीं, बल्कि आतंक से मुक्ति है।

प्रधानमंत्री ने मीडिया से अपील की कि वे संयम बरतें और किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें। उन्होंने देश के युवाओं से भी अपील की कि वे सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से प्रयोग करें और अफवाहें फैलाने वालों से सावधान रहें। यह समय है कि पूरा देश एक होकर देश की सुरक्षा और विकास में योगदान दे।

उन्होंने सभी राजनैतिक दलों से भी एकजुटता की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान से बड़ा कोई मुद्दा नहीं होता। उन्होंने सभी राज्यों की सरकारों से कहा कि वे शांति बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी तरह की नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करें।

प्रधानमंत्री के इस भाषण ने पूरे देश में एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भर दिया। सोशल मीडिया, टीवी चैनलों और आम लोगों के बीच यह भाषण चर्चा का विषय बना। लोग इसे भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घड़ी मान रहे हैं, जब देश ने एकजुट होकर आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दिया।

अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से वादा किया कि भारत की धरती पर आतंक को जड़ से खत्म किया जाएगा और शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र अपने सैनिकों, वैज्ञानिकों और नागरिकों के साहस और समर्पण से सुरक्षित और सशक्त बना है और रहेगा।

इस प्रकार प्रधानमंत्री का यह राष्ट्र के नाम संबोधन एक मजबूत, स्पष्ट और प्रेरणादायक संदेश था जो न केवल देशवासियों को एकजुट करता है, बल्कि दुनिया को भी बताता है कि भारत अब किसी भी सूरत में आतंक को बर्दाश्त नहीं करेगा।











👉उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की जानकारी अब ऑनलाइन होगी – हर गतिविधि मानव संपदा पोर्टल पर https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/manavsampda.html


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उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की जानकारी अब ऑनलाइन होगी – हर गतिविधि मानव संपदा पोर्टल पर

 

सरकारी कर्मचारियों की सभी जानकारियाँ ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। यह जानकारी मानव संपदा पोर्टल पर रहेगी और इस पोर्टल के माध्यम से हर कर्मचारी की नियुक्ति, कार्यभार, स्थानांतरण, प्रशिक्षण, वेतन, छुट्टियाँ, विदेश यात्रा, विभागीय जांच, और रिटायरमेंट से जुड़ी सभी प्रक्रियाएँ और विवरण पारदर्शिता के साथ ऑनलाइन उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिससे अब राज्य के लगभग आठ लाख दर्ज होंगे। इसका उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाना है, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे और आम जनता को अधिकारियों से संबंधित जानकारी तक तुरंत और सही समय पर पहुँच मिल सके।



मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र और प्रमुख सचिव मानव संसाधन विभाग मनीष कुमार सिंह ने इस प्रणाली को राज्यभर में लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है। इससे न सिर्फ कर्मचारियों का विवरण पूरी तरह से सिस्टम में दर्ज रहेगा, बल्कि कोई भी गतिविधि छुपाई नहीं जा सकेगी। मानव संपदा पोर्टल को उच्च स्तरीय निगरानी के लिए तैयार किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की देरी, अनियमितता या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न बचे। इससे सभी विभागों में पारदर्शिता आएगी और विभागीय कामों की गति भी तेज होगी।

अब कर्मचारियों को अपने सेवा संबंधी कार्यों के लिए इधर-उधर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जैसे ही कोई कार्य होता है—चाहे वह नियुक्ति हो, स्थानांतरण हो या वेतन में कोई बदलाव—वह सीधे पोर्टल पर अपडेट हो जाएगा। इससे जहां कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी, वहीं विभागों को अपने रिकॉर्ड दुरुस्त और अपडेटेड रखने में आसानी होगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पोर्टल का उपयोग अधिकारियों की कार्यशैली की निगरानी के लिए भी किया जाएगा। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने कार्य में लापरवाही या अनियमितता बरतता है, तो उसकी जानकारी भी इस पोर्टल पर दर्ज होगी और वरिष्ठ अधिकारियों तक स्वतः पहुंच जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदारी से कार्य करे।

यह निर्णय सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम है। अब कोई भी कर्मचारी छुट्टी पर है या नहीं, बाहर गया है या विभागीय जांच में है—सारी जानकारी तुरंत मिल सकेगी। इससे विभागीय कार्यों की गति बढ़ेगी और जवाबदेही तय होगी।

मानव संपदा पोर्टल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पूरी तरह से सुरक्षित हो, जिसमें डाटा की गोपनीयता और कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारियाँ संरक्षित रहें। पोर्टल में लॉगिन करने के बाद ही किसी कर्मचारी की जानकारी देखी जा सकेगी और इसके लिए भी अधिकृत पदाधिकारियों को ही अनुमति दी जाएगी।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द अपने विभाग के कर्मचारियों की जानकारियाँ पोर्टल पर अपडेट करें और नियमित रूप से इसकी समीक्षा करें। इसके साथ ही सभी जिलों के डीएम और विभाग प्रमुखों को मानव संपदा पोर्टल की जानकारी देने और प्रशिक्षण दिलाने का भी निर्देश जारी किया गया है।

इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा दिया जाए। कर्मचारियों को बिना किसी बाधा के अपनी सेवा से संबंधित जानकारियाँ मिले और आम जनता को भी यह पता चल सके कि कौन सा अधिकारी किस जगह पर है, किस कार्य के लिए उत्तरदायी है और किन कार्यों में उसकी भूमिका रही है।

यूपी सरकार का यह कदम डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक मिसाल बन सकता है और अन्य राज्यों को भी इससे सीख मिल सकती है। इस व्यवस्था से शासन, प्रशासन और आम जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आएगी।

सरकार ने यह भी कहा है कि इस नई प्रणाली के लागू होने से सरकारी विभागों में "फाइल दबाने" या "जानकारी छुपाने" की पुरानी आदतों पर पूरी तरह से रोक लगेगी। जो भी कार्य होंगे, वे समयबद्ध ढंग से होंगे और रिकॉर्ड में दर्ज भी होंगे। इस सिस्टम में यदि कोई अधिकारी जानबूझकर प्रक्रिया में देरी करता है या कार्य नहीं करता, तो उसकी जवाबदेही भी तय होगी।

अब न केवल मुख्यालय स्तर पर बल्कि ब्लॉक, जिला और मंडल स्तर तक की सभी जानकारियाँ डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होंगी। हर कर्मचारी की व्यक्तिगत जानकारी, प्रोफाइल, तैनाती का स्थान, सेवा विवरण, पदोन्नति, वेतन वृद्धि, स्थानांतरण, पेंशन प्रक्रिया, प्रशिक्षण, और सभी विभागीय कार्रवाइयों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।

मानव संपदा पोर्टल को विभागों की आंतरिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए इस तरह विकसित किया गया है कि यह कर्मचारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन में भी सहायक बनेगा। इससे भविष्य में पदोन्नति और सेवा विस्तार जैसे निर्णय भी आंकड़ों के आधार पर लिए जा सकेंगे।

यह व्यवस्था केवल अफसरों या बड़े कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर शिक्षक, लिपिक, लेखाकार, तकनीकी सहायक, सफाई कर्मचारी, कंप्यूटर ऑपरेटर, आशुलिपिक, सचिव, लेखा परीक्षक, नायब तहसीलदार आदि सभी के लिए अनिवार्य है।

इस पोर्टल से न केवल शासन के स्तर पर निगरानी संभव होगी, बल्कि स्वयं कर्मचारी भी अपनी प्रोफाइल देखकर यह जान सकेंगे कि उनका कौन सा काम लंबित है, कौन सा कार्य कब हुआ, और भविष्य में कौन-से कार्य निर्धारित हैं। इससे कर्मचारियों की कार्य दक्षता में भी सुधार होगा और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होगी।

यूपी सरकार का यह प्रयास न केवल कार्य प्रणाली को पारदर्शी और प्रभावशाली बनाएगा, बल्कि जनता को भी यह विश्वास दिलाएगा कि अब सरकारी तंत्र में सुधार आ रहा है। कर्मचारियों को अपनी सेवाओं के दौरान किसी भी स्तर पर होने वाली परेशानी से निजात मिलेगी और सभी प्रक्रियाएँ एक तय समय सीमा के भीतर पूरी होंगी।

मानव संपदा पोर्टल भविष्य की डिजिटल भारत की उस नींव का हिस्सा है, जहां सरकारी कामकाज कागज़ों से हटकर ऑनलाइन सिस्टम पर आधारित होगा। यह नई प्रणाली न केवल शासन को आधुनिक बनाएगी, बल्कि जनता को भी सेवा वितरण में त्वरित सुविधा देगी।

इस तरह उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करेगा और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही, पारदर्शिता तथा कार्यप्रणाली में सुधार लाने का सशक्त माध्यम बनेगा।

 


👉शिक्षक: समाज के सच्चे हीरो और जीवन के मार्गदर्शक  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/heroesofsociety.html


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Sunday, May 11, 2025

शिक्षक: समाज के सच्चे हीरो और जीवन के मार्गदर्शक

 

शिक्षक केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं होते, वे समाज के मार्गदर्शक, संस्कारों के संरक्षक और भावी पीढ़ियों के शिल्पकार होते हैं। “शिक्षक: सिर्फ पढ़ाते नहीं, जीना सिखाते हैं, हर मुश्किल राह में बनते हैं साहस” — इस शीर्षक के साथ प्रकाशित यह समाचार कानपुर देहात के शिक्षकों के सामाजिक योगदान, नैतिक नेतृत्व और जीवन निर्माण में उनकी भूमिका को उजागर करता है। यह लेख शिक्षक दिवस जैसे अवसरों की गरिमा को और भी गहरा करता है क्योंकि इसमें शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं मानी गई, बल्कि उनके जीवन मूल्यों, प्रेरणा, संघर्ष और समर्पण को दर्शाया गया है।

कानपुर देहात में शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, वे अपने विद्यार्थियों के जीवन को संवारने में निरंतर सक्रिय रहते हैं। चाहे जीवन की कठिन परिस्थितियाँ हों या समाज में व्याप्त चुनौतियाँ, शिक्षक अपने अनुभव, संवेदनशीलता और परिश्रम से न केवल विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं, बल्कि उनके परिवार और पूरे समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बन जाते हैं। यह रिपोर्ट इसी बात की पुष्टि करती है कि शिक्षक शिक्षा से बढ़कर जीवन का पाठ पढ़ाते हैं।

समाचार में यह बताया गया है कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए केवल शिक्षक नहीं बल्कि मित्र, मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। वे अपने जीवन के अनुभवों से बच्चों को न केवल किताबों की जानकारी देते हैं, बल्कि उन्हें जीवन की कठिनाइयों से जूझने का साहस और समाधान ढूंढने की कला भी सिखाते हैं। जब बच्चे निराशा, असफलता या मानसिक दबाव में आते हैं, तब यही शिक्षक उन्हें सहारा देते हैं और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि एक आदर्श शिक्षक वही होता है जो अपने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाए, उन्हें अच्छे-बुरे में फर्क करना सिखाए और उनके अंदर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करे। शिक्षक अपने कार्य के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और करुणा की भावना भी भरते हैं, जिससे वे आगे चलकर समाज के अच्छे नागरिक बन सकें।

इस समाचार में कुछ शिक्षकों के उदाहरण भी दिए गए हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों से न केवल स्कूलों में बल्कि समाज में भी बदलाव की लहर चलाई है। उन्होंने शिक्षा को केवल विषयों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षा को जीवन से जोड़ा है। ऐसे शिक्षक अपने विद्यार्थियों के सपनों को पहचानते हैं और उन्हें साकार करने में मदद करते हैं।

समाचार यह भी दर्शाता है कि एक शिक्षक का सबसे बड़ा गुण उसका सकारात्मक दृष्टिकोण होता है। वह अपने विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान कर उसे विकसित करता है। शिक्षक के अंदर करुणा, धैर्य, सहनशीलता, और हर बच्चे को अपनाने की भावना होती है। यही गुण उन्हें एक साधारण व्यक्ति से समाज निर्माता बना देते हैं।

शिक्षकों की भूमिका तकनीकी युग में और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आज जब सोशल मीडिया, इंटरनेट और मोबाइल बच्चों के मन-मस्तिष्क पर प्रभाव डाल रहे हैं, तब शिक्षक ही हैं जो उन्हें सही दिशा में सोचने, निर्णय लेने और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। यह समाचार उसी विचार को और गहराई देता है कि डिजिटल युग में भी मानवीय मूल्यों की शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है और शिक्षक उसका प्रमुख स्रोत हैं।

इस रिपोर्ट में एक संदेश यह भी छिपा है कि शिक्षक समाज के सभी वर्गों को जोड़ने वाला एक मजबूत पुल हैं। वे जाति, धर्म, भाषा या वर्ग के भेद से ऊपर उठकर सभी बच्चों को एक समान दृष्टि से देखते हैं और उन्हें सशक्त बनाते हैं। जब शिक्षक समाज सेवा, सहयोग और नैतिक आचरण की मिसाल पेश करते हैं, तब विद्यार्थी भी उन्हीं मूल्यों को अपने जीवन में अपनाते हैं।

यह लेख शिक्षक समुदाय के समर्पण, परिश्रम और आत्मबल को एक सम्मान के रूप में प्रस्तुत करता है। यह हमें यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि समाज को बदलने की शुरुआत स्कूलों से और खासकर शिक्षकों से होती है। एक शिक्षक यदि चाहे तो किसी बच्चे की जिंदगी बदल सकता है और बदली हुई जिंदगी से पूरा समाज प्रभावित हो सकता है।

समाचार में इस बात को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि शिक्षक सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और सेवा है। शिक्षक वही नहीं जो सिर्फ विषय समझाए, बल्कि वह है जो जीवन जीना सिखाए, जो बच्चे को भावनात्मक, मानसिक और नैतिक रूप से मज़बूत बनाए।

कुल मिलाकर यह समाचार यह संदेश देता है कि शिक्षक समाज के सच्चे हीरो हैं। वे प्रेरणा हैं, शक्ति हैं और मार्गदर्शक हैं। उनका काम केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि बच्चों को ज़िंदगी की हर परीक्षा के लिए तैयार करना है। ऐसे शिक्षक ही समाज के निर्माण में नींव का पत्थर होते हैं। यह लेख सभी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें अपने शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन करना चाहिए और उनकी शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करना चाहिए।


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सिविल डिफेंस में भर्ती शुरू, आम लोग बनें देश के रक्षक



 सिविल डिफेंस भर्ती शुरू – अब आम लोग भी बन सकेंगे आपदा में देश के रक्षक


भारत सरकार के निर्देश पर देश के विभिन्न राज्यों में नागरिकों को आपदा और युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में मदद के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसी क्रम में प्रयागराज में सिविल डिफेंस (नागर सुरक्षा) के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य है – आम नागरिकों को प्रशिक्षित कर उन्हें संकट की घड़ी में देश और समाज की सेवा के लिए तैयार करना।

क्या है सिविल डिफेंस?

सिविल डिफेंस एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत नागरिकों को किसी आपदा, युद्ध या आपातकालीन स्थिति में राहत, बचाव और सुरक्षा के कामों में शामिल किया जाता है। ये सदस्य पुलिस, प्रशासन और सेना के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में सेवाएं देते हैं। प्राकृतिक आपदा, आगजनी, बाढ़, दुर्घटना, युद्ध या किसी आतंकी घटना के समय ये लोग अग्रिम पंक्ति में खड़े होते हैं और लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रयागराज में भर्ती का अवसर

प्रयागराज जिले में सिविल डिफेंस संगठन के अंतर्गत अभी लगभग 700 सक्रिय सदस्य हैं, जो नियमित रूप से प्रशिक्षण लेते रहते हैं और समय-समय पर राहत कार्यों में प्रशासन का सहयोग करते हैं। लेकिन अब इस संख्या को और बढ़ाने की योजना बनाई गई है। 18 हजार रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और प्रथम चरण में 1000 फॉर्म वितरित किए गए हैं। यानी अब आम नागरिक भी आवेदन कर सिविल डिफेंस का हिस्सा बन सकते हैं।

भर्ती प्रक्रिया क्या है?

सिविल डिफेंस में भर्ती के लिए नागरिकों को एक फॉर्म भरना होगा, जो सिविल डिफेंस कार्यालय (नागर सुरक्षा भवन) से प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों को निर्धारित समय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें आपदा प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा, अग्निशमन, रेस्क्यू तकनीक आदि की जानकारी दी जाएगी।

महत्वपूर्ण बिंदु:

फॉर्म नि:शुल्क मिल रहे हैं।

पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

18 वर्ष से अधिक आयु वाले नागरिक आवेदन कर सकते हैं।

महिला और पुरुष दोनों वर्गों के लिए अवसर खुला है।

वार्डन के माध्यम से सदस्यता संभव है।

क्यों जरूरी है सिविल डिफेंस?

प्राकृतिक आपदाएं और मानवीय संकट अचानक आ जाते हैं, जैसे – बाढ़, भूकंप, आग, इमारत गिरना, सड़क दुर्घटनाएं, रेल हादसे, या युद्ध जैसी परिस्थितियां। ऐसे समय में यदि स्थानीय नागरिक प्रशिक्षित हों, तो वे घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचकर जान-माल की हानि को रोक सकते हैं। यही कारण है कि भारत सरकार अब सिविल डिफेंस को मजबूत करना चाहती है।

सिविल डिफेंस सदस्य:

राहत और बचाव कार्य करते हैं।

घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करते हैं।

सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करते हैं।

ट्रैफिक कंट्रोल, आग बुझाना, लोगों को शेल्टर तक पहुंचाना, और बच्चों-बुजुर्गों की विशेष सहायता करते हैं।

पूर्व सैनिकों को मिलेगा विशेष स्थान

इस भर्ती में एक विशेष प्रावधान यह भी किया गया है कि पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि वे पहले से प्रशिक्षित होते हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर तरीके से कार्य कर सकते हैं। यह कदम न केवल उनकी सेवा भावना को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि देश को उनके अनुभव का लाभ भी मिलेगा।

समाज सेवा का सुनहरा अवसर

सिविल डिफेंस में शामिल होना सिर्फ सरकारी सेवा नहीं है, बल्कि एक समाज सेवा और देशभक्ति का अवसर है। जो युवा देश की सेवा करना चाहते हैं, सेना या पुलिस में नहीं जा सके, वे इस माध्यम से अपना योगदान दे सकते हैं। यह न केवल उन्हें गर्व की अनुभूति कराता है, बल्कि समाज में सम्मान भी दिलाता है।

फॉर्म कहाँ से और कैसे लें?

नागर सुरक्षा कार्यालय, प्रयागराज से इच्छुक व्यक्ति फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही संबंधित वार्डन के माध्यम से भी फॉर्म भरा जा सकता है। इच्छुक व्यक्तियों को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द फॉर्म भरें और इस महान सेवा में शामिल हों।

सिविल डिफेंस की भूमिका और भविष्य

जैसे-जैसे समाज और शहर विकसित हो रहे हैं, वैसे-वैसे दुर्घटनाओं और आपदाओं की संभावना भी बढ़ रही है। ऐसे में सिविल डिफेंस की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। एक मजबूत, प्रशिक्षित नागरिक बल न केवल प्रशासन का काम आसान करेगा, बल्कि आम जनता में भी आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ाएगा।

प्रयागराज में शुरू हुई सिविल डिफेंस भर्ती एक ऐसा अवसर है, जो न केवल नागरिकों को सेवा के क्षेत्र में आगे लाता है, बल्कि उन्हें प्रशिक्षित कर समाज का सजग प्रहरी भी बनाता है। यदि आप भी समाज की सेवा करना चाहते हैं, देश के लिए कुछ करना चाहते हैं और संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने का जज्बा रखते हैं – तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है।

 

👉शिक्षकों ने गरीब लड़की की शादी के लिए की मदद  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/poorgirl.html


👉UP TGT परीक्षा 2025 स्थगित – 14 और 15 मई की परीक्षा अब नई तिथि पर होगी https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/TGT.html


👉बस्ती में ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक को जेल https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/social%20media%20post%20.html


👉उत्तर प्रदेश में जातिवार गणना के लिए जियो फेंसिंग, टैबलेट और एआई तकनीक का होगा प्रयोग: एक ऐतिहासिक पहल  https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/censusnews.html


👉अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025: 11वें योग दिवस का आयोजन https://upbasicschoolnews.blogspot.com/2025/05/2025-11.html 


शिक्षकों ने गरीब लड़की की शादी के लिए की मदद

 


शिक्षकों ने निभाई समाज सेवा की भूमिका – गरीब की बेटी की शादी के लिए जुटाया गृहस्थी का सामान

 


देशभर में जब-जब समाज सेवा की बात होती है, तो उसमें अक्सर डॉक्टरों, समाजसेवियों, सरकारी संस्थाओं या राजनीतिक नेताओं की चर्चा होती है। परंतु इस बार उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जनपद के संदलपुर ब्लॉक शिक्षकों ने समाज सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश की है जो हर दिल को छू लेने वाली है।

यह घटना एक गरीब परिवार की बेटी की शादी से जुड़ी है, जो कि झोपड़ी में रहकर जैसे-तैसे जीवन व्यतीत कर रहा था। लड़की के पिता के पास न तो आय का कोई निश्चित साधन था और न ही वह अपनी बेटी की शादी का खर्च उठा पाने की स्थिति में थे। जब यह बात शिक्षकों को पता चली, तो उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के, अपने निजी स्तर पर इस परिवार की मदद करने का फैसला किया।

शिक्षकों ने इस गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति और बेटी की शादी की जरूरत को समझते हुए, गृहस्थी के लगभग सभी जरूरी सामान जैसे बर्तन, पलंग, गद्दा, गैस सिलेंडर, अलमारी, कपड़े, टेबल पंखा, कूलर, बाल्टी, ड्रम, बिछावन, चादरें, तकिए आदि जुटाए और उन तक पहुँचा दिए। सिर्फ सामान ही नहीं, उन्होंने लड़की की शादी में आर्थिक सहायता भी प्रदान की, ताकि वह विवाह बिना किसी बाधा के सम्पन्न हो सके।

इस पुनीत कार्य में भाग लेने वाले शिक्षक सिर्फ अपने विषय की शिक्षा नहीं दे रहे, बल्कि मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं की भी शिक्षा समाज को दे रहे हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षक समाज के निर्माण में केवल विद्यालय की चारदीवारी के भीतर ही नहीं, बल्कि समाज के हर जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी देने वाले दीपक हैं।

इस नेक पहल की अगुवाई करते हुए शिक्षकों ने कहा कि जब तक शिक्षक समाज से जुड़कर, समाज की समस्याओं को समझकर उनके समाधान में भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रहेगा।

इस प्रयास में भाग लेने वाले प्रमुख शिक्षकों में शामिल रहे – दीपक कटियार, संदीप कटियार, विवेक कुमार, शशिकांत बिंदल, मनीष चौधरी, डॉ. राकेश त्रिपाठी, रमेश चौरसिया, गौरव सिंह राजपूत, प्रभात गुप्ता, सुभाष किशोर, सत्येंद्र सिंह, अमरेंद्र गुप्ता, प्रदीप तिवारी, मनीष श्रीवास्तव, रामकृष्ण पाल, विवेक शुक्ला, विनय त्रिपाठी, मयंक पांडेय, रमेश यादव, अंकुर वर्मा, योगेश त्रिपाठी, अशोक यादव आदि।

गौर करने योग्य बात यह भी है कि इस घटना की जानकारी जब आस-पास के ग्रामीणों और समाज के अन्य लोगों को हुई, तो वे भी शिक्षकों की इस पहल की सराहना करने लगे। लोगों ने इसे समाज में एक नई दिशा देने वाला प्रयास बताया। यह घटना एक उदाहरण है कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने-अपने स्तर पर समाज की मदद के लिए तैयार हो जाए, तो कोई भी व्यक्ति अभावग्रस्त नहीं रहेगा।

इस पहल से शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी खुशी जताई और कहा कि ऐसे शिक्षक वास्तव में विभाग का गौरव हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास अन्य शिक्षकों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।

इस कार्यक्रम को शिक्षकों ने किसी औपचारिकता या दिखावे के रूप में नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से मानवीय कर्तव्य समझकर निभाया। उन्होंने यह कार्य न तो मीडिया में दिखाने के लिए किया और न ही किसी प्रकार की प्रसिद्धि पाने के लिए, बल्कि सिर्फ इसलिए किया ताकि एक गरीब बेटी की शादी बिना किसी रुकावट के हो सके और उसके माता-पिता की चिंता कुछ हद तक कम हो जाए।

गांव के लोगों ने भी शिक्षकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आज के समय में जब हर कोई सिर्फ अपने स्वार्थ के बारे में सोचता है, तब ऐसे लोग समाज की सच्ची धरोहर हैं। शिक्षक, जो शिक्षा का दीप जलाते हैं, वही समाज में सेवा का भी उदाहरण बन सकते हैं – यह घटना उसका सटीक उदाहरण है।

इस पूरी घटना ने समाज को यह भी सिखाया कि एक शिक्षक का कार्य सिर्फ विद्यार्थियों को पढ़ाना नहीं होता, बल्कि वह समाज के कमजोर वर्गों को सहारा देने का माध्यम भी बन सकता है। शिक्षकों का यह कार्य न सिर्फ मानवता की सेवा है, बल्कि उनके पेशे की गरिमा को भी नई ऊंचाई देता है।

इस प्रेरणादायक समाचार से यह स्पष्ट होता है कि यदि शिक्षकों की सोच समाज-सेवा की हो, तो वे ना केवल भविष्य के नागरिकों को शिक्षित कर सकते हैं, बल्कि वर्तमान समाज की समस्याओं को भी हल करने में योगदान दे सकते हैं। शिक्षकों का यह योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी मिसाल बन सकता है, जिससे वे सीखें कि इंसानियत और मदद का जज़्बा ही सच्ची शिक्षा का सार है।


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